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दिनभर समान काम, समान वेतन पर अड़े रहे
अमर उजाला ब्यूरो, फतेहपुर
Updated Thu, 17 Mar 2016 12:46 AM IST
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धाता पीएचसी में धरने पर बैठे संविदा कर्मी
- फोटो : अमर उजाला
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सरकारी अस्पतालों में नियुक्त संविदा कर्मियों का विरोध प्रदर्शन तीसरे दिन भी जारी रहा। हड़ताली संविदा स्टाफ ने ‘नो वर्क, नो पे’ पर सवाल खड़े किए। कहा कि समान कार्य व समान वेतन पर भी गौर किया जाना चाहिए। सरकार के साथ विभागीय अफसर भी हक की अनदेखी पर उतारू हैं। लिहाजा यह लड़ाई रुकने वाली नहीं है। ऐलान किया कि अगर प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य से सकारात्मक वार्ता नहीं हुई, तो गुरुवार से जिला मुख्यालय में धरना शुरू किया जाएगा।
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एनएचएम संविदा कर्मचारी संघ के बैनर तले फरवरी महीने से गांधीगिरी के जरिए सरकार का ध्यान अपनी ओर खींचने का प्रयास करने वाले संविदा कर्मी अब आरपार की लड़ाई के मूड में हैं। रविवार को लखनऊ में संविदा कर्मियों पर हुए लाठी चार्ज ने इन्हें और आंदोलित कर दिया है। सोमवार से बुधवार तक कार्य बहिष्कार का फैसला लेने वाले संविदा कर्मियों ने गुरुवार को भी कार्य से किनारा रखा। सदर अस्पताल की आयुष विंग समेत अस्पताल में तैनात संविदा स्टाफ ने काम नहीं किया। संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. केके पांडेय के नेतृत्व में चल रहे कार्य बहिष्कार से तीसरे दिन भी स्वास्थ्य सेवाएं पटरी पर नहीं लौट सकी।
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विरोध का असर जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में दिखा, लेकिन सबसे ज्यादा प्रभाव जिला महिला अस्पताल में पड़ा। बुधवार का दिन टीकाकरण का होता है। दुधमुंहे बच्चों को लेकर आई महिलाओं और उनके तीमारदारों को खासी मायूसी हुई। संघ के महामंत्री ने नो वर्क, नो पे पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि समान वेतन का सिद्घांत क्यों याद नहीं आ रहा है। संघ के जिलाध्यक्ष डॉ. कुमार आनंद यादव ने कहा कि यदि प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य से होने वाली वार्ता सफल नहीं रही तो हड़ताल जारी रहेगी। जिले भर के संविदा कर्मी गुरुवार से जिला मुख्यालय में धरना देंगे।
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स्वास्थ्य विभाग में संविदा की नौकरी कर रही महिलाओं ने गोद में मासूम बच्चों को लेकर विरोध दर्ज कराया। यह नजारा धाता पीएचसी समेत कई सरकारी अस्पतालों में देखने को मिला। हड़ताली संविदा कर्मियों का कहना था कि सरकार को उनकी बात माननी पड़ेगी।
भले ही जिले भर में संविदा कर्मी कार्य बहिष्कार पर हैं, लेकिन हुसैनगंज सीएचसी मेें कार्यरत यह स्टाफ इससे किनारा कसे रहे। यहां पर संविदा स्वास्थ्य कर्मियों ने संख्या बल कम होने से विरोध जताने के बजाय काम किया।