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सुहागनगरी में बदहाल आयुर्वेद चिकित्सा प्रणाली
Firozabad
Updated Sun, 11 Nov 2012 12:00 PM IST
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फीरोजाबाद। आयुर्वेद चिकित्सा प्रणाली बदहाल है। कहीं किराए के भवनों में, कहीं दान दिए मकानों में अस्पताल संचालित हो रहे हैं। दो अस्पताल चिकित्सक विहीन वहीं अधिकांश पर वार्ड ब्वाय तक नहीं हैं। दवाओं के लिए भी उचित मात्रा में बजट का आवंटन नहीं होता। आयुर्वेद एवं यूनानी की डिग्री लेने वाले चिकित्सक भी ऐलोपैथी से ही उपचार करने लगे हैं।
वैद्य धनवंतरी की जयंती आज धनतेरस के दिन मनाई जाएगी। उनकी चिकित्सा प्रणाली सुहागनगरी में दिन प्रतिदिन दम तोड़ती जा रही है। आयुर्वेद के जिला अस्पताल का संचालन फीरोजाबाद के महावीरनगर स्थित एक मकान में हो रहा है। यहां आने वाले मरीजों की संख्या 40 से 50 तक प्रतिदिन रहती है, लेकिन ग्रामीण अंचल में इनके संचालन की स्थिति और खराब है। जिन दवाओं की जरूरत है मरीजों नहीं मिलती हैं यही कारण है कि वह एलोपैथी से उपचार कराने को विवश हो जाते हैं। आयुर्वेद चिकित्सालयों की बात करें तो जिले में इनकी संख्या 26 है। यूनानी चिकित्सा प्रणाली से उपचार करने वालों की संख्या दो है। 24 अस्पतालों में चिकित्सकों की तैनाती भी है। लेकिन इनके मैंटीनेंस के लिए धनराशि नहीं मिलती। अस्पतालों के भवन काफी जर्जर हालत में पहुंच गए हैं।
2006 में खुले 11 अस्पताल
क्षेत्रीय आयुर्वेद एवं यूनानी अधिकारी डा. अशोक कुमार दीक्षित का कहना है कि जिले में 11 आयुर्वेद अस्पताल 2006 में स्थापित किए गए थे। इन अस्पतालों में वार्ड ब्वाय की तैनाती ही नहीं हुई। फार्मेसिस्ट एवं अन्य स्टाफ का अभाव है।
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दवाओं के लिए बजट सीमित
आयुर्वेद अस्पतालों के लिए दवाओं का बजट भी सीमित है। एलोपैथी से चलने वाले अस्पतालों में प्रतिमाह लाखों रुपये दवाओं पर खर्च होता है, लेकिन आयुर्वेद अस्पतालों को मात्र आठ हजार रुपये ही मिलते हैं। जबकि केंद्र से इन अस्पतालों को 1.39 लाख रुपये का बजट मिलता है।
यहां हैं आयुर्वेद अस्पताल
नगला चूरा, मक्खनपुर, बछगांव, जौंधरी, नत्थू बुर्ज, धीरपुरा, हाथवंत, पाढ़म, नगला भादों, पट्टी, भारौल, कुशियारी, भदान, डडियामई, नसीरपुर, आमौर, धातरी, सिरसागंज, करहरा, बसई मोहम्मदपुर, पैंढ़त, भनूपुरा, गढ़सान सहित तीन अन्य शामिल हैं।
यूनानी अस्पताल
टूंडला के मोहम्मदाबाद, शिकोहाबाद के रपड़ी।
अब नहीं रहे पुराने वैद्य
पुराने वैद्यों पर उपचार कराने के लिए दूर दराज से लोग आया करते थे। लेकिन अब पुराने वैद्य भी नहीं रहे। वैद्य बिहारी लाल, ब्रहमदेव शर्मा, गुलजारी लाल जैन सहित कई वैद्य काफी पुराने होने के कारण इनके यहां मरीजों की भीड़ लगती थी। अब ऐसा नजारा दिखाई नहीं देता।
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वैद्य धनवंतरी की जयंती आज धनतेरस के दिन मनाई जाएगी। उनकी चिकित्सा प्रणाली सुहागनगरी में दिन प्रतिदिन दम तोड़ती जा रही है। आयुर्वेद के जिला अस्पताल का संचालन फीरोजाबाद के महावीरनगर स्थित एक मकान में हो रहा है। यहां आने वाले मरीजों की संख्या 40 से 50 तक प्रतिदिन रहती है, लेकिन ग्रामीण अंचल में इनके संचालन की स्थिति और खराब है। जिन दवाओं की जरूरत है मरीजों नहीं मिलती हैं यही कारण है कि वह एलोपैथी से उपचार कराने को विवश हो जाते हैं। आयुर्वेद चिकित्सालयों की बात करें तो जिले में इनकी संख्या 26 है। यूनानी चिकित्सा प्रणाली से उपचार करने वालों की संख्या दो है। 24 अस्पतालों में चिकित्सकों की तैनाती भी है। लेकिन इनके मैंटीनेंस के लिए धनराशि नहीं मिलती। अस्पतालों के भवन काफी जर्जर हालत में पहुंच गए हैं।
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2006 में खुले 11 अस्पताल
क्षेत्रीय आयुर्वेद एवं यूनानी अधिकारी डा. अशोक कुमार दीक्षित का कहना है कि जिले में 11 आयुर्वेद अस्पताल 2006 में स्थापित किए गए थे। इन अस्पतालों में वार्ड ब्वाय की तैनाती ही नहीं हुई। फार्मेसिस्ट एवं अन्य स्टाफ का अभाव है।
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दवाओं के लिए बजट सीमित
आयुर्वेद अस्पतालों के लिए दवाओं का बजट भी सीमित है। एलोपैथी से चलने वाले अस्पतालों में प्रतिमाह लाखों रुपये दवाओं पर खर्च होता है, लेकिन आयुर्वेद अस्पतालों को मात्र आठ हजार रुपये ही मिलते हैं। जबकि केंद्र से इन अस्पतालों को 1.39 लाख रुपये का बजट मिलता है।
यहां हैं आयुर्वेद अस्पताल
नगला चूरा, मक्खनपुर, बछगांव, जौंधरी, नत्थू बुर्ज, धीरपुरा, हाथवंत, पाढ़म, नगला भादों, पट्टी, भारौल, कुशियारी, भदान, डडियामई, नसीरपुर, आमौर, धातरी, सिरसागंज, करहरा, बसई मोहम्मदपुर, पैंढ़त, भनूपुरा, गढ़सान सहित तीन अन्य शामिल हैं।
यूनानी अस्पताल
टूंडला के मोहम्मदाबाद, शिकोहाबाद के रपड़ी।
अब नहीं रहे पुराने वैद्य
पुराने वैद्यों पर उपचार कराने के लिए दूर दराज से लोग आया करते थे। लेकिन अब पुराने वैद्य भी नहीं रहे। वैद्य बिहारी लाल, ब्रहमदेव शर्मा, गुलजारी लाल जैन सहित कई वैद्य काफी पुराने होने के कारण इनके यहां मरीजों की भीड़ लगती थी। अब ऐसा नजारा दिखाई नहीं देता।