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आठ साल बाद केंद्रीय विद्यालय निर्माण की तस्वीर हुई साफ
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फतेहपुर। केंद्रीय विद्यालय बनाने को लेकर पूरे आठ साल बार तस्वीर साफ हो पाई है। कैबिनेट की बैठक में जमीन देने की मंजूरी के बाद केंद्रीय विद्यालय बनना तय हो गया है। जमीन में भवन निर्माण को लेकर तैयारियां भी शुरू हो गई है।
केंद्रीय विद्यालय निर्माण के लिए जिले में प्रक्रिया वर्ष 2012 में शुरू हुई थी। जमीन खोजने में प्रशासन को आठ साल का समय लगा। क्षेत्रीय सांसद एवं केंद्रीय राज्यमंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने तीन साल पहले केंद्रीय विद्यालय का निर्माण कराने के लिए पैरवी तेज की। इसके बाद केंद्रीय विद्यालय निर्माण कमेटी ने जमीन का मौके पर निरीक्षण किया। कमेटी में चिन्हित जमीन विद्यालय के नाम आवंटन, विद्युतीकरण, पानी की व्यवस्था के साथ डबल लेन का पहुंच मार्ग निर्माण कराने के निर्देश दिए थे। यह शर्ते पूरी करने में प्रशासन दो साल से हीलाहवाली कर रहा था। ऐसे में केंद्रीय विद्यालय निर्माण कमेटी ने जिले में विद्यालय रद्द करने की पत्रावली तैयार करना शुरू किया। इसकी भनक लगते ही केंद्रीय राज्यमंत्री ने नाराजगी जताई और प्रशासन ने आनन फानन में जमीन का आवंटन कराया। केंद्रीय राज्यमंत्री की 339000 सांसद निधि से निर्माण स्थल तक बिजली की लाइन तैयार की गई। यहां तक पहुंच मार्ग निर्माण के लिए जमीन खाली कराने के साथ लोक निर्माण विभाग ने टेंडर प्रक्रिया पूरी कर की। जलापूर्ति के लिए यहां पर बोरिंग हो चुकी है। यह सभी शर्तें पूरी होने के बाद कैबिनेट ने मंगलवार को केंद्रीय विद्यालय के नाम जमीन का आवंटन कर अब सब साफ कर दिया।
डीआईओएस महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि केंद्रीय विद्यालय निर्माण के लिए आवश्यक शर्तें दी गई हैं। संबंधित प्रमाणपत्रों के साथ पत्रावली अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा को चार मार्च को भेज दी गई थी। अब कैबिनेट ने जमीन केंद्रीय विद्यालय को देने के प्रस्ताव को हरीझंडी दी है।
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केंद्रीय विद्यालय निर्माण के लिए जिले में प्रक्रिया वर्ष 2012 में शुरू हुई थी। जमीन खोजने में प्रशासन को आठ साल का समय लगा। क्षेत्रीय सांसद एवं केंद्रीय राज्यमंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने तीन साल पहले केंद्रीय विद्यालय का निर्माण कराने के लिए पैरवी तेज की। इसके बाद केंद्रीय विद्यालय निर्माण कमेटी ने जमीन का मौके पर निरीक्षण किया। कमेटी में चिन्हित जमीन विद्यालय के नाम आवंटन, विद्युतीकरण, पानी की व्यवस्था के साथ डबल लेन का पहुंच मार्ग निर्माण कराने के निर्देश दिए थे। यह शर्ते पूरी करने में प्रशासन दो साल से हीलाहवाली कर रहा था। ऐसे में केंद्रीय विद्यालय निर्माण कमेटी ने जिले में विद्यालय रद्द करने की पत्रावली तैयार करना शुरू किया। इसकी भनक लगते ही केंद्रीय राज्यमंत्री ने नाराजगी जताई और प्रशासन ने आनन फानन में जमीन का आवंटन कराया। केंद्रीय राज्यमंत्री की 339000 सांसद निधि से निर्माण स्थल तक बिजली की लाइन तैयार की गई। यहां तक पहुंच मार्ग निर्माण के लिए जमीन खाली कराने के साथ लोक निर्माण विभाग ने टेंडर प्रक्रिया पूरी कर की। जलापूर्ति के लिए यहां पर बोरिंग हो चुकी है। यह सभी शर्तें पूरी होने के बाद कैबिनेट ने मंगलवार को केंद्रीय विद्यालय के नाम जमीन का आवंटन कर अब सब साफ कर दिया।
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डीआईओएस महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि केंद्रीय विद्यालय निर्माण के लिए आवश्यक शर्तें दी गई हैं। संबंधित प्रमाणपत्रों के साथ पत्रावली अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा को चार मार्च को भेज दी गई थी। अब कैबिनेट ने जमीन केंद्रीय विद्यालय को देने के प्रस्ताव को हरीझंडी दी है।
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