फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Fatehpur News ›   overbridge,fatehpur news

रेलवे पुल के खंभों की भी कराई जाएगी जांच

Sat, 27 Feb 2021 12:26 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 27 Feb 2021 12:26 AM IST
विज्ञापन
overbridge,fatehpur news
फतेहपुर। दिल्ली हावड़ा रेलवे रूट पर स्पेन की सेंट जोंस कंपनी द्वारा बनवाए गए घटिया रेलवे ओवरब्रिज को आखिरकार तोड़ दिया गया। एनएचएआई अब ओवरब्रिज के पिलरों की गुणवत्ता भी परखेगी। इसके लिए आईआईटी बीएचयू को रिपोर्ट भेजकर पिलरों की जांच की जिम्मेदारी दी गई है। दोबारा ओवरब्रिज बनाने से पहले इन पिलरों को और मजबूती देने की भी तैयारी एनएचएआई कर रहा है।
विज्ञापन

बांदा-टांडा मार्ग को प्रयागराज-कानपुर बाईपास से जोड़ने के लिए एनएचएआई की देखरेख में स्पेन की कंपनी ने 424 करोड़ रुपये की लागत से बाईपास का निर्माण किया था। काम 2012-13 में शुरू हुआ था। जनवरी 2018 में इसे चालू कर दिया गया था। बाईपास निर्माण के दौरान सेंट जोंस कंपनी ने दिल्ली-हावड़ा रेलवे रूट पर ओवरब्रिज का भी निर्माण किया था। लेकिन यह निर्माणकार्य इतना घटिया था कि पुल के पिलर बीम से छह माह में ही अलग हो गए। जून 2018 को पुल पर आवागमन रोक दिया गया।
विज्ञापन

अमर उजाला ने 20 जून 2020 को घटिया निर्माण कार्य का खुलासा करते हुए लगातार खबरें प्रकाशित कीं। इसके बाद एनएचएआई ने टूट चुके ओवरब्रिज की जगह नया पुल बनाने के लिए कागजी कार्रवाई शुरू की। पिछले माह जनवरी में घटिया ओवरब्रिज को तोड़ने का काम भी शुरू कर दिया गया, जो अब पूरा हो गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

अब ओवरब्रिज निर्माण से पहले एनएचएआई पुल के पिलरों की भी जांच कराने जा रही है। संस्था जरूरत के हिसाब से पिलरों को और मजबूत करने पर भी काम शुरू करेगी। पिलरों की गुणवत्ता परखने की जिम्मेदारी आईआईटी बीएचयू को दी गई है।
दिल्ली-हावड़ा रूट के रेलवे ओवरब्रिज को तोड़ने के लिए अधिक क्षमता की तीन क्रेन दिल्ली से लाई गई हैं। इसमें एक 800 टन, दूसरी 650 टन और तीसरी 500 टन क्षमता की हैं। इन क्रेनों से रेलवे रूट के ऊपर के स्ट्रैक्चर को हटाया गया है। इसके लिए रेलवे से 20 दिन के लिए आदेश हुआ था। सीडीएस कंपनी के प्रबंधक रविंदर सिंह ने बताया कि स्ट्रैक्चर को हटा दिया गया है।

इस बार रेलवे पुल के स्ट्रैक्चर को बनाने से पहले पिलर्स और मजबूत किए जाएंगे। जो पिलर्स बने हैं, उनकी क्षमता की जांच कराने के लिए आईआईटी बीएचयू बनारस से कहा गया है। जांच पूरी होने और रेलवे से डिजाइन मिलने के बाद एनएचएआई इसे पास करेगा। इसके बाद पुल निर्माण का काम शुरू होगा। रेलवे पुल बनाने में करीब डेढ़ साल का समय लगेगा।
- आरवी सिंह, जीएम, एनएचएआई, रायबरेली।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed