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फतेहपुर: जहर से महिला के बाद उसकी मासूम बेटी की भी मौत
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अल्लीपुर (फतेहपुर)। देवर और दो मासूम बेटियों के साथ जहर खाने वाली महिला की मौत के दूसरे दिन शुक्रवार भोर एक मासूम की भी कानपुर हैलट में इलाज के दौरान मौत हो गई। ससुराल व मायके पक्ष के बीच सहमति के बाद सुबह महिला का गंगा किनारे दाह संस्कार किया गया। देवर-भाभी के बीच प्रेम-प्रसंग में एक न हो पाने के कारण आत्मघाती कदम उठाए जाने की चर्चा है।
मलवां थाना क्षेत्र सहिबापुर गांव में रहने वाले रामऔतार किसान हैं। परिवार में पत्नी सत्तो देवी के अलावा अविवाहित बेटा शेखर, बहू रीता पत्नी रामशरण, सावित्री पत्नी बबलू हैं। सभी एक ही घर में अलग-अलग रहते हैं। रीता के पति रामशरण की करीब तीन साल पहले दुर्घटना में मौत हो गई थी। सास सत्तो देवी व ग्रामीणों ने बताया कि बुधवार रात रीता (27) ने बेटी जह्नावी (6), मानवी उर्फ गोलू (2) और देवर शेखर (20) के साथ जहर खा लिया था। सास और देवरानी सावित्री ने पड़ोसियों की मदद से चारों को जिला अस्पताल पहुंचाया था। यहां से सभी को कानपुर रेफर किया गया था। गुरुवार रात इलाज के दौरान रीता की मौत हो गई थी। कानपुर से शव रात करीब 12 बजे गांव आया। शुक्रवार भोर मासूम गोलू की भी मौत हो गई। रीता के मायके हथगाम थाना क्षेत्र के अहिंदा गांव से पिता धिनई, चाचा सवानी, फूफा प्रकाश शुक्रवार सुबह सहिबापुर गांव पहुंचे। सूचना पर बंगलूरू से यशवंत देवर भी पहुंचा। सास और रीता का भाई अखिलेश कानपुर हैलट में शेखर और मासूम जह्नावी की देखभाल को है। शव आने की सूचना पर ग्रामीणों की भीड़ उमड़ी रही। ससुराल व मायके पक्ष के बीच अंतिम संस्कार को लेकर कई घंटे बाद एक मत बना। गंगा किनारे रीता के शव का दाह संस्कार हुआ। इधर, पोस्टमार्टम के बाद मासूम बेटी गोलू के शव का खेत में पिता के समाधि स्थल के पास अंतिम संस्कार करने की बात तय हुई।
साइड स्टोरी
उम्र आड़े आने पर ससुराल वाले शादी से करते थे मना
- मायके पक्ष शादी को था तैयार, ससुर बोले मजबूरी में मान जाते
अमर उजाला ब्यूरो
फतेहपुर। पति की मौत के कुछ दिन बाद ही रीता और देवर शेखर में प्रेम प्रसंग चर्चा में था। दोनों की उम्र में करीब सात साल का अंतर था। इसके चलते ससुराल पक्ष रिश्ते पर एतराज करता था। फलस्वरूप दोनों ने बच्चों समेत जान देने का फैसला ले लिया। यह बात सभी को मालूम थी।
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मलवां थाने के सहिबापुर गांव निवासी रामऔतार का पांच बेटों में सबसे बड़ा बेटा रामशरण था। वह भी बाहर मजदूरी करता था। दूसरा बेटा बबलू, यशवंत ( बंगलूरू में शटरिंग कारीगर), सुनील (सउदी अरब में शटरिंग कारीगर) और सबसे छोटा बेटा शेखर हैं। सुनील के साथ शेखर भी डेढ़ साल पहले भाई सउदी अरब में काम करता था। फोन पर अक्सर भाभी रीता से बातचीत होती थी। करीब एक साल पहले वह गांव आ गया था। यहां खेतीबाड़ी में पिता का हाथ बंटाने के साथ अन्य शहरों में मजदूरी करने जाता था। करीब छह माह से गांव में ही था। भाभी और देवर के प्रेम प्रसंग की चर्चा आम हो गई थी। रीता के पिता धिनई ने बताया कि उन्होंने दोनों की शादी का प्रस्ताव रखा था। समधी रामशरण तैयार नहीं थे। रामशरण ने बताया कि शेखर से बड़े दो बेटों की शादी नहीं थी। ऐसे में शेखर की बड़ी बहू से शादी कराना मुश्किल काम था। उनके बीच उम्र का भी फर्क था। वह दोनों नहीं मानते तो शादी करा देते।
इनसेट
सबकी जुबां पर रहा मासूमों को तो छोड़ देते
इलाकाई लोगों की जुबां पर एक ही शब्द रहा है कि उन दोनों का मासूमों ने क्या बिगाड़ा था। आखिर मासूमों को ससुराल, मायके वाले मिलकर पालपोश लेते। खुद के साथ उनकी जान लेने की क्या वजह थी। उन दोनों को मासूम जह्नावी और गोलू को छोड़ देना चाहिए था। कयास लगाए कि शायद रीता के जेहन में रहा होगा उसकी मौत के बाद बच्चों की देखरेख कैसे कौन करेगा। इसी बात पर उसने लड्डू में बच्चों को जहर दे डाला। कमरे में उल्टी में लड्डू का टुकड़ा मिला ।
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इनसेट-
रामशरण ने जमा किया पत्नी बच्चों के नाम रुपया
