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गांव की सड़क, पटरियों पर फेंके जा रहे आलू
ब्यूरो अमर उजाला, फतेहपुर
Updated Mon, 05 Dec 2016 11:36 PM IST
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दुकान में रखा नया आलू।
- फोटो : अमर उजाला
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कोल्ड स्टोरेज से आलू फेंकने का सिलसिला तेज हो गया है। सड़क के किनारे पड़े आलू को भर-भरकर लोग अपनी गृहस्थी चला रहे हैं। स्टोर के आलू की इस दुर्दशा ने अगेती फसल करने वाले किसानों की हालत खराब कर दी है। सब्जी मंडी में नया आलू 600-700 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है। इससे किसानों की परेशानी बढ़ गई है। उनको स्टोर में रखे आलू के साथ अगेती आलू में भी घाटा लग रहा है। अपनी फसल का सही दाम पाने के लिए किसान शहर की सब्जी मंडी व इलाहाबाद, बांदा की सब्जी मंडियों में मोबाइल से भाव पता कर रहे हैं।
कोल्ड स्टोर प्रबंधकों ने बचे हुए आलू को बाहर निकालने का काम शुरू कर दिया है। स्टोर की मरम्मत का काम शुरू कराने के लिए ट्रैक्टरों से आलू बाहर कराया जा रहा है। ट्रैक्टर चालक स्टोर के आसपास ही सड़क की पटरियों पर आलू फेंक रहे हैं। वहीं ग्रामीण फ्री आलू लेने के लिए सुबह से ही स्टोर के आसपास जमा हो जाते हैं।
अगेती आलू की खेती करने वाले अजईपुर गांव के किसान संजय कुमार ने बताया 800 रुपये प्रति बोरी (50 किलो) खरीद कर बुआई की। एक बीघा में नौ बोरी बीज, एक बोरी डीएपी, 25 किलो सुपर फास्फेट, जिंक और डेढ़ बोरी यूरिया खाद डाली गई है। फसल तैयार करने में तीन बार सिंचाई की है। इसमें करीब 16 हजार रुपये खर्च हो गए हैं। आलू खुदाई में दो हजार रुपये मजदूरी लगी है। अगेती आलू एक बीघा में 25 क्विंटल निकली है। इससे कुल खर्च भी नहीं निकल पा रहा है।
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कोल्ड स्टोर प्रबंधकों ने बचे हुए आलू को बाहर निकालने का काम शुरू कर दिया है। स्टोर की मरम्मत का काम शुरू कराने के लिए ट्रैक्टरों से आलू बाहर कराया जा रहा है। ट्रैक्टर चालक स्टोर के आसपास ही सड़क की पटरियों पर आलू फेंक रहे हैं। वहीं ग्रामीण फ्री आलू लेने के लिए सुबह से ही स्टोर के आसपास जमा हो जाते हैं।
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अगेती आलू की खेती करने वाले अजईपुर गांव के किसान संजय कुमार ने बताया 800 रुपये प्रति बोरी (50 किलो) खरीद कर बुआई की। एक बीघा में नौ बोरी बीज, एक बोरी डीएपी, 25 किलो सुपर फास्फेट, जिंक और डेढ़ बोरी यूरिया खाद डाली गई है। फसल तैयार करने में तीन बार सिंचाई की है। इसमें करीब 16 हजार रुपये खर्च हो गए हैं। आलू खुदाई में दो हजार रुपये मजदूरी लगी है। अगेती आलू एक बीघा में 25 क्विंटल निकली है। इससे कुल खर्च भी नहीं निकल पा रहा है।
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