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बेसिक शिक्षा का 29 लाख हजम कर गया बिजली विभाग
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फतेहपुर। बेसिक शिक्षा विभाग की 28 लाख 99 हजार 600 रुपये की धनराशि बिजली विभाग हजम कर गया है। 1545 स्कूलों में बिजली कनेक्शन के लिए जमा की गई एस्टीमेट धनराशि से सिर्फ 227 स्कूलों में ही कनेक्शन जोड़े गए हैं। शेष धनराशि का बिजली विभाग हिसाब किताब देने को तैयार नहीं है।
बेसिक शिक्षा विभाग ने 2008 से लेकर 2013 के मध्य जिले के 1545 परिषदीय स्कूलों को बिजली आपूर्ति की सुविधा मुहैया कराने के लिए चार करोड़ 31 लाख 48 हजार 45 रुपये की धनराशि खर्च की थी। इसमें प्रत्येक स्कूल में 26 हजार 988 रुपये खर्च करने का प्रावधान था। इस बजट से 2200 रुपये प्रत्येक स्कूल में कनेक्शन देने के लिए बिजली विभाग के खाते में एस्टीमेट धनराशि जमा की गई है। इस तरह से बिजली विभाग को कनेक्शन जोडने के लिए एस्टीमेट धनराशि के रूप में कुल 33 लाख 99 हजार रुपये दिए गए। इसमें बिजली विभाग ने सिर्फ 227 स्कूलों में कनेक्शन आवंटित किए। आवंटित कनेक्शन वाले स्कूलों की एस्टीमेट धनराशि कम कर दें तो भी 1318 स्कूलों की एस्टीमेट धनराशि 28 लाख 99 हजार 600 रुपये बिजली विभाग पर बकाया है।
बिजली आपूर्ति की सुविधा मुहैया कराने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने सभी 1545 परिषदीय स्कूलों में प्रति स्कूल 26988 रुपये खर्च किया था। इस धनराशि से 1788 रुपये से स्कूल भवन में वायरिंग कराई जानी थी और 7500 रुपये से पंखे, ट्यूब लाइट आदि की खरीद होनी थी। स्कूलों में न तो वायरिंग हुई और न ही पंखे आदि खरीदे गए। जबकि स्कूलों में भेजी गई करोड़ों की धनराशि खातों से गायब हो चुकी है।
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बीएसए शिवेंद्र प्रताप सिंह को सात साल पहले बिजली विभाग को भेजे गए इस बजट की जानकारी नहीं है। बताया कि अगले कार्य दिवस से पत्रावली की खोज कराई जाएगी। इसके बाद बिजली विभाग के उच्चाधिकारियों से मामले में वार्ता करेंगे।
बिजली विभाग के अधीक्षण अभियंता आनंद प्रकाश शुक्ला भी इस मामले से अपने को अनभिज्ञ बता रहे हैं। उनका कहना है कि मामला पुराना है। बेसिक शिक्षा विभाग के संबंधित अभिलेख प्रस्तुत करने पर ही मामले को देखा जा सकता है।
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बेसिक शिक्षा विभाग ने 2008 से लेकर 2013 के मध्य जिले के 1545 परिषदीय स्कूलों को बिजली आपूर्ति की सुविधा मुहैया कराने के लिए चार करोड़ 31 लाख 48 हजार 45 रुपये की धनराशि खर्च की थी। इसमें प्रत्येक स्कूल में 26 हजार 988 रुपये खर्च करने का प्रावधान था। इस बजट से 2200 रुपये प्रत्येक स्कूल में कनेक्शन देने के लिए बिजली विभाग के खाते में एस्टीमेट धनराशि जमा की गई है। इस तरह से बिजली विभाग को कनेक्शन जोडने के लिए एस्टीमेट धनराशि के रूप में कुल 33 लाख 99 हजार रुपये दिए गए। इसमें बिजली विभाग ने सिर्फ 227 स्कूलों में कनेक्शन आवंटित किए। आवंटित कनेक्शन वाले स्कूलों की एस्टीमेट धनराशि कम कर दें तो भी 1318 स्कूलों की एस्टीमेट धनराशि 28 लाख 99 हजार 600 रुपये बिजली विभाग पर बकाया है।
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बिजली आपूर्ति की सुविधा मुहैया कराने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने सभी 1545 परिषदीय स्कूलों में प्रति स्कूल 26988 रुपये खर्च किया था। इस धनराशि से 1788 रुपये से स्कूल भवन में वायरिंग कराई जानी थी और 7500 रुपये से पंखे, ट्यूब लाइट आदि की खरीद होनी थी। स्कूलों में न तो वायरिंग हुई और न ही पंखे आदि खरीदे गए। जबकि स्कूलों में भेजी गई करोड़ों की धनराशि खातों से गायब हो चुकी है।
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बीएसए शिवेंद्र प्रताप सिंह को सात साल पहले बिजली विभाग को भेजे गए इस बजट की जानकारी नहीं है। बताया कि अगले कार्य दिवस से पत्रावली की खोज कराई जाएगी। इसके बाद बिजली विभाग के उच्चाधिकारियों से मामले में वार्ता करेंगे।
बिजली विभाग के अधीक्षण अभियंता आनंद प्रकाश शुक्ला भी इस मामले से अपने को अनभिज्ञ बता रहे हैं। उनका कहना है कि मामला पुराना है। बेसिक शिक्षा विभाग के संबंधित अभिलेख प्रस्तुत करने पर ही मामले को देखा जा सकता है।