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कोषागार घोटाला : पेंशनरों को लालच व भ्रम में रखने से हुआ करोड़ों का घोटाला
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चित्रकूट। 43.13 करोड़ के कोषागार घोटाले में दो माह में यह तो साफ हो गया है कि कोषागार कर्मियों ने पेंशनरों को लालच व भ्रम में रखकर करोड़ों का घोटाला किया है। करोड़ों रुपये में पेंशनरों को तो 20 प्रतिशत ही हिस्सा मिला जबकि 80 प्रतिशत की मोटी मलाई विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियोंं ने बिचौलियों के साथ मिलकर खाई है। अब ईडी की जांच शुरू होने से सभी की करतूत और सामने आएगी।काेषागार विभाग ने ईडी को भेजने के लिए फाइलों का संकलन शुरू कर दिया है। संदेह जताया गया कि विभागीय कर्मचारियों ने इस काले धन को सफेद करने के लिए अन्य परिजनों के नाम संपत्ति खरीदी है।
पुलिस एसआईटी की छानबीन के दौरान यह तथ्य सामने आए थे कि पेंशनरों को 20 फीसदी ही रकम मिली है। शेष पूरा पैसा कोषागार कर्मियों और दलालों ने मिलकर खाया है। इसी रकम से इन लोगों ने जिले ही नहीं बल्कि अन्य जिलों में भी स्थाई व अस्थाई संपत्तियां बनाई है। कुछ लोगों ने परिजन, नातेदारों और नजदीकियों के नाम जमीनें खरीदी है जबकि कुछ लोगों ने गबन की धनराशि को रियल स्टेट में भी लगाया है।
कई जिम्मेदारों ने गबन के दौरान ही अपने आलीशान भवनों का भी निर्माण कराया है। छानबीन में अब ईडी की इंट्री होने के बाद अकूत संपत्तियां अर्जित करने वालों की मुश्किलें बढ़ सकती है। ईडी की टीम ने सभी रिकार्ड मांगे हैं। इसमें सबसे ज्यादा इस धनराशि से खरीदी गई संपत्तियों का सत्यापन होगा। चित्रकूट बांदा, सतना, फतेहपुर, प्रयागराज, कानपुर, कौशांबी व रीवा से भी इसके तार जुड़े बताए गए हैं।
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ईडी मुख्य रूप से मनी लॉन्ड्रिंग की जांच भी करेगी। फाइलों का संकलन हो रहा है। फाइलें तो पूरी विभाग के पास हैं लेकिन इसमें एक बार फिर एसआईटी व विभागीय अधिकारी जांच कर अपने रिकार्ड पुष्टि कर रहे हैं। जल्द ही इन्हें लखनऊ ईडी कार्यालय भेजा जाएगा। उधर बृहस्पतिवार को एसआईटी ने अपनी जांच जारी रखी। सभी पेंशनर व नामजद बिचौलियों समेत कोषागार विभाग के नामजद आरोपियों से संपत्ति का ब्योरा मांगा था लेकिन किसी ने अभी तक नहीं दिया है। विवेचना के दौरान एटीओ संदीप की मृत्यु हो चुकी है। विकास व अशोक जेल में हैं जबकि अवधेश अग्रिम जमानत पर हैं।
बहन समेत दो अन्य पेंशनरों से कमाए एक करोड़ से अधिक
मऊ के लालता रोड निवासी पेंशनर कमला देवी का भाई ओमप्रकाश बिचौलिए के रूप में कोषागार विभाग के कुछ अधिकारी कर्मचारियों के संपर्क में आया। बहन के साथ पेंशन के काम से कार्यालय आते जाते उसकी पहचान होने पर उसके सामने जब रुपये कमाने का प्रस्ताव रखा गया तो वह इन्कार नहीं कर सका। बृहस्पतिवार को कचहरी में जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान उसके परिजनों ने बताया कि मोटा हिस्सा तो कोषागार विभाग वाले लेते थे। जिला शासकीय अधिवक्ता श्यामसुंदर मिश्रा ने बताया कि जेल में बंद बिचौलिया ओमप्रकाश की जिला जज कोर्ट में जमानत याचिका पर बहस हुई। जिला जज शेषमणि ने याचिका निरस्त कर दी है।
