{"_id":"5ecfbc2b8ebc3e90955a7c37","slug":"other-fatehpur-news-knp56241717","type":"story","status":"publish","title_hn":"इतिहास के गुमनाम योद्धाओं को नई पहचान देने की अभिनव पहल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इतिहास के गुमनाम योद्धाओं को नई पहचान देने की अभिनव पहल
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फतेहपुर। स्वतंत्रता संग्राम के गुमनाम योद्धाओं को नई पहचान दिलाने की अभिनव पहल शुरू की गई है। योद्धाओं के इतिहास को अपने ब्लॉग के माध्यम से नए सिरे से संजोने का काम पूर्व वायुसेना अधिकारी अनुपम तिवारी ने किया है। अनुपम खागा कस्बे के नौबस्ता रोड के निवासी हैं। इतिहास से स्नातक और परास्नातक अनुपम सेवानिवृत होने के बाद उन्होंने इतिहास विषय से ही नेट की प्रतियोगी परीक्षा पास की है।
अनुपम ने बताया कि उनका प्रयास है कि प्रथम स्वाधीनता संग्राम के गुमनाम नायकों को पाठकों तक पहुंचाया जाय। स्वतंत्रता सेनानी मौलवी अहमदशाह, अजीमुल्ला, बेगम अवध, चौधरी लियाकत, ठाकुर दरियाव सिंह, सूबेदार बख्त खान, मेरठ के गुमनाम ब्राह्मण, बनारस की पलटन, नवाब बांदा आदि की वीर गाथाएं आज लोगों को न के बराबर पता हैं। प्रयास है कि अपने ब्लॉग के माध्यम से इन सब की कहानियों को कह सकूं। अनुपम ने अब
तक पांच योद्धाओं को ब्लॉग के जरिये नई पहचान दी है। पहली कहानी वीर बलभद्र कुंवर पर आधारित है। जो सन 1815-16 में ईस्ट इंडिया कंपनी के विरुद्ध नेपाली सेना के नायक थे। अंग्रेजों के कब्जे से कई किले बचाए थे। देहरादून के पास नालापानी नामक जगह पर इनका एक स्मारक है। इसी क्रम में मुल्तान (पाकिस्तान) के सिख दीवान मूलराज चोपड़ा की 1848-49 के ऐंग्लो सिख युद्ध में इनकी बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका थी।
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पिंडारियों के इतिहास से चीतू पिण्डारी नाम के एक बहादुर शख्स का किस्सा खंगाला गया है। जो नागपुर के अप्पा साहब भोसले के मातहत था। नागपुर से अपदस्थ किए गए अप्पा साहब दर-दर भटकते हुए रियासतों को अंग्रेजों के खिलाफ एकजुट कर मोर्चा लेते हैं। यह कहानी में बताने की कोशिश की है। इनके अलावा इंदौर के जसवंत राव होलकर, कुर्ग की रानी देवम्मा और 1806 की वेल्लोर म्युटिनी पर छोटे लेख प्रकाशित होने हैं।
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अनुपम ने बताया कि उनका प्रयास है कि प्रथम स्वाधीनता संग्राम के गुमनाम नायकों को पाठकों तक पहुंचाया जाय। स्वतंत्रता सेनानी मौलवी अहमदशाह, अजीमुल्ला, बेगम अवध, चौधरी लियाकत, ठाकुर दरियाव सिंह, सूबेदार बख्त खान, मेरठ के गुमनाम ब्राह्मण, बनारस की पलटन, नवाब बांदा आदि की वीर गाथाएं आज लोगों को न के बराबर पता हैं। प्रयास है कि अपने ब्लॉग के माध्यम से इन सब की कहानियों को कह सकूं। अनुपम ने अब
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तक पांच योद्धाओं को ब्लॉग के जरिये नई पहचान दी है। पहली कहानी वीर बलभद्र कुंवर पर आधारित है। जो सन 1815-16 में ईस्ट इंडिया कंपनी के विरुद्ध नेपाली सेना के नायक थे। अंग्रेजों के कब्जे से कई किले बचाए थे। देहरादून के पास नालापानी नामक जगह पर इनका एक स्मारक है। इसी क्रम में मुल्तान (पाकिस्तान) के सिख दीवान मूलराज चोपड़ा की 1848-49 के ऐंग्लो सिख युद्ध में इनकी बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका थी।
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पिंडारियों के इतिहास से चीतू पिण्डारी नाम के एक बहादुर शख्स का किस्सा खंगाला गया है। जो नागपुर के अप्पा साहब भोसले के मातहत था। नागपुर से अपदस्थ किए गए अप्पा साहब दर-दर भटकते हुए रियासतों को अंग्रेजों के खिलाफ एकजुट कर मोर्चा लेते हैं। यह कहानी में बताने की कोशिश की है। इनके अलावा इंदौर के जसवंत राव होलकर, कुर्ग की रानी देवम्मा और 1806 की वेल्लोर म्युटिनी पर छोटे लेख प्रकाशित होने हैं।