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जिले में एक भी गैस किट वाहन रजिस्टर्ड नहीं
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॥न्नाव जिले में गैस किट लगे वाहन में आग लग जाने से हुई सात मौतों ने ऐसे वाहनों में सफर को लेकर सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां जिले में भी आधा सैकड़ा से अधिक वाहनों में घरेलू गैस सिलिंडर की किट का इस्तेमाल हो रहा है। एहतियात के तौर पर भी कभी जिले के अधिकारी धरपकड़ करते नहीं दिखते। कहीं हादसा होने पर दो दिन चेतावनी दी जाती है, इसके बाद फिर मामला जस का तस हो जाता है।
मलवां के सौंरा हाईवे पर दो साल पहले साल पहले गैस सिलिंडर लगी वैन में आग लगी थी। उस समय वैन में सिर्फ चालक था। उसने कूदकर किसी तरह से जान बचाई थी। विभागों की अनदेखी के चलते धीरे-धीरे कई नए पुराने वाहनों में गैस किट सिलिंडर लगे हैं। इनमें गैस रिफलिंग एक मशीन लगाकर की जाती है। कई चिन्हित स्थानों पर खुलेआम गैस रिफलिंग होती है। बाकायदा इसका कारोबार सुविधा शुल्क पर चल रहा है। अधिकांश वैन में किट का इस्तेमाल हो रहा है। ऐसे वाहन डग्गामारी और स्कूलों में भी लगे हैं। स्कूली वाहनों में ऐसे वाहनों का संचालन बेहद जोखिम भरा है। मलवां थाना क्षेत्र के कस्बे में रविवार को वैन में गैस सिलिंडर से रिफलिंग करते एक वैन को देखा गया। कुछ देर बाद दूसरी वैन मौके पर पहुंची। दूसरी वैन में घरेलू सिलिंडर से गैस रिफलिंग की गई। जिले में एलपीजी का कोई पंप नहीं है। सीएनजी का एक पंप हाल ही में बना है लेकिन आरटीओ प्रयागराज की ओर से अभी स्वीकृत नहीं हो सका है। इसी वजह से जिले में एलपीजी और सीएनएजी किट का वाहन एआरटीओ विभाग रजिस्टर्ड नहीं कर रहा है। कंपनी की ओर से फिट किट के वाहन का रजिस्ट्रेशन हो जाता है लेकिन स्थानीय पंप न होने के कारण उपयोग में लाने की अनुमति नहीं है।
गैस किट वाहन हाल के दिनों में जांच के दौरान नहीं पकड़े गए हैं। गैस रिफलिंग का मामला जिला पूर्ति विभाग का है। गैस किट वाहन पकड़े जाने पर पांच हजार का जुर्माना और सीज करने की कार्रवाई की जाती है। उनके कार्यालय से गैस किट वाहन रजिस्टर्ड नहीं है। कानपुर नंबर की आने वाले वाहनों के गैस किट होगी।
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अरविंद त्रिवेदी -एआरटीओ प्रशासन
वाहनों की चेकिंग एआरटीओ विभाग को करनी चाहिए। घरेलू सिलिंडर सब्सिडी और बिना सब्सिडी के दिए जाते हैं। अगर बिना सब्सिडी का इस्तेेमाल हो रहा है तो पूर्ति विभाग लेना देना नहीं है। सब्सिडी का सिलिंडर इस्तेमाल होने की सूचना पर पूर्ति विभाग कार्रवाई करेगा। यातायात नियमों के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए।
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मलवां के सौंरा हाईवे पर दो साल पहले साल पहले गैस सिलिंडर लगी वैन में आग लगी थी। उस समय वैन में सिर्फ चालक था। उसने कूदकर किसी तरह से जान बचाई थी। विभागों की अनदेखी के चलते धीरे-धीरे कई नए पुराने वाहनों में गैस किट सिलिंडर लगे हैं। इनमें गैस रिफलिंग एक मशीन लगाकर की जाती है। कई चिन्हित स्थानों पर खुलेआम गैस रिफलिंग होती है। बाकायदा इसका कारोबार सुविधा शुल्क पर चल रहा है। अधिकांश वैन में किट का इस्तेमाल हो रहा है। ऐसे वाहन डग्गामारी और स्कूलों में भी लगे हैं। स्कूली वाहनों में ऐसे वाहनों का संचालन बेहद जोखिम भरा है। मलवां थाना क्षेत्र के कस्बे में रविवार को वैन में गैस सिलिंडर से रिफलिंग करते एक वैन को देखा गया। कुछ देर बाद दूसरी वैन मौके पर पहुंची। दूसरी वैन में घरेलू सिलिंडर से गैस रिफलिंग की गई। जिले में एलपीजी का कोई पंप नहीं है। सीएनजी का एक पंप हाल ही में बना है लेकिन आरटीओ प्रयागराज की ओर से अभी स्वीकृत नहीं हो सका है। इसी वजह से जिले में एलपीजी और सीएनएजी किट का वाहन एआरटीओ विभाग रजिस्टर्ड नहीं कर रहा है। कंपनी की ओर से फिट किट के वाहन का रजिस्ट्रेशन हो जाता है लेकिन स्थानीय पंप न होने के कारण उपयोग में लाने की अनुमति नहीं है।
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गैस किट वाहन हाल के दिनों में जांच के दौरान नहीं पकड़े गए हैं। गैस रिफलिंग का मामला जिला पूर्ति विभाग का है। गैस किट वाहन पकड़े जाने पर पांच हजार का जुर्माना और सीज करने की कार्रवाई की जाती है। उनके कार्यालय से गैस किट वाहन रजिस्टर्ड नहीं है। कानपुर नंबर की आने वाले वाहनों के गैस किट होगी।
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अरविंद त्रिवेदी -एआरटीओ प्रशासन
वाहनों की चेकिंग एआरटीओ विभाग को करनी चाहिए। घरेलू सिलिंडर सब्सिडी और बिना सब्सिडी के दिए जाते हैं। अगर बिना सब्सिडी का इस्तेेमाल हो रहा है तो पूर्ति विभाग लेना देना नहीं है। सब्सिडी का सिलिंडर इस्तेमाल होने की सूचना पर पूर्ति विभाग कार्रवाई करेगा। यातायात नियमों के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए।
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