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टीटीएसपी में 4.11 करोड़ का घपला उजागर
ब्यूरो,अमर उजाला फीरोजाबाद
Updated Thu, 16 Jul 2015 11:05 PM IST
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जलनिगम के टीटीएसपी स्थापना में 4.11 करोड़ का घपला उजागर हो गया। सीडीओ सुजीत कुमार की अध्यक्षता वाली जांच कमेटी ने गुरुवार को रिपोर्ट फाइनल की। इसमें दोषी मिले 20 ठेकेदारों के खिलाफ अभियोग दर्ज कराने के साथ उनको काली सूची में डालने की संस्तुति डीएम ने की है। वहीं तीन एक्सईएन, चार एई एवं कई जेई के खिलाफ विभागीय कार्रवाई को शासन को संस्तुति एवं अभियोग दर्ज कराने की अनुमति मांगी है।
जिले में पानी की किल्लत को दूर करने के लिए शासन ने टीटीएसपी की स्थापना को करोड़ों का बजट आवंटित कर दिया था। जलनिगम के अफसरों एवं ठेकेदारों के द्वारा इस धनराशि को मनमाने ढंग से खर्च किया था। तत्कालीन सीडीओ हीरालाल को टीटीएसपी की जांच कराने पर ही जब नहीं मिली तो उन्होंने इसकी जांच शुरू कराई थी। पर डीएम विजय किरन आनंद को घपले की आशंका होने पर ही इसकी दोबारा जांच सीडीओ सुजीत कुमार को सौंप दी थी। जांच कमेटी में वरिष्ठ कोषाधिकारी पुष्पराज के साथ ही एक अन्य अधिकारी को शामिल किया था। काफी ही दिनों से चल रही पड़ताल के दौरान डीएम ने ठेकेदारों को कई मौका दिए। गुरुवार को जांच पूरी करने के साथ इसमें करीब 4.11 करोड़ का घपला मिला है। सीडीओ सुजीत कुमार ने बताया कि टीटीएसपी की स्थापना का काम टेंडर के माध्यम से नहीं कराया। 41 टीटीएसपी कई राउंड में हुई जांच के बाद नहीं मिली। इसमें 2.61 करोड़ का घपला है। सीडीओ ने बताया कि 9.50 करोड़ रुपया मरम्मत कार्य के लिए मिले थे। इसमें 1.50 करोड़ की गड़बड़ी मिली है।
20 ठेकेदार होंगे ब्लैक लिस्टेड, दर्ज होगा अभियोग
ठेकेदार शैलेष कुमार की 31 टीटीएसपी, कृष्णा कंट्रक्शन व जेएलएस कांट्रेक्टर की दो-दो, पंकज शर्मा, बनवारीलाल, रामसेवक की एक-एक तथा अनुपम कृष्णा कंट्रक्शन के तीन टीटीएसपी जांच के दौरान नहीं मिल सकीं। इसके ही साथ मरम्मत के लिए मिले 1.50 करोड़ के घपले में मुख्य रूप से सुबोध यादव, प्रिया कंट्रक्शन, आदेश कुमार, प्रेम सिंह, राजाराम, मनोज कुमार, कृष्णकांत उपाध्याय, अंशु ट्रेडर्स, प्रियां कांट्रेक्टर, अबधेश यादव, गुलशन ट्रेडर्स, आरके एंड केके कांट्रेक्टर, शिव एग्रो शामिल हैं। सीडीओ ने कहा कि इन ठेकेदारों के खिलाफ अभियोग दर्ज कराने के साथ ही काली सूची में डालने के आदेश डीएम ने दिए हैं।
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इन अफसरों पर शिकंजा
सीडीओ के अनुसार एक्शईएन एसपी शर्मा, एसपी अग्रवाल, वीके निम तथा एई एसपी शर्मा, छुंटू प्रसाद, भुवनेश जैन, आशाराम के अलावा जेई आरसी अग्रवाल, नितिन वर्मा, जेपी शर्मा, चंद्रशेखर, सुरेंद्र पाल, ओमवीर सिंह के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने को डीएम की ओर से प्रमुख सचिव को पत्र भेजने के साथ ही अभियोग दर्ज कराने की अनुमति मांगी है।
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जिले में पानी की किल्लत को दूर करने के लिए शासन ने टीटीएसपी की स्थापना को करोड़ों का बजट आवंटित कर दिया था। जलनिगम के अफसरों एवं ठेकेदारों के द्वारा इस धनराशि को मनमाने ढंग से खर्च किया था। तत्कालीन सीडीओ हीरालाल को टीटीएसपी की जांच कराने पर ही जब नहीं मिली तो उन्होंने इसकी जांच शुरू कराई थी। पर डीएम विजय किरन आनंद को घपले की आशंका होने पर ही इसकी दोबारा जांच सीडीओ सुजीत कुमार को सौंप दी थी। जांच कमेटी में वरिष्ठ कोषाधिकारी पुष्पराज के साथ ही एक अन्य अधिकारी को शामिल किया था। काफी ही दिनों से चल रही पड़ताल के दौरान डीएम ने ठेकेदारों को कई मौका दिए। गुरुवार को जांच पूरी करने के साथ इसमें करीब 4.11 करोड़ का घपला मिला है। सीडीओ सुजीत कुमार ने बताया कि टीटीएसपी की स्थापना का काम टेंडर के माध्यम से नहीं कराया। 41 टीटीएसपी कई राउंड में हुई जांच के बाद नहीं मिली। इसमें 2.61 करोड़ का घपला है। सीडीओ ने बताया कि 9.50 करोड़ रुपया मरम्मत कार्य के लिए मिले थे। इसमें 1.50 करोड़ की गड़बड़ी मिली है।
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20 ठेकेदार होंगे ब्लैक लिस्टेड, दर्ज होगा अभियोग
ठेकेदार शैलेष कुमार की 31 टीटीएसपी, कृष्णा कंट्रक्शन व जेएलएस कांट्रेक्टर की दो-दो, पंकज शर्मा, बनवारीलाल, रामसेवक की एक-एक तथा अनुपम कृष्णा कंट्रक्शन के तीन टीटीएसपी जांच के दौरान नहीं मिल सकीं। इसके ही साथ मरम्मत के लिए मिले 1.50 करोड़ के घपले में मुख्य रूप से सुबोध यादव, प्रिया कंट्रक्शन, आदेश कुमार, प्रेम सिंह, राजाराम, मनोज कुमार, कृष्णकांत उपाध्याय, अंशु ट्रेडर्स, प्रियां कांट्रेक्टर, अबधेश यादव, गुलशन ट्रेडर्स, आरके एंड केके कांट्रेक्टर, शिव एग्रो शामिल हैं। सीडीओ ने कहा कि इन ठेकेदारों के खिलाफ अभियोग दर्ज कराने के साथ ही काली सूची में डालने के आदेश डीएम ने दिए हैं।
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इन अफसरों पर शिकंजा
सीडीओ के अनुसार एक्शईएन एसपी शर्मा, एसपी अग्रवाल, वीके निम तथा एई एसपी शर्मा, छुंटू प्रसाद, भुवनेश जैन, आशाराम के अलावा जेई आरसी अग्रवाल, नितिन वर्मा, जेपी शर्मा, चंद्रशेखर, सुरेंद्र पाल, ओमवीर सिंह के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने को डीएम की ओर से प्रमुख सचिव को पत्र भेजने के साथ ही अभियोग दर्ज कराने की अनुमति मांगी है।