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डायबिटीज-बीपी से पीड़ित हैं 22 प्रतिशत पुलिसकर्मी
Amar Ujala
Updated Thu, 08 Sep 2016 12:26 AM IST
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प्रतीकात्मक चित्र
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डायबिटीज-बीपी से पीड़ित हैं 22 प्रतिशत पुलिसकर्मी
न रहने की व्यवस्था न भोजन का समय
ड्यूटी का बोझ और अधिकारियों की फटकार के साथ कार्रवाई से ऐसा लग रहा है कि जिले की पुलिस बीमार है। भले ही इसकी पुष्टि पुलिस अधिकारी नहीं करते नजर आए, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट पर गौर किया जाए तो 22 प्रतिशत पुलिसकर्मी डिप्रेशन के चलते बीमारी के शिकार हैं। इसके बाद भी इनको न तो समय से अवकाश मिलता है और न ही रहने और खाने पीने की कोई खास व्यवस्था है। इनके कंधाें पर सुरक्षा का जिम्मा भी।
पुलिस लाइन में आयोजित होने वाले स्वास्थ्य शिविर में अपना चेकअप कराने वाले 22 फीसदी पुलिसकर्मी बीमारी से पीड़ित पाए जाते हैं। इसमें 10 फीसदी पुलिसकर्मी ब्लड प्रेशर (बीपी) के साथ 10 प्रतिशत पुलिसकर्मियों में डायबिटीज की शिकायत मिली है। इसके साथ ही दो प्रतिशत पुलिसकर्मियों में अन्य बीमारियां है। जिनका प्रमुख कारण पुलिसकर्मियों द्वारा डिप्रेशन में ड्यूटी करना पाया गया है। इसके बाद भी इन पुलिसकर्मियों को अवकाश के लिए या तो अधिकारियों के चक्कर काटने पड़ते है, या फिर मेडिकल लीव पर जाने के लिए विवश होना पड़ता है।
मेडिकल लेने पर कटता है वेतन
पुलिसकर्मियों की माने तो उनको मेडिकल लीव तो मिलती है। लेकिन उसको लेने से पुलिसकर्मी बचते हैं। क्योंकि एक माह का मेडिकल लेने पर पांच दिन का वेतन कट जाता है। जो मार्च माह के अंत में मिलती है। इसके साथ ही मेडिकल लेने से पूर्व किट भी पुलिस लाइन में जमा करनी होती है। लंबी प्रक्रिया होने के कारण मेडिकल लीव भी लेने से पुलिसकर्मी बचते है।
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लाइन के पुलिसकर्मियों को नहीं मिलता अवकाश
दस दिन में एक दिन के अवकाश की जो घोषण शासन ने की है, उसमें पुलिस लाइन के पुलिसकर्मियाें और अधिकारियों को शामिल नहीं किया गया है। यह आदेश केवल थाने और चौकियाें तक ही सीमित है।
कर्णपाल सिंह प्रतिसार निरीक्षक फीरोजाबाद
डिप्रेशन के शिकार हैं पुलिसकर्मी
कैंप और ओपीडी में आने वाले पुलिसकर्मी डिप्रेशन के शिकार हैं। इसलिए उनमें डायबिटीज और ब्लड प्रेशर की शिकायत के साथ अन्य बीमारियां पाई जाती है। बीमारी के हिसाब से इन पुलिसकर्मियों को जो सुविधा मिलनी चाहिए, वह नहीं मिल पा रही।
डा. अभिषेक कुमार, पुलिस लाइन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र
जिन पुलिसकर्मियों का स्वास्थ्य ठीक नहीं होता, उनको अवकाश दिया जाता है। दस दिन में एक दिन के अवकाश का कोई आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। आदेश आने पर पुलिसकर्मियों को एक दिन का अवकाश दिया जाएगा।
अमर सिंह, एसपी देहात
काम का बोझ इतना रहता है कि चिकित्सक से परामर्श लेने के लिए पुलिसकर्मियों के पास समय नहीं होता। खान पान और रहने की भी ठीक व्यवस्था न होने के कारण अवकाश भी नहीं मिलता। व्यायाम से बचने का भी प्रयास करते हैं। परेड में शामिल नहीं होते। इसकी कारण पुलिसकर्मी बीमारी के शिकार हैं।
