फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Fatehpur News ›   The food at school, go home drink

खाना स्कूल में, पानी पीने जाते हैं घर

Fri, 18 Mar 2016 12:58 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, फतेहपुर
ब्यूरो अमर उजाला, फतेहपुर Updated Fri, 18 Mar 2016 12:58 AM IST
विज्ञापन
The food at school, go home drink
आदर्श प्राथमिक खेलदार का खराब हैंडपंप।

परिषदीय स्कूलों में दोपहर को खाने की तो व्यवस्था है लेकिन पीने के लिए पानी का इंतजाम नहीं हैं। बच्चे मिडडे मील स्कूल में खाने के बाद पानी पीने घर जाते हैं। कुछ बच्चे बोतलों में पानी लेकर स्कूल आते हैं। परिषदीय स्कूलों की पेयजल व्यवस्था का यह कड़वा सच है।

विज्ञापन


नगर क्षेत्र के प्राथमिक स्कूल आबूनगर सेकेंड का हैंडपंप काफी अरसे से खराब है। हैंडपंप के आसपास मलवा डंप कर दिया गया है। यह हैंडपंप बेसिक शिक्षा विभाग के रिकार्ड में कंडम हो चुका है। स्कूल में प्रतिदिन 50 से 60 बच्चों के लिए एमडीएम पकता है। रसोइयों को खाना पकाने के लिए दूर से पानी लाना पड़ता है।
विज्ञापन


बच्चे खाना खाने के बाद पानी पीने के लिए घर चले जाते हैं। कुछ बच्चे बोतलों में पानी साथ लेकर आते हैं। आदर्श प्राथमिक स्कूल खेलदार में हैंडपंप लगने के बाद शायद महीनेभर भी नहीं चला। चार साल पहले हैंडपंप लगाने के बाद जलनिगम ने इधर घूमकर नहीं देखा। इस स्कूल में प्रतिदिन एक सैकड़ा बच्चों के लिए एमडीएम पकाया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


हैंडपंप खराब होने के कारण बच्चों को कुछ फासले पर स्थित पूर्व माध्यमिक स्कूल के हैंडपंप में पानी पीने जाना पड़ता है। प्राथमिक स्कूल मसवानी सेकेंड का हैंडपंप दो साल से बंद है। यहां पर प्रतिदिन 70 से 80 बच्चों के लिए एमडीएम पकाया जाता है।

यहां के कुछ बच्चे बोतलों में पानी लेकर स्कूल आते हैं या फिर एमडीएम खाने के बाद दूर मंदिर में लगे हैंडपंप में पानी पीने जाते हैं। यह स्कूल तो बानगी के तौर पर हैं। वर्तमान समय में जिले के 690 स्कूलों में हैंडपंप खराब हैं या फिर लगे नहीं है।

बेसिक शिक्षा विभाग के अभिलेखों की मानें, तो 368 प्राथमिक स्कूलों के हैंडपंप रिबोर के लिए चिह्नित हैं, जबकि 84 स्कूलों में अभी तक हैंडपंप लगाए ही नहीं गए हैं। इसी प्रकार 138 उच्च प्राथमिक  स्कूलों के हैंडपंप रिबोर के लिए चिह्नित हैं, जबकि 100 स्कूल अभी तक हैंडपंप विहीन हैं।


इन स्कूलों के बच्चे स्कूल में मिड डे मील खाते हैं और पानी पीने के लिए दर-दर की ठोकरें खाते हैं। एमएल वर्मा, जिला समन्वयक निर्माण  जिले के 2,650 परिषदीय स्कूलों में 690 स्कूल ऐसे हैं, जहां या तो हैंडपंप ही नहीं है अथवा हैंडपंप स्थायी रूप से खराब हैं। इन स्कूलों में हैंडपंप लगाने के लिए जलनिगम को सूची भेजी गई है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed