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लंबी दूरी की ट्रेनों के ठहराव को वर्षों से इंतजार
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ट्रेनों में उमड़ी भीड़।
- फोटो : demo pic
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फिरोजाबाद। सुहागनगरी कांच और रंग बिरंगी चूड़ियों के लिए विख्यात है। यहां हर रोज सैकड़ों व्यापारियों का आवागमन होता है, लेकिन रेलवे स्टेशन पर मानक के अनुरूप सुविधाएं तो दूर यहां लंबी दूरी की ट्रेनों का ठहराव तक नहीं है।
सुहागनगरी का रेलवे स्टेशन भले ही बी ग्रेड है, लेकिन यहां सुविधाएं आज तक सी ग्रेड जैसी भी नहीं मिलतीं। रेलवे स्टेशन पर हर रोज सैकड़ों यात्रियों के अलावा चूड़ी-कांच व्यापारी व उद्यमियों का आना-जाना लगा रहता है।
फिरोजाबाद के उद्यमी, व्यापारी भी बाहर से तकादा करने को कोलकाता, पटना, गुजरात सहित अन्य स्थानों पर जाते हैं, परंतु फिरोजाबाद किसी लंबी दूरी का स्टॉपेज न होने के कारण काफी परेशानी उठानी पड़ती है।
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व्यापारियों का कहना है कि कोलकाता, पटना जाने के लिए कानपुर व अलीगढ़ से ट्रेन पकड़नी पड़ती है। गुजरात के लिए आगरा तक दौड़ लगानी पड़ती है। उद्यमी, व्यापारी सालों से रेलवे स्टेशन पर लंबी दूरी की ट्रेनों के ठहराव को मांग कर रहे हैं।
रेलवे स्टेशन पर बने रिटायरिंग रूम में हर समय ताला पड़ा रहता है। डिस्पले बोर्ड न होने के कारण यात्रियों की ट्रेनें छूट जाती हैं। ओवरब्रिज से कानपुर की ओर जाने वाले दोनों साइड के प्लटेफार्म तक टिनशेड तक नहीं है। यात्रियों को खुले में जमीन पर बैठना पड़ता है।
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सुहागनगरी का रेलवे स्टेशन भले ही बी ग्रेड है, लेकिन यहां सुविधाएं आज तक सी ग्रेड जैसी भी नहीं मिलतीं। रेलवे स्टेशन पर हर रोज सैकड़ों यात्रियों के अलावा चूड़ी-कांच व्यापारी व उद्यमियों का आना-जाना लगा रहता है।
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फिरोजाबाद के उद्यमी, व्यापारी भी बाहर से तकादा करने को कोलकाता, पटना, गुजरात सहित अन्य स्थानों पर जाते हैं, परंतु फिरोजाबाद किसी लंबी दूरी का स्टॉपेज न होने के कारण काफी परेशानी उठानी पड़ती है।
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व्यापारियों का कहना है कि कोलकाता, पटना जाने के लिए कानपुर व अलीगढ़ से ट्रेन पकड़नी पड़ती है। गुजरात के लिए आगरा तक दौड़ लगानी पड़ती है। उद्यमी, व्यापारी सालों से रेलवे स्टेशन पर लंबी दूरी की ट्रेनों के ठहराव को मांग कर रहे हैं।
रेलवे स्टेशन पर बने रिटायरिंग रूम में हर समय ताला पड़ा रहता है। डिस्पले बोर्ड न होने के कारण यात्रियों की ट्रेनें छूट जाती हैं। ओवरब्रिज से कानपुर की ओर जाने वाले दोनों साइड के प्लटेफार्म तक टिनशेड तक नहीं है। यात्रियों को खुले में जमीन पर बैठना पड़ता है।