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टिड्डी दल से किसानों को आगाह करने को जारी किए गए निर्देश
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फतेहपुर। बुंदेलखंड में टिड्डी दल के प्रवेश को लेकर स्थानीय स्तर पर प्रशासन ने भी सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है। जिला उद्यान अधिकारी राम सिंह ने किसानों को आगाह करते हुए कुछ जरूरी उपाय सुझाए हैं।
उन्होंने बताया कि कि राजस्थान से मथुरा, आगरा और झांसी जनपदों में टिड्डी दलों का प्रवेश हो रहा है। जिसका पड़ोसी जनपदों की ओर बढ़ने की आशंका है। ऐसी दशा में सब्जी उत्पादक कृषकों को विशेष सावधान रहना जरूरी है। उन्होंने बताया कि टिड्डी दल का समूह जब भी दिखाई पड़े तो उनको उतरने से रोकने के लिए तत्काल अपने खेत के आसपास मौजूद घास- फूस का उपयोग धुआं करना चाहिए अथवा आग जलानी चाहिए। जिससे
टिड्डी दल आपके खेत में न बैठकर आगे निकल जाए। टिड्डी दल दिखाई देते ही ध्वनि विस्तारक यंत्रों के माध्यम से आवाज करके उनको अपने खेत पर बैठने ना दें। अपने खेतों में पटाखे फोड़ें, ढोल नगाड़े बजाकर आवाज करें, ट्रैक्टर के साइलेंसर को निकाल कर भी तेज ध्वनि कर सकते हैं, कल्टीवेटर या रोटावेटर चलाकर टिड्डी को तथा उनके अंडों को नष्ट किया जा सकता है । इनको उस क्षेत्र से हटाने भगाने के लिए ध्वनि विस्तारक यंत्रों के माध्यम
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से उपयुक्त होता है। प्रकाश प्रपंच लगाकर एकत्रित करके नष्ट कर सकते हैं क्योंकि टिड्डी डरपोक स्वभाव का कीट होता है। तेज आवाज से डरकर आपके फसल व पेड़ पौधों को किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचा पाएगा ।
टिड्डी दल शाम को 6 से 7 बजे के बीच आसपास जमीन पर बैठ जाता है और फिर सुबह 8 से 9 बजे के करीब उड़ान भरता है। इसी अवधि में इन पर ट्रैक्टर चलित स्प्रेयर की मदद से कीटनाशक दवाइयों का छिड़काव करके इनको मारा जा सकता है। रसायन के छिड़काव का सबसे उपयुक्त समय रात 11 से सुबह 8 बजे तक होता है। नियंत्रण के लिए क्लोरोपाईरीफास, ईसी या बेंडियोकार्ब, क्लोरोपाईरीफास या डेल्टामेथरिन, डेल्टामेथरिन, डायफ्लुबेनजेयूरोन का छिड़काव करें। इसके लिए सुबह का समय अधिक उपयुक्त होता है, क्योंकि इस समय पतियों पर ओस पड़ी रहती है। जिसके कारण धूल पत्तियों पर चिपक जाती है।
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उन्होंने बताया कि कि राजस्थान से मथुरा, आगरा और झांसी जनपदों में टिड्डी दलों का प्रवेश हो रहा है। जिसका पड़ोसी जनपदों की ओर बढ़ने की आशंका है। ऐसी दशा में सब्जी उत्पादक कृषकों को विशेष सावधान रहना जरूरी है। उन्होंने बताया कि टिड्डी दल का समूह जब भी दिखाई पड़े तो उनको उतरने से रोकने के लिए तत्काल अपने खेत के आसपास मौजूद घास- फूस का उपयोग धुआं करना चाहिए अथवा आग जलानी चाहिए। जिससे
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टिड्डी दल आपके खेत में न बैठकर आगे निकल जाए। टिड्डी दल दिखाई देते ही ध्वनि विस्तारक यंत्रों के माध्यम से आवाज करके उनको अपने खेत पर बैठने ना दें। अपने खेतों में पटाखे फोड़ें, ढोल नगाड़े बजाकर आवाज करें, ट्रैक्टर के साइलेंसर को निकाल कर भी तेज ध्वनि कर सकते हैं, कल्टीवेटर या रोटावेटर चलाकर टिड्डी को तथा उनके अंडों को नष्ट किया जा सकता है । इनको उस क्षेत्र से हटाने भगाने के लिए ध्वनि विस्तारक यंत्रों के माध्यम
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से उपयुक्त होता है। प्रकाश प्रपंच लगाकर एकत्रित करके नष्ट कर सकते हैं क्योंकि टिड्डी डरपोक स्वभाव का कीट होता है। तेज आवाज से डरकर आपके फसल व पेड़ पौधों को किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचा पाएगा ।
टिड्डी दल शाम को 6 से 7 बजे के बीच आसपास जमीन पर बैठ जाता है और फिर सुबह 8 से 9 बजे के करीब उड़ान भरता है। इसी अवधि में इन पर ट्रैक्टर चलित स्प्रेयर की मदद से कीटनाशक दवाइयों का छिड़काव करके इनको मारा जा सकता है। रसायन के छिड़काव का सबसे उपयुक्त समय रात 11 से सुबह 8 बजे तक होता है। नियंत्रण के लिए क्लोरोपाईरीफास, ईसी या बेंडियोकार्ब, क्लोरोपाईरीफास या डेल्टामेथरिन, डेल्टामेथरिन, डायफ्लुबेनजेयूरोन का छिड़काव करें। इसके लिए सुबह का समय अधिक उपयुक्त होता है, क्योंकि इस समय पतियों पर ओस पड़ी रहती है। जिसके कारण धूल पत्तियों पर चिपक जाती है।