डाक्टरों की सजगता से गर्भवती की जान बची
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फतेहपुर। ट्यूब की जगह आंतों में पल रहे एक चार माह के भ्रूण को सोमवार को ऑपरेशन कर निकाला गया। वह दस मिनट ही जिंदा रह सका। हालांकि मां की हालत ठीक है। डॉक्टरों का मानना है कि आमतौर पर ऐसा हार्मोनल गड़बड़ी से होता है। असोथर क्षेत्र के टीकर सरांय गांव निवासी कृष्णपाल की पत्नी विनीता (25) को गंभीर अवस्था में 11 मई को आईटीआई रोड स्थित अल्का मैटरनिटी एंड नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया था। डा. अल्का गुप्ता की जांच में चार महीने का महिला को गर्भ तो पाया गया, लेकिन आश्चर्यजनक बात यह थी, कि उसके पेट का खून जम रहा था। उन्होंने बताया कि ऐसी हालत में तत्काल महिला का आपरेशन किया गया। पेट खोलने के बाद वह हैरत में रह गईं भ्रूण ट्यूब में नहीं बल्कि आंतों के बीच में विकसित हो रहा था। सफल आपरेशन के दौरान डाक्टर ने आंतों के बीच में फंसा भ्रूण जीवित बाहर निकाला, जिसकी 10 मिनट तक जीवित रहने के बाद मौत हो गई। आपरेशन करने वाली डॉक्टर का दावा है कि ऐसे केसेज हजारों में एक पाए जाते हैं। ऐसे केस को एंडामिनल प्रेग्नेंसी कहते हैं।
दूसरी ओर जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डा. रेखारानी का कहना है कि ट्यूबनल प्रग्नेंशी बहुत कम होती हैं। यह स्थिति हारमोन में बदलाव से होती है। ऐसी स्थिति में एक से अधिक बच्चे साथ पैदा होना। बच्चे का विकृत हो जाना या फिर ट्यूब का मुंह समय से पहले बंद होने पर जीवाणु का अन्यत्र चले जाने से यही प्रेग्नेंसी की स्थिति उत्पन्न होती है। समय से जानकारी होने पर जच्चा की जान बचाई जा सकती है, लेकिन लापरवाही से जच्चा-बच्चा दोनों की मौत हो सकती है।