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सत्यापन न होने से किसान नहीं बेच पा रहे धान

Fri, 29 Nov 2019 12:54 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 29 Nov 2019 12:54 AM IST
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फतेहपुर। सत्यापन के चक्कर में जिले के करीब साढ़े तीन हजार किसान अपनी उपज का धान नहीं बेच पा रहे हैं। वह समर्थन मूल्य पर बेचना चाहते हैं, उनका धान ठीक भी है लेकिन प्रशासन ने अटका रखा है। उनके दस्तावेजों का सत्यापन वह अब तक नहीं कर पाई है। प्रशासन लेखपालों के कार्य बहिष्कार को इसकी वजह बताकर अपना पल्ला झाड़ रहा है। बेचारे किसान परेशान हैं। दरअसल सौ कुंतल से अधिक धान की पैदावार होने या किसानों का रकबा बड़ा होने पर तहसील से सत्यापन कराने की शर्त रख दी गई है।
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खागा, बिंदकी और फतेहपुर तहसीलों के आंकड़े देखें तो पता चलता है कि धान खरीद के लिए खतौनियों का तहसील से सत्यापन कराने के लिए कुल 27,596 किसानों ने अपना पंजीकरण कराया हुआ है। जिनमें से अभी तक साढ़े तीन हजार किसानों के सत्यापन नहीं हो पाए हैं। इसके पीछे प्रशासन लेखपालों के कार्य बहिष्कार को वजह बताकर अपना पल्ला झाड़ रहा है। लेखपालों ने जिन अतिरिक्त प्रभार वाले गांवों का चार्ज छोड़ रखा है। वहां
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के किसानों की फसलों के सत्यापन तो एकदम बंद हैं। किसान लगातार अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं। आलम यह है कि ज्यादातर किसानों को अभी सत्यापन के बारे में पता ही नहीं है। किसान जब खरीद केंद्र पहुंच जाते हैं तब पता चलता है कि उन्हें अभी सत्यापन के लिए तहसील के चक्कर काटने हैं। किसान इस व्यवस्था से आजिज आ चुके हैं। मगर नियम कायदे के चक्कर में उनके धान की बिकवाली नहीं हो पा रही है।
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