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‘रम गई मां मेरे रोम-रोम में...’ गीत में झूमे श्रद्धालु
ब्यूरो अमर उजाला, फतेहपुर
Updated Mon, 11 Apr 2016 12:45 AM IST
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साईं मंदिर में भजन गातीं महिलाएं
- फोटो : अमर उजाला
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चैत्र नवरात्र में हर तरफ मां के जयकारों की गूंज है। भक्तों ने मां के चौथे स्वरूप कूष्मांडा के दर्शन कर पेठा का भोग लगाया। देवी मंदिरों में दिनभर भजन का दौर जारी रहा। गांव-गांव से पहुंचे भक्तों ने मां के नयनाभिराम दृश्य के दर्शन किए।
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नवरात्र में मां का चतुर्थ स्वरूप देवी कूष्मांडा का है। मां कूष्मांडा को भक्तों ने नारियल और पेठा का भोग लगाया। देवी मां की विधि विधान से पूजा कर दुर्गा सप्तशती का पाठ किया। घरों में भक्तों ने कुंवारी कन्याओं को भोज कराया। किसी ने खीर पूड़ी तो किसी ने दही जलेबी और दही पेड़ा खिलाया।
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इसके बाद दक्षिणा और फल देकर आशीर्वाद लिया। अहमद नगर स्थित कालिका मंदिर में सुबह से भक्तों की भीड़ रही। यहां मां काली का भव्य श्रृंगार किया गया। शहर के तुराबअली का पुरवा स्थित शीतला मंदिर में भक्तों ने पहुंचकर मां की पूजा अर्चना की। हरिहरगंज स्थित दुर्गा मंदिर में सुबह से शाम तक भक्तों की भीड़ रही।
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यहां देवी के नौ स्वरूपों के दर्शन कर भक्त निहाल हो गए। आचार्य पंडित कृष्णदत्त अवस्थी ने बताया कि नवरात्र में माता के नौ स्वरूपों के दर्शन करने से मनोकामना पूर्ण होती है। कीलक, कवच, अर्गला के साथ दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से देवी मां प्रसन्न होती हैं।
आचार्य पंडित केके पांडेय ने बताया कि माता का पांचवां स्वरूप स्कंद माता का है। महान ऋषि सनत कुमार जिनका दूसरा नाम स्कंद था उनकी माता होने से उनका नाम स्कंद माता पड़ा। शास्त्रों की पूजा, ग्रंथ, पुराण, रामायण, गीता की पूजा करने से मां प्रसन्न होती हैं।
मां को पूजन में गुलाब की माला अर्पण करें और अनार के फल से भोग लगाए। मां को लाल वस्तुएं प्रिय है। ओम श्री स्कंद माताये नम: का जाप कर पुराणों को गंगा जल से आचमन करें।