रामशरण ने पत्नी रीता और बच्चों के नाम पर बैंक में कुछ रुपया जमा किया था। जो उसके न रहने के बाद भी परिवार के काम आता। परिजनों ने बताया कि कुछ रकम जमा की थी। उसके कागजात नहीं है कितनी रकम जमा है यह भी मालूम नहीं है।
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मलवां थाना क्षेत्र सहिबापुर गांव में रहने वाले रामऔतार किसान हैं। परिवार में पत्नी सत्तो देवी के अलावा अविवाहित बेटा शेखर, बहू रीता पत्नी रामशरण, सावित्री पत्नी बबलू हैं। सभी एक ही घर में अलग-अलग रहते हैं। रीता के पति रामशरण की करीब तीन साल पहले दुर्घटना में मौत हो गई थी। सास सत्तो देवी व ग्रामीणों ने बताया कि बुधवार रात रीता (27) ने बेटी जह्नावी (6), मानवी उर्फ गोलू (2) और देवर शेखर (20) के साथ जहर खा लिया था। सास और देवरानी सावित्री ने पड़ोसियों की मदद से चारों को जिला अस्पताल पहुंचाया था। यहां से सभी को कानपुर रेफर किया गया था। गुरुवार रात इलाज के दौरान रीता की मौत हो गई थी। कानपुर से शव रात करीब 12 बजे गांव आया। शुक्रवार भोर मासूम गोलू की भी मौत हो गई। रीता के मायके हथगाम थाना क्षेत्र के अहिंदा गांव से पिता धिनई, चाचा सवानी, फूफा प्रकाश शुक्रवार सुबह सहिबापुर गांव पहुंचे। सूचना पर बंगलूरू से यशवंत देवर भी पहुंचा। सास और रीता का भाई अखिलेश कानपुर हैलट में शेखर और मासूम जह्नावी की देखभाल को है। शव आने की सूचना पर ग्रामीणों की भीड़ उमड़ी रही। ससुराल व मायके पक्ष के बीच अंतिम संस्कार को लेकर कई घंटे बाद एक मत बना। गंगा किनारे रीता के शव का दाह संस्कार हुआ। इधर, पोस्टमार्टम के बाद मासूम बेटी गोलू के शव का खेत में पिता के समाधि स्थल के पास अंतिम संस्कार करने की बात तय हुई।
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साइड स्टोरी
उम्र आड़े आने पर ससुराल वाले शादी से करते थे मना
- मायके पक्ष शादी को था तैयार, ससुर बोले मजबूरी में मान जाते
अमर उजाला ब्यूरो
फतेहपुर। पति की मौत के कुछ दिन बाद ही रीता और देवर शेखर में प्रेम प्रसंग चर्चा में था। दोनों की उम्र में करीब सात साल का अंतर था। इसके चलते ससुराल पक्ष रिश्ते पर एतराज करता था। फलस्वरूप दोनों ने बच्चों समेत जान देने का फैसला ले लिया। यह बात सभी को मालूम थी।
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मलवां थाने के सहिबापुर गांव निवासी रामऔतार का पांच बेटों में सबसे बड़ा बेटा रामशरण था। वह भी बाहर मजदूरी करता था। दूसरा बेटा बबलू, यशवंत ( बंगलूरू में शटरिंग कारीगर), सुनील (सउदी अरब में शटरिंग कारीगर) और सबसे छोटा बेटा शेखर हैं। सुनील के साथ शेखर भी डेढ़ साल पहले भाई सउदी अरब में काम करता था। फोन पर अक्सर भाभी रीता से बातचीत होती थी। करीब एक साल पहले वह गांव आ गया था। यहां खेतीबाड़ी में पिता का हाथ बंटाने के साथ अन्य शहरों में मजदूरी करने जाता था। करीब छह माह से गांव में ही था। भाभी और देवर के प्रेम प्रसंग की चर्चा आम हो गई थी। रीता के पिता धिनई ने बताया कि उन्होंने दोनों की शादी का प्रस्ताव रखा था। समधी रामशरण तैयार नहीं थे। रामशरण ने बताया कि शेखर से बड़े दो बेटों की शादी नहीं थी। ऐसे में शेखर की बड़ी बहू से शादी कराना मुश्किल काम था। उनके बीच उम्र का भी फर्क था। वह दोनों नहीं मानते तो शादी करा देते।
इनसेट
सबकी जुबां पर रहा मासूमों को तो छोड़ देते
इलाकाई लोगों की जुबां पर एक ही शब्द रहा है कि उन दोनों का मासूमों ने क्या बिगाड़ा था। आखिर मासूमों को ससुराल, मायके वाले मिलकर पालपोश लेते। खुद के साथ उनकी जान लेने की क्या वजह थी। उन दोनों को मासूम जह्नावी और गोलू को छोड़ देना चाहिए था। कयास लगाए कि शायद रीता के जेहन में रहा होगा उसकी मौत के बाद बच्चों की देखरेख कैसे कौन करेगा। इसी बात पर उसने लड्डू में बच्चों को जहर दे डाला। कमरे में उल्टी में लड्डू का टुकड़ा मिला ।
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इनसेट-
रामशरण ने जमा किया पत्नी बच्चों के नाम रुपया
रामशरण ने पत्नी रीता और बच्चों के नाम पर बैंक में कुछ रुपया जमा किया था। जो उसके न रहने के बाद भी परिवार के काम आता। परिजनों ने बताया कि कुछ रकम जमा की थी। उसके कागजात नहीं है कितनी रकम जमा है यह भी मालूम नहीं है।