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Fatehpur News: आरोपियों से ज्यादा खुद की चिंता में जिम्मेदार

Wed, 20 Aug 2025 01:55 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहपुर Updated Wed, 20 Aug 2025 01:55 AM IST
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The responsible person is more worried about himself than the accused
फतेहपुर। मामूली से मामलों में तुरंत ही आरोपियों को सलाखों के पीछे डालने वाली पुलिस 11 अगस्त के बवाल के आरोपियों की ओर मानो देख भी नहीं रही है। यही वजह है कि घटना के नौ-दस दिन बीतने के बाद भी अब तक किसी एक की भी गिरफ्तारी नहीं हुई है। माना जा रहा है कि बवाल के जिम्मेदार इस वक्त सिर्फ अपनी चिंता में हैं, उन्हें लग रहा है कि कभी भी शासन स्तर से कार्रवाई का फरमान आ सकता है।
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बता दें कि मामले की जांच कमिश्नर और आईजी ने की है और बवाल होने की मुख्य वजह की रिपोर्ट शासन को भी भेज दी है। इस पर कभी भी बवाल रोकने में नाकाम रहे जिम्मेदार पर कार्रवाई की जा सकती है। यही वजह है कि कलक्ट्रेट हो या जिले का पुलिस मुख्यालय वहां पूरे दिन एक अजब सा सन्नाटा पसरा रहता है। वहीं, 11 अगस्त बवाल के आरोपी अभी भी खुलेआम घूम रहे हैं। अधिकारी दबिश का दावा तो कर रहे हैं लेकिन गिरफ्तारी एक भी न दिखा पाए हैं।
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- ये हैं मामले के मुख्य आरोपी
मकबरा में विवाद के मामले में नामजद भाजपा नेता अभिषेक शुक्ला,आशीष त्रिवेदी, सपा से निष्कासित पप्पू सिंह चौहान, भाजयुमो नेता प्रसून तिवारी, सभासद रितिक पाल, विनय तिवारी, पुष्पराज पटेल, जिला पंचायत सदस्य अजय सिंह उर्फ रिंकू लोहारी, अनुसूचित समाज के नेता देवनाथ धाकड़े व 150 अन्य शामिल हैं।
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- इन धाराओं में दर्ज है एफआईआर
आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 301, 196, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना, 2/3 और अपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम की धारा सेवन सीएल के तहत रिपोर्ट दर्ज की गई है।

-बीएनएस की धारा 190 के तहत लोक सेवक को सुरक्षा के लिहाज से रोकने पर चोट पहुंचाने व धमकी देना
- धारा 191(2) झूठा साक्ष्य देना,धारा 191(3) के तहत किसी दूसरी वस्तु पर हकदारी।
- धारा 301 गैर इरादतन हत्या से जुड़ी है। जिसमें हत्या के इरादे से पथराव करना।
- धारा 196 के तहत झूठे साक्ष्य और समुदायों के बीच नफरत फैलाने को बढ़ावा देना।
अधिवक्ता नितिन त्रिपाठी ने बताया कि उक्त धाराएं सात साल के नियम के तहत जमानतीय है, इनमें सेवन सीएल संज्ञेय अपराध में आता है। सुनवाई में मजिस्ट्रेट के इच्छा अनुरूप जमानत का प्रावधान है।
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