बिचौलिया ओमप्रकाश ने सबसे पहले अपनी बहन पेंशनर कमला देवी (26 लाख 12 हजार 791 रुपये ) के खाते में अवैध रूप से आई धनराशि को निकालने लगा। जब एक साल तक वह नहीं पकड़ा गया तो विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों की शह पर उसका हौंसला बढ़ा और क्षेत्र के ही दो और पेंशनर जवाहर लाल (46 लाख 60 हजार 204 रुपये )और दुर्गाप्रसाद (45 लाख एक हजार 874 रुपये) से भी नजदीकी बढ़ाई। उन्हें भी लालच देकर उनके खाते में आने वाली धनराशि निकालकर कुछ हिस्सा इन्हें देने लगा। बताया गया है कि ओमप्रकाश अपनी बहन समेत तीनों पेंशनर से बच्चों के नाम चेक भी लेकर रुपये निकालता था। इन तीनों से एक करोड़ 15 लाख से अधिक का भुगतान हुआ है।
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पुलिस एसआईटी की छानबीन के दौरान यह तथ्य सामने आए थे कि पेंशनरों को 20 फीसदी ही रकम मिली है। शेष पूरा पैसा कोषागार कर्मियों और दलालों ने मिलकर खाया है। इसी रकम से इन लोगों ने जिले ही नहीं बल्कि अन्य जिलों में भी स्थाई व अस्थाई संपत्तियां बनाई है। कुछ लोगों ने परिजन, नातेदारों और नजदीकियों के नाम जमीनें खरीदी है जबकि कुछ लोगों ने गबन की धनराशि को रियल स्टेट में भी लगाया है।
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कई जिम्मेदारों ने गबन के दौरान ही अपने आलीशान भवनों का भी निर्माण कराया है। छानबीन में अब ईडी की इंट्री होने के बाद अकूत संपत्तियां अर्जित करने वालों की मुश्किलें बढ़ सकती है। ईडी की टीम ने सभी रिकार्ड मांगे हैं। इसमें सबसे ज्यादा इस धनराशि से खरीदी गई संपत्तियों का सत्यापन होगा। चित्रकूट बांदा, सतना, फतेहपुर, प्रयागराज, कानपुर, कौशांबी व रीवा से भी इसके तार जुड़े बताए गए हैं।
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ईडी मुख्य रूप से मनी लॉन्ड्रिंग की जांच भी करेगी। फाइलों का संकलन हो रहा है। फाइलें तो पूरी विभाग के पास हैं लेकिन इसमें एक बार फिर एसआईटी व विभागीय अधिकारी जांच कर अपने रिकार्ड पुष्टि कर रहे हैं। जल्द ही इन्हें लखनऊ ईडी कार्यालय भेजा जाएगा। उधर बृहस्पतिवार को एसआईटी ने अपनी जांच जारी रखी। सभी पेंशनर व नामजद बिचौलियों समेत कोषागार विभाग के नामजद आरोपियों से संपत्ति का ब्योरा मांगा था लेकिन किसी ने अभी तक नहीं दिया है। विवेचना के दौरान एटीओ संदीप की मृत्यु हो चुकी है। विकास व अशोक जेल में हैं जबकि अवधेश अग्रिम जमानत पर हैं।
बहन समेत दो अन्य पेंशनरों से कमाए एक करोड़ से अधिक
मऊ के लालता रोड निवासी पेंशनर कमला देवी का भाई ओमप्रकाश बिचौलिए के रूप में कोषागार विभाग के कुछ अधिकारी कर्मचारियों के संपर्क में आया। बहन के साथ पेंशन के काम से कार्यालय आते जाते उसकी पहचान होने पर उसके सामने जब रुपये कमाने का प्रस्ताव रखा गया तो वह इन्कार नहीं कर सका। बृहस्पतिवार को कचहरी में जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान उसके परिजनों ने बताया कि मोटा हिस्सा तो कोषागार विभाग वाले लेते थे। जिला शासकीय अधिवक्ता श्यामसुंदर मिश्रा ने बताया कि जेल में बंद बिचौलिया ओमप्रकाश की जिला जज कोर्ट में जमानत याचिका पर बहस हुई। जिला जज शेषमणि ने याचिका निरस्त कर दी है।
बिचौलिया ओमप्रकाश ने सबसे पहले अपनी बहन पेंशनर कमला देवी (26 लाख 12 हजार 791 रुपये ) के खाते में अवैध रूप से आई धनराशि को निकालने लगा। जब एक साल तक वह नहीं पकड़ा गया तो विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों की शह पर उसका हौंसला बढ़ा और क्षेत्र के ही दो और पेंशनर जवाहर लाल (46 लाख 60 हजार 204 रुपये )और दुर्गाप्रसाद (45 लाख एक हजार 874 रुपये) से भी नजदीकी बढ़ाई। उन्हें भी लालच देकर उनके खाते में आने वाली धनराशि निकालकर कुछ हिस्सा इन्हें देने लगा। बताया गया है कि ओमप्रकाश अपनी बहन समेत तीनों पेंशनर से बच्चों के नाम चेक भी लेकर रुपये निकालता था। इन तीनों से एक करोड़ 15 लाख से अधिक का भुगतान हुआ है।