जगदीश सिंह, सेवानिवृत्त सीओ
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न रहने की व्यवस्था न भोजन का समय
ड्यूटी का बोझ और अधिकारियों की फटकार के साथ कार्रवाई से ऐसा लग रहा है कि जिले की पुलिस बीमार है। भले ही इसकी पुष्टि पुलिस अधिकारी नहीं करते नजर आए, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट पर गौर किया जाए तो 22 प्रतिशत पुलिसकर्मी डिप्रेशन के चलते बीमारी के शिकार हैं। इसके बाद भी इनको न तो समय से अवकाश मिलता है और न ही रहने और खाने पीने की कोई खास व्यवस्था है। इनके कंधाें पर सुरक्षा का जिम्मा भी।
पुलिस लाइन में आयोजित होने वाले स्वास्थ्य शिविर में अपना चेकअप कराने वाले 22 फीसदी पुलिसकर्मी बीमारी से पीड़ित पाए जाते हैं। इसमें 10 फीसदी पुलिसकर्मी ब्लड प्रेशर (बीपी) के साथ 10 प्रतिशत पुलिसकर्मियों में डायबिटीज की शिकायत मिली है। इसके साथ ही दो प्रतिशत पुलिसकर्मियों में अन्य बीमारियां है। जिनका प्रमुख कारण पुलिसकर्मियों द्वारा डिप्रेशन में ड्यूटी करना पाया गया है। इसके बाद भी इन पुलिसकर्मियों को अवकाश के लिए या तो अधिकारियों के चक्कर काटने पड़ते है, या फिर मेडिकल लीव पर जाने के लिए विवश होना पड़ता है।
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मेडिकल लेने पर कटता है वेतन
पुलिसकर्मियों की माने तो उनको मेडिकल लीव तो मिलती है। लेकिन उसको लेने से पुलिसकर्मी बचते हैं। क्योंकि एक माह का मेडिकल लेने पर पांच दिन का वेतन कट जाता है। जो मार्च माह के अंत में मिलती है। इसके साथ ही मेडिकल लेने से पूर्व किट भी पुलिस लाइन में जमा करनी होती है। लंबी प्रक्रिया होने के कारण मेडिकल लीव भी लेने से पुलिसकर्मी बचते है।
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लाइन के पुलिसकर्मियों को नहीं मिलता अवकाश
दस दिन में एक दिन के अवकाश की जो घोषण शासन ने की है, उसमें पुलिस लाइन के पुलिसकर्मियाें और अधिकारियों को शामिल नहीं किया गया है। यह आदेश केवल थाने और चौकियाें तक ही सीमित है।
कर्णपाल सिंह प्रतिसार निरीक्षक फीरोजाबाद
डिप्रेशन के शिकार हैं पुलिसकर्मी
कैंप और ओपीडी में आने वाले पुलिसकर्मी डिप्रेशन के शिकार हैं। इसलिए उनमें डायबिटीज और ब्लड प्रेशर की शिकायत के साथ अन्य बीमारियां पाई जाती है। बीमारी के हिसाब से इन पुलिसकर्मियों को जो सुविधा मिलनी चाहिए, वह नहीं मिल पा रही।
डा. अभिषेक कुमार, पुलिस लाइन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र
जिन पुलिसकर्मियों का स्वास्थ्य ठीक नहीं होता, उनको अवकाश दिया जाता है। दस दिन में एक दिन के अवकाश का कोई आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। आदेश आने पर पुलिसकर्मियों को एक दिन का अवकाश दिया जाएगा।
अमर सिंह, एसपी देहात
काम का बोझ इतना रहता है कि चिकित्सक से परामर्श लेने के लिए पुलिसकर्मियों के पास समय नहीं होता। खान पान और रहने की भी ठीक व्यवस्था न होने के कारण अवकाश भी नहीं मिलता। व्यायाम से बचने का भी प्रयास करते हैं। परेड में शामिल नहीं होते। इसकी कारण पुलिसकर्मी बीमारी के शिकार हैं।
जगदीश सिंह, सेवानिवृत्त सीओ