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परिजनों की चीत्कार से आंखें हुई नम
अमर उजाला ब्यूरो, फतेहपुर
Updated Fri, 04 Sep 2015 12:27 AM IST
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राष्ट्रीय राज्य मार्ग-दो पर गुरुवार तड़के पहर कार एक्सीडेंट में तीन परिवारों के कुलदीपक बुझ गए हैं। हादसे का शिकार हुए यह छात्र अपने अपने परिवारों की इकलौती संतान थे। परिवार के लोग अपने बच्चों के शव देखने के बाद बेहाल हो गये। परिजनों की करुण क्रंदन चीत्कारों से पोस्टमार्टम हाउस परिसर गूंजता रहा। हादसे के बारे जो भी एक बार सुनता तो उसके ही मुंह से एक ही बात निकलती कि हे भगवान यह क्या हो गया।
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छात्र अवनीश के पिता हैं सपा नेता
जालौन जिले कोच थाना क्षेत्र के चमरसेना गांव निवासी मृतक अवनीश का पिता राजेंद्र सपा नेता है। वह समाज में अपनी बेहतर छवि के लिए जाने जाते हैं। परिजनों ने बताया कि राजेंद्र सपा के नेता हैं और पार्टी में जिला सचिव का पद पर भी है।
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इंसेट
दो साल से कानपुर में रहते थे
एसएससी की तैयारी के लिए पांचों छात्र कानपुर में करीब दो साल से रहते थे। कानपुर में तैयारी के साथ हमेशा साथ में ही परीक्षाएं देने जाते थे। सभी छात्रों के परिवार के लोग भी एक दूसरे से परिचित थे।
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पोस्टमार्टम में लेटलतीफी पर भड़की साध्वी
हादसे की खबर पर केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण राज्यमंत्री व जिले की सांसद साध्वी निरंजन ज्योति पीड़ित परिवारीजनों को हाल जानने के लिए पोस्टमार्टम हाउस पहुंची थी। पोस्टमार्टम हाउस में करीब तीन बजे छात्रों के शवों का पोस्टमार्टम नहीं शुरू हो पाया था। तीनों शवों को वापस जालौन परिजनों को लेकर जाना था। इससे काफी देर भी हो रही थी। इसी बात को लेकर मंत्री भड़क उठी। उन्होंने तत्काल सीएमओ से बातचीत की। सीएमओ ने पोस्टमार्टम प्रभारी डाक्टर दिलीप सिंह से बातचीत की तो पता चला कि लेटलतीफी का कारण पुलिस का पंचायतनामा भरने में देर लगाना है।
बुझा तीन घरों का चिराग, कोंच में मातम का माहौल
तीनाें छात्र अपने मां बाप की इक लौती संतान थे
कानपुर में कर रहे थे एसएससी की कोचिंग
फतेहपुर सड़क हादसे में तीन छात्रों की मौत से कोंच इलाके में गम का माहौल है। यह तीनों अपने परिवार के इकलौते चिराग थे। हादसे में जैसे ही यह सूचना उनके घर पर आई तो पूरा गांव रो पड़ा। तीनों गांवाें में मातम पसरा हुआ है। हर तरफ परिजनों की चीखाें की आवाज सुनकर हर एक आंख नम हो गई। रिश्तेदार से लेकर हर कोई ढ़ाढस बंधा रहा है लेकिन परिजनों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे है।
हादसे में दम तोड़ने वाले छात्र सावन के दिन अपने घराें में आए थे और बुधवार की दोपहर ही कानपुर के लिए आई टेन कार से रवाना हुए थे। वे कानपुर न जाकर इलाहाबाद चले गए। रास्ते में तीनों की मौत हो गई, जबकि दो घायल हो गए। तीनाें पुत्र अपने अपने मां पिता की इकलौती संतान है। तीनाें गांवाें में मातम पसरा हुआ है। हालत यह है कि तीनाें गांवाें में सिर्फ चीखें ही सुनाई दे रही है। परिजन व रिश्तेदार मृतकों के शव लेने रवाना हो गए है। घर में महिलाआें का रोरोकर बुरा हाल है। ग्रामीण व रिश्तेदार परिजनाें को ढ़ाढस बंधा रहे है लेकिन कलेजों के टुकडों केबिछड़ने का गम मां को भारी पड़ रहा है।