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Fatehpur News: किसान दुर्घटना बीमा के तहत परिजन को 6.90 लाख देने का आदेश
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फतेहपुर। किसान के परिजन को किसान दुर्घटना बीमा के तहत पांच लाख रुपये मुआवजा, छह फीसदी वार्षिक ब्याज संग 1.80 लाख रुपये ब्याज की राशि और परिवाद व्यय के रूप में 10 हजार रुपये देने का आदेश कोर्ट ने बीमा कंपनी को दिया है। उपभोक्ता फोरम ने यह फैसला छह साल बाद सुनाया है।
हसवा विकास खंड के हासिमपुर भेदपुर गांव निवासी दयाराम पाल ने उपभोक्ता फोरम में 20 सितंबर 2019 को वाद दाखिल किया था। उन्होंने बताया कि उनके पिता सियंबर उर्फ गुंडा पाल खेती करते थे। वह किसान सड़क दुर्घटना बीमा योजना के तहत पंजीकृत थे।
एक सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल होने के बाद इलाज के दौरान 18 अक्तूबर 2018 को कानपुर के एक अस्पताल में उनकी मृत्यु हो गई थी। कानपुर में पोस्टमार्टम के बाद थरियांव थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।
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दयाराम ने बताया कि बीमा क्लेम के लिए दस्तावेज तैयार कराने के दौरान अफसरों ने परिवार रजिस्टर में संशोधन के लिए रुपये मांगे थे। रुपये न देने पर पिता की उम्र 68 के स्थान पर 83 वर्ष लिख दी गई। इस आधार पर बीमा कंपनी ने यह कहते हुए क्लेम निरस्त कर दिया कि योजना की पात्रता सीमा 70 वर्ष तक है।
न्याय न मिलने पर दयाराम ने उपभोक्ता फोरम की शरण ली। साक्ष्यों और दस्तावेजों की जांच के बाद फोरम ने बीमा कंपनी को आदेश दिया कि वह वादी को कुल 6.90 लाख रुपये जिसमें मुआवजा, ब्याज और परिवाद व्यय शामिल है दो माह के भीतर अदा करे।
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हसवा विकास खंड के हासिमपुर भेदपुर गांव निवासी दयाराम पाल ने उपभोक्ता फोरम में 20 सितंबर 2019 को वाद दाखिल किया था। उन्होंने बताया कि उनके पिता सियंबर उर्फ गुंडा पाल खेती करते थे। वह किसान सड़क दुर्घटना बीमा योजना के तहत पंजीकृत थे।
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एक सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल होने के बाद इलाज के दौरान 18 अक्तूबर 2018 को कानपुर के एक अस्पताल में उनकी मृत्यु हो गई थी। कानपुर में पोस्टमार्टम के बाद थरियांव थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।
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दयाराम ने बताया कि बीमा क्लेम के लिए दस्तावेज तैयार कराने के दौरान अफसरों ने परिवार रजिस्टर में संशोधन के लिए रुपये मांगे थे। रुपये न देने पर पिता की उम्र 68 के स्थान पर 83 वर्ष लिख दी गई। इस आधार पर बीमा कंपनी ने यह कहते हुए क्लेम निरस्त कर दिया कि योजना की पात्रता सीमा 70 वर्ष तक है।
न्याय न मिलने पर दयाराम ने उपभोक्ता फोरम की शरण ली। साक्ष्यों और दस्तावेजों की जांच के बाद फोरम ने बीमा कंपनी को आदेश दिया कि वह वादी को कुल 6.90 लाख रुपये जिसमें मुआवजा, ब्याज और परिवाद व्यय शामिल है दो माह के भीतर अदा करे।