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पापा कब घर आओगे
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डॉक्टर मुनेंद्र
- फोटो : AMAR UJALA
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कब खत्म होगा कोरोना, पापा कब आओगे * सुरेश चन्द्र शर्मा हुसैनगंज। पैर पसार रहे कोरोना वायरस के जानलेवा प्रकोप से जनमानस को बचाने के लिए देश मे लाखों कोरोना योद्धा अपनी जान को जोखिम में डालकर काम कर रहे हैं। अपने परिवार से सैकड़ो किमी दूर रहकर दिन रात स्वास्थ्य सेवा देने वाले इन कर्मचारियों का भी अपना परिवार है, जो सदैव सलामती की दुआ करते रहते हैं। साथ ही कोरोना कब खत्म होगा और पति कब घर आएंगे, यह सवाल बार-बार जेहन में गूंजता रहता है। बच्चे भी पूछते हैं पापा कब घर आओगे। एक बातचीत में जिले के थरियांव में स्थित जनपद स्तरीय कोविड 19 के डेडीकेटेड अस्पताल में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी के पद पर कार्यरत कप्तान सिंह के दिल का दर्द छलक पड़ा।उन्होंने बताया कि मैं राजस्थान के भरतपुर गांव का मूल निवासी हूं। अपनी दो साल की बच्ची को मैंने उसके नाना-नानी की देखभाल में छोड़ रखा है और पत्नी माता-पिता की सेवा के लिए घर पर रहती है। तीन महीने से छुट्टी न मिलने से माता-पिता परेशान रहते हैं। मोबाइल से बातचीत कर किसी तरह बिटिया को भी समझा लेता हूं। आठ घंटे की कोरोना योद्धा के रूप में डियूटी करने के दौरान मुझे तब खुशी मिलती है,जब मैं किसी की जान बचाने मे कामयाब हो जाता हूं। मैं मान लेता हूँ कि ये भी मेरे परिवार का ही एक सदस्य है। यहीं पर कार्यरत कोरोना योद्धा मुनेंद्र शर्मा जो कि राजस्थान के करौली के रहने वाले है। इनके भाई शीतल शर्मा गुरुग्राम में कोविड 19 में सेवा दे रहे है। इनके पिता हार्ट के मरीज है। मुनेंद्र का कहना है कि पिता के दिल का मरीज होने से उनसे प्रतिदिन मोबाइल से बातचीत कर उन्हें संतुष्ट कर लेता हूं। घर न जा पाने की कसक तो रहती है लेकिन मरीजों की सेवा करके मुझे खुशी का अनुभव होता है।
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डॉक्टर कप्तान
- फोटो : AMAR UJALA
डॉक्टर कप्तान