{"_id":"5-48853","slug":"Firozabad-48853-5","type":"story","status":"publish","title_hn":"दो सौ स्कूलों में ड्रेस को नहीं पहुंचा पैसा ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दो सौ स्कूलों में ड्रेस को नहीं पहुंचा पैसा
Firozabad
Updated Tue, 20 Nov 2012 12:00 PM IST
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फीरोजाबाद। ग्रामीण इलाकों में प्राइमरी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों के लिये ड्रेस वितरण सपना बनकर रह गया है। जिले के करीब दो सैकड़ा स्कूलों में अभी तक बच्चों को स्कूली ड्रेस मुहैया नहीं करायी गयी है। वहीं सहायता प्राप्त 40 स्कूल के छात्र भी ड्रेस को तरस रहे है।
शिक्षा सत्र के पांच माह बीतने के बाद भी अभी तक करीब 200 स्कूलों में बच्चों को ड्रेस नहीं दी जा सकी है। वहीं इसका कारण प्रधानाध्यापक खाते में पैसा न आना बता रहे है। कहीं स्कूलों में ड्रेस कमीशन ठीक न मिलने के कारण ड्रेस का पैसा खाते में न आने के कारण ड्रेस नहीं खरीदी जा सकी हैं। सबसे ज्यादा स्कूल एका व खैरगढ़ के है। एका ब्लाक के एबीएसए बलिराम ने बताया कि अभी तक कई स्कूलों के खाते में पैसा ही नहीं दिया गया है तो ड्रेस कैसे खरीदी जायेगी। सोमवार को एका ब्लाक के कोरारी सरहद प्राइमरी व जूनियर स्कूल, गना करजिया प्राइमरी व जूनियर स्कूलों के खाते में बीएसए कार्यालय से पैसा भेजा गया है। पैसा आने के बाद ही ड्रेस की खरीद होगी।
ग्रामीण इलाकों में स्थिति खराब
ग्रामीण इलाकों के प्राइमरी स्कूलों की स्थिति खराब है। यहां के जिन स्कूलों में ड्रेस बांटी गयी तो उनकी क्वालिटी घटिया है। सर्दी में कपड़ा हल्का होने के कारण छात्रों को परेशानी हो रही है।
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खाते नहीं कराए उपलब्ध
सूत्रों की माने तो ड्रेस का पैसा न पहुंच पाने में प्रधानाचार्य की गलती सामने आ रही है। जिन स्कूलों में ड्रेस के लिये पैसा ट्रांसफर नहीं किया जा सका है। वहां पर पता चला है कि उन स्कूलों ने बीएसए कार्यालय को खाते नंबर ही नहीं दिया था। जिससे पैसा ट्रांसफर किया जाता।
तो इसलिए नहीं बन पा रहीं समिति
20 नवंबर को शासन के पास ड्रेस वितरण की रिपोर्ट भेजी जानी थी। समिति का गठन जिलाधिकारी को करना था। इस समिति को सभी स्कूलों में जाकर ड्रेस वितरण की जानकारी, उसकी गुणवत्ता, ड्रेस की रसीद के अलावा कई चीजों को देखना था। शायद ड्रेस का पैसा ही जब विभाग के खाते में नहीं पड़ा है तो समिति को बनाने से बचा जा रहा है।
जिन स्कूलों ने खाते संख्या भेजी थी। उन स्कूलों को पैसा ट्रांसफर कर दिया है। जिन स्कूलों ने खाता संख्या नहीं दी है। उन स्कूलों पर खाता संख्या न देने पर नोटिस दिया जायेगा।
बेसिक शिक्षाधिकारी डा. जितेंद्र सिंह यादव।
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शिक्षा सत्र के पांच माह बीतने के बाद भी अभी तक करीब 200 स्कूलों में बच्चों को ड्रेस नहीं दी जा सकी है। वहीं इसका कारण प्रधानाध्यापक खाते में पैसा न आना बता रहे है। कहीं स्कूलों में ड्रेस कमीशन ठीक न मिलने के कारण ड्रेस का पैसा खाते में न आने के कारण ड्रेस नहीं खरीदी जा सकी हैं। सबसे ज्यादा स्कूल एका व खैरगढ़ के है। एका ब्लाक के एबीएसए बलिराम ने बताया कि अभी तक कई स्कूलों के खाते में पैसा ही नहीं दिया गया है तो ड्रेस कैसे खरीदी जायेगी। सोमवार को एका ब्लाक के कोरारी सरहद प्राइमरी व जूनियर स्कूल, गना करजिया प्राइमरी व जूनियर स्कूलों के खाते में बीएसए कार्यालय से पैसा भेजा गया है। पैसा आने के बाद ही ड्रेस की खरीद होगी।
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ग्रामीण इलाकों में स्थिति खराब
ग्रामीण इलाकों के प्राइमरी स्कूलों की स्थिति खराब है। यहां के जिन स्कूलों में ड्रेस बांटी गयी तो उनकी क्वालिटी घटिया है। सर्दी में कपड़ा हल्का होने के कारण छात्रों को परेशानी हो रही है।
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खाते नहीं कराए उपलब्ध
सूत्रों की माने तो ड्रेस का पैसा न पहुंच पाने में प्रधानाचार्य की गलती सामने आ रही है। जिन स्कूलों में ड्रेस के लिये पैसा ट्रांसफर नहीं किया जा सका है। वहां पर पता चला है कि उन स्कूलों ने बीएसए कार्यालय को खाते नंबर ही नहीं दिया था। जिससे पैसा ट्रांसफर किया जाता।
तो इसलिए नहीं बन पा रहीं समिति
20 नवंबर को शासन के पास ड्रेस वितरण की रिपोर्ट भेजी जानी थी। समिति का गठन जिलाधिकारी को करना था। इस समिति को सभी स्कूलों में जाकर ड्रेस वितरण की जानकारी, उसकी गुणवत्ता, ड्रेस की रसीद के अलावा कई चीजों को देखना था। शायद ड्रेस का पैसा ही जब विभाग के खाते में नहीं पड़ा है तो समिति को बनाने से बचा जा रहा है।
जिन स्कूलों ने खाते संख्या भेजी थी। उन स्कूलों को पैसा ट्रांसफर कर दिया है। जिन स्कूलों ने खाता संख्या नहीं दी है। उन स्कूलों पर खाता संख्या न देने पर नोटिस दिया जायेगा।
बेसिक शिक्षाधिकारी डा. जितेंद्र सिंह यादव।