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151 कोल्डस्टोरों में डंप हुआ दो लाख टन आलू
अमर उजाला ब्यूूराे, फीराेजाबाद
Updated Mon, 12 Dec 2016 12:04 AM IST
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आलू
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आलू उत्पादन में अग्रणी अपने जिले का किसान बर्बादी के कगार पर पहुंच गया है। एक माह पहले 700 से 800 रुपये में बिकने वाले एक पैकेट आलू की कीमत आज 100 सौ रुपये में भी नहीं रह गई है। कोल्ड स्टोरेज और उसकी बिक्री का भी खर्चा न निकलने से किसान आलू को निकाल नहीं रहा है। इससे जिले के करीब 151 कोल्ड स्टोरेज में किसानों का दो लाख टन से अधिक आलू डंप पड़ा है। कोल्ड स्टोरेज आनर्स एसोसिएशन ने अल्टीमेटम दे दिया है। किसानों ने यह तय तारीख तक अपना आलू नहीं निकाला को कोल्डस्टोरेज संचालकों के सामने आलू को कोल्ड स्टोरेज से बाहर फेंकने या औने पौने दामों में बेचने की स्थिति बन गई है।
इस सीजन में जिले में करीब 72 हजार हेक्टेयर में आलू की फसल का उत्पादन किया गया है। कोल्ड स्टोरेजों की संख्या 151 है। दिल्ली, हैदराबाद, मुंबई, नासिक, सूरत, ग्वालियर, बनारस की मंडियों के आलू का व्यापार करने वाले बड़े व्यापारी की नजर यहां के आलू पर रहती है। नोट बंदी के बाद इन लोगों ने जिले से मुंह मोड़ लिया है। बाहरी व्यापारी जो आलू ले गए थे उसका भुगतान तो अटका ही आर्डर भी कैंसल करा दिया। इससे एक माह पूर्व तक आलू का जो पैकिट 700 से 800 रुपये में बिक रहा था वह 80 और सौ रुपया पर आ गया है। रही-सही कसर नए आलू के बाजार में आने से पूरी हो गई। स्थानीय मंडियों में भी पुराने आलू की डिमांड नहीं रह गई। करीब दो लाख टन आलू कोल्ड स्टोरेज से बाहर ही फेंकने की स्थिति बन गई है। कोल्ड संचालकों का तर्क है कि अब सिर्फ उन किसानों का आलू बचा है जो ऋण ले गए, या फिर उनके पास ड्यूटी का भुगतान करने को पैसा नहीं है। कोल्ड को चालू रखने की तिथि 30 अक्तूबर तक थी। शासन के आदेश पर 30 नवंबर तक बढ़ा दी गई। अब कोल्ड स्टोरेज में आलू रख पाना मुश्किल होगा। जिले में दो लाख किसान सीधे आलू उत्पादन कार्य से जुड़े हैं।
कोल्ड संचालक बोले......
-बाहर से व्यापारी आना बंद हो गए। जो पहले ले गए थे वे चेक से भुगतान कर रहे हैं। किसान चेक लेने को तैयार ही नहीं है। लिहाजा आलू की निकासी करना हम सभी की तो मजबूरी बन गई है।
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अजय सिंह, कोल्ड संचालक सिरसागंज
-प्रदेश सरकार ने 30 अक्तूबर तक आलू निकासी की तिथि तय की थी। शासन के आदेश पर 30 नवंबर तक सहयोग किया। अब कोल्ड चलाना मुश्किल है। आलू सिर्फ उनका ही शेष बचा जो ऋण ले गए या फिर ड्यूटी का पैसा देने तक को नहीं है। आलू की बिक्री करना मजबूरी है।
गोपाल सिंह, अध्यक्ष कोल्ड स्टोरेज आनर्स एसोसिएशन
आलू उत्पादक किसान बोले......
