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11 वर्ष में संतृप्त हो सके पांच गांव
Firozabad
Updated Wed, 25 Jun 2014 05:30 AM IST
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फीरोजाबाद/सिरसागंज। वित्तीय वर्ष 2003-04 में संपूर्ण स्वच्छता अभियान की शुरुआत हुई थी। तब शौचालय निर्माण को दो हजार रुपये मिलते थे। एक दशक में प्रशासन मात्र एका ब्लाक के नगला बावन को पूर्ण संतृप्त कर सका। जिले के तत्कालीन एडीपीआरओ गिरीश चंद्र के निर्देशन में ब्लाक से लेकर गांवों तक में गोष्ठियां हुई। ग्राम प्रधानों ने भी रुचि ली। पुरस्कार के लिए नारखी ब्लाक के गांव कुतुकपुर चनौरा का भी नाम भेजा गया। यहां के पूर्व प्रधान शीतल सिंह कुशवाह ने कड़ी मेहनत की। गांवों में केंद्रीय टीम ने दस्तक दी। चनौरा तो फेल हो गया लेकिन एका के नगला बावन का चयन राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए कर लिया गया। डीपीआरओ इंद्रपाल सिंह ने नगला बावन की प्रधान को दिल्ली भेजने की तैयारी कर ली थी। लेकिन ऐन वक्त पर पुरस्कार सूची से इस गांव को हटा दिया गया। 2012-13 में योजना का नाम बदलकर निर्मल भारत अभियान किया। शासन ने धनराशि बढ़ाकर दस हजार कर दी। अब जिले में चार गांव और संतृप्त हुए, ये हैं अरांव का धरमई, फीरोजाबाद का ऊंधनी, घुनपई और मेवली।
13.30 करोड़ रुपये खर्च कर चुका विभाग
- 28,986 व्यक्तिगत शौचालय बने, खर्च हुए 881.16 लाख रुपये
- स्कूलों में 1448 शौचालयों का निर्माण हुआ, खर्च हुए 397.52 लाख रुपये
- आंगनबाड़ी केंद्रों में 963 बाल शौचालय बने, खर्च हुए 48.15 लाख रुपये
- 10 सामुदायिक शौचालय बने, खर्च हुए 4.12 लाख रुपये
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संतृप्त गांव की महिलाएं बोलीं शौचालय जरूरी
घर में शौचालय जरूरी हो गया। महिलाओं और बेटियों के साथ होने वाली घटनाएं शौच जाने के समय ही होती हैं इनको रोकने में यह काफी सहायक हैं।
- संजू देवी, धरमई
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परिवार को काफी राहत मिली। दिन हो या रात कभी कोई चिंता नहीं रहती कि बेटी या परिवार की किसी महिला को बाहर जाना है। हम तो यही कहेंगे शौचालयों अवश्य बनवाएं।
- सीमा देवी, धरमई
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शौचालय का निर्माण हर तरह से फायदे में है। दूसरे गांवों में जिनके घरों में शौचालय नहीं हैं वह कहते हैं कि हम भी बनवाएंगे। घर बनाते समय ही शौचालय बनवाएं।
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- ममता देवी, धरमई
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पहले यह लगता था कि बेकार में शौचालय का निर्माण कराएं। लेकिन आए दिन महिलाओं के साथ घटनाओं को सुना तो लगा कि बनवा लिया तो अच्छा रहा।
- सत्यवती देवी, धरमई
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घरों में शौचालय निर्माण के बड़े फायदे हैं। महिलाओं और बेटियों को अब घरों के बाहर शौच को नहीं जाना पड़ता। घर-घर शौचालय बनाने को काफी प्रयास किए थे। ग्रामीणों को जागरूक करने को रैली निकाली। बेटियों को जागरूक किया। अब ग्रामीण खुश हैं।
- विनीता देवी, प्रधान धरमई अरांव
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13.30 करोड़ रुपये खर्च कर चुका विभाग
- 28,986 व्यक्तिगत शौचालय बने, खर्च हुए 881.16 लाख रुपये
- स्कूलों में 1448 शौचालयों का निर्माण हुआ, खर्च हुए 397.52 लाख रुपये
- आंगनबाड़ी केंद्रों में 963 बाल शौचालय बने, खर्च हुए 48.15 लाख रुपये
- 10 सामुदायिक शौचालय बने, खर्च हुए 4.12 लाख रुपये
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संतृप्त गांव की महिलाएं बोलीं शौचालय जरूरी
घर में शौचालय जरूरी हो गया। महिलाओं और बेटियों के साथ होने वाली घटनाएं शौच जाने के समय ही होती हैं इनको रोकने में यह काफी सहायक हैं।
- संजू देवी, धरमई
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परिवार को काफी राहत मिली। दिन हो या रात कभी कोई चिंता नहीं रहती कि बेटी या परिवार की किसी महिला को बाहर जाना है। हम तो यही कहेंगे शौचालयों अवश्य बनवाएं।
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- सीमा देवी, धरमई
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शौचालय का निर्माण हर तरह से फायदे में है। दूसरे गांवों में जिनके घरों में शौचालय नहीं हैं वह कहते हैं कि हम भी बनवाएंगे। घर बनाते समय ही शौचालय बनवाएं।
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- ममता देवी, धरमई
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पहले यह लगता था कि बेकार में शौचालय का निर्माण कराएं। लेकिन आए दिन महिलाओं के साथ घटनाओं को सुना तो लगा कि बनवा लिया तो अच्छा रहा।
- सत्यवती देवी, धरमई
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घरों में शौचालय निर्माण के बड़े फायदे हैं। महिलाओं और बेटियों को अब घरों के बाहर शौच को नहीं जाना पड़ता। घर-घर शौचालय बनाने को काफी प्रयास किए थे। ग्रामीणों को जागरूक करने को रैली निकाली। बेटियों को जागरूक किया। अब ग्रामीण खुश हैं।
- विनीता देवी, प्रधान धरमई अरांव