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सत्र के साथ निजी स्कूलों ने बदली किताबें
ब्यूरो अमर उजाला, फतेहपुर
Updated Wed, 30 Mar 2016 12:47 AM IST
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नए सत्र में नर्सरी से लेकर जूनियर हाईस्कूल तक संचालित निजी स्कूलों ने इस सत्र से किताबें बदल दी हैं। स्कूलों ने नए प्राइवेट प्रकाशनों से समझौता करबुक स्टाल तय कर दिए हैं। अब अभिभावकों को महंगे प्रकाशकों की किताबें खरीदना मजबूरी होगी। इस बार पुराने प्रकाशनों की किताबें दुकानों से गायब हैं। दुकानों में नए प्रकाशन की किताबों की ही धूम है। बीएसए विनय कुमार का कहना है कि सत्र शुरू होते ही छापेमारी की जाएगी। स्कूलों में किताबों का स्टाक पाए जाने पर मान्यता खत्म करने की कार्रवाई होगी।
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अनिवार्य शिक्षा अधिनियम के तहत कक्षा आठ तक के बच्चों को मुफ्त शिक्षा के साथ किताबें आदि देने का प्रावधान है। इसके लिए जिले में 2650 परिषदीय स्कूल संचालित हैं। इनमें यह व्यवस्था लागू है, लेकिन बेसिक शिक्षा विभाग ने परिषदीय स्कूलों के पास निजी स्कूलों को मान्यता दे रखी है।
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ऐसे में निजी स्कूल संचालक मनमानी फीस के साथ प्रवेश शुल्क और प्राइवेट प्रकाशन की किताबें चलाने के नाम पर अपनी जेब भर रहे हैं। नया सत्र शुरू होने में सिर्फ दो दिन बचे हैं। ऐसे में सभी निजी स्कूलों ने चालू सत्र की किताबें बदल दी हैं। अपने यहां पढ़ाई जाने वाली नए प्रकाशन की किताबों की दुकानें निर्धारित कर दी हैं।
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बेसिक शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त इन स्कूलों में नए प्रकाशन रत्ना सागर, आक्सफोर्ड, मैकमिलन, बुकमैन, सिल्वर टिप्स, सरस्वती हाउस, किप्स आदि प्राईवेट प्रकाशनों की किताबों की बिक्री शुरू हो चुकी है। इन प्रकाशनों की कक्षा एक की सिर्फ किताबें 800, कक्षा दो व तीन की 1000, कक्षा चार की 1200, कक्षा पांच की 1400 रुपये में मिल रही हैं।
कक्षा छह से आठ तक की सिर्फ किताबें खरीदने में अभिभावक को 2000 रुपये चुकता करना पड़ रहा है। बुकसेलर नाम न छापने की शर्त पर बताते हैं कि एक प्रकाशन की किताब सिर्फ एक विद्यालय में चलती है और वह किताब निर्धारित दुकान पर ही मिल पाती है। प्रकाशन और स्कूल के बीच में सीधे कमीशन का सौदा होता है।
इन किताबों में 40 से लेकर 75 फीसदी कमीशन होता है, जिसमें 10 फीसदी बुकसेलर का तथा शेष संबंधित स्कूल का हिस्सा होता है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी विनय कुमार का कहना है कि अनिवार्य शिक्षा अधिनियम के विपरीत कार्य करने वाले मान्यता प्राप्त स्कूलों के खिलाफ सत्र शुरू होते ही शिकंजा कसा जाएगा। ऐसे सभी स्कूलों को नोटिस जारी की गई हैं, जिसमें पाठ्यक्रम में शामिल किताबों की पंजीकृत फर्मों से ही किताबों की खरीद करने के निर्देश दिए गए हैं। नियमों का पालन न करने वाले स्कूलों की मान्यता खत्म कर दी जाएगी।