-चार सौ पैकिट आलू कोल्ड में रखा है। बाहर ले जाएं तो रेट इतनी कम है कि भाड़ा तक नहीं मिलेगा। यहां पर कोई खरीदने वाला नहीं है। आलू फेंकने के सिवाय कोई रास्ता नहीं बचा है।
किसान सर्वेश कुमार, निवासी सारख
-हमारा 700 पैकिट आलू कोल्ड में रखा है आलू की नई फसल बमुश्किल बुबाई कर सके। आधे पैकिट पहले बिक्री कर लेने के कारण राहत मिल गई है। आलू कोल्ड से बाहर फेंकने के शिवाय कोई रास्ता नहीं है।
किसान संजय सिंह, जगमुदी
-कोल्ड संचालकों के लिए आलू रखने की समय सीमा पूरी हो गई। कोल्ड संचालकों का अल्टीमेटम के बाबजूद हमारा प्रयास होगा दोनों (किसान व कोल्ड संचालकों)की सहमति से आलू बिके। विवाद कम हो ऐसा प्रयास करेंगे।
बलजीत सिंह
जिला उद्यान अधिकारी फीरोजाबाद।
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इस सीजन में जिले में करीब 72 हजार हेक्टेयर में आलू की फसल का उत्पादन किया गया है। कोल्ड स्टोरेजों की संख्या 151 है। दिल्ली, हैदराबाद, मुंबई, नासिक, सूरत, ग्वालियर, बनारस की मंडियों के आलू का व्यापार करने वाले बड़े व्यापारी की नजर यहां के आलू पर रहती है। नोट बंदी के बाद इन लोगों ने जिले से मुंह मोड़ लिया है। बाहरी व्यापारी जो आलू ले गए थे उसका भुगतान तो अटका ही आर्डर भी कैंसल करा दिया। इससे एक माह पूर्व तक आलू का जो पैकिट 700 से 800 रुपये में बिक रहा था वह 80 और सौ रुपया पर आ गया है। रही-सही कसर नए आलू के बाजार में आने से पूरी हो गई। स्थानीय मंडियों में भी पुराने आलू की डिमांड नहीं रह गई। करीब दो लाख टन आलू कोल्ड स्टोरेज से बाहर ही फेंकने की स्थिति बन गई है। कोल्ड संचालकों का तर्क है कि अब सिर्फ उन किसानों का आलू बचा है जो ऋण ले गए, या फिर उनके पास ड्यूटी का भुगतान करने को पैसा नहीं है। कोल्ड को चालू रखने की तिथि 30 अक्तूबर तक थी। शासन के आदेश पर 30 नवंबर तक बढ़ा दी गई। अब कोल्ड स्टोरेज में आलू रख पाना मुश्किल होगा। जिले में दो लाख किसान सीधे आलू उत्पादन कार्य से जुड़े हैं।
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कोल्ड संचालक बोले......
-बाहर से व्यापारी आना बंद हो गए। जो पहले ले गए थे वे चेक से भुगतान कर रहे हैं। किसान चेक लेने को तैयार ही नहीं है। लिहाजा आलू की निकासी करना हम सभी की तो मजबूरी बन गई है।
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अजय सिंह, कोल्ड संचालक सिरसागंज
-प्रदेश सरकार ने 30 अक्तूबर तक आलू निकासी की तिथि तय की थी। शासन के आदेश पर 30 नवंबर तक सहयोग किया। अब कोल्ड चलाना मुश्किल है। आलू सिर्फ उनका ही शेष बचा जो ऋण ले गए या फिर ड्यूटी का पैसा देने तक को नहीं है। आलू की बिक्री करना मजबूरी है।
गोपाल सिंह, अध्यक्ष कोल्ड स्टोरेज आनर्स एसोसिएशन
आलू उत्पादक किसान बोले......
-चार सौ पैकिट आलू कोल्ड में रखा है। बाहर ले जाएं तो रेट इतनी कम है कि भाड़ा तक नहीं मिलेगा। यहां पर कोई खरीदने वाला नहीं है। आलू फेंकने के सिवाय कोई रास्ता नहीं बचा है।
किसान सर्वेश कुमार, निवासी सारख
-हमारा 700 पैकिट आलू कोल्ड में रखा है आलू की नई फसल बमुश्किल बुबाई कर सके। आधे पैकिट पहले बिक्री कर लेने के कारण राहत मिल गई है। आलू कोल्ड से बाहर फेंकने के शिवाय कोई रास्ता नहीं है।
किसान संजय सिंह, जगमुदी
-कोल्ड संचालकों के लिए आलू रखने की समय सीमा पूरी हो गई। कोल्ड संचालकों का अल्टीमेटम के बाबजूद हमारा प्रयास होगा दोनों (किसान व कोल्ड संचालकों)की सहमति से आलू बिके। विवाद कम हो ऐसा प्रयास करेंगे।
बलजीत सिंह
जिला उद्यान अधिकारी फीरोजाबाद।