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लापरवाही से ध्वस्त हो गई सर्विस लेन
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ओवरब्रिज के ऊपर से निकली हाईटेंशन लाइन।
- फोटो : FATEHPUR
फतेहपुर। 424 करोड़ रुपये से बने बांदा-टांडा बाईपास के निर्माण में एनएचएआई की लापरवाही परत दर परत सामने आ रही है। जोनिहा मार्ग के ओवरब्रिज के ऊपर से निकली पावर ग्रिड की लाइन को बिना शिफ्ट कराए ही वाहनों का आवागमन शुरू करा दिया गया। आवागमन सर्विस लेन से कराया गया। इससे पांच महीने में एक किमी सर्विस लेन का कचूमर निकल गया।
बांदा-टांडा मार्ग का स्पेन की सेंट जोंस कंपनी ने निर्माण कराया है। बाईपास पर जखनी गांव के पास जोनिहा मार्ग पर एनएचएआई ने ओवरब्रिज का निर्माण कराया है। यहां पर पनकी पावर ग्रिड की हाईटेंशन लाइन निकली है। ओवरब्रिज और हाईटेंशन लाइन के बीच की दूरी बहुत कम बची है। इसे शिफ्ट कराने के लिए एनएचएआई ने पॉवर ग्रिड में एस्टीमेट के अनुसार धनराशि भी जमा करा दी। लाइन को शिफ्ट कराने की जरूरत नहीं समझी। वाहनों के संचालन में करंट का खतरा न हो, इसके लिए एनएचएआई के अधिकारियों ने वाहनों का संचालन सर्विस लेन से कराया।
अधिकारियों ने इतने बड़े प्रोजेक्ट की निगरानी भी ईमानदारी से नहीं की। यही वजह रही है कि सर्विस लेन पांच महीने में ध्वस्त हो गई। स्पेन की सेंट जोंस कंपनी ने बाईपास के निर्माण में खूब गड़बड़ी की। दिल्ली-हावड़ा के रेलवे रूट पर बना ओवरब्रिज शुरू होने के पांच माह के भीतर क्षतिग्रस्त हो गया। सड़क के निर्माण में भी लापरवाही बरती गई। सर्विस लेन निर्माण के साथ पिचिंग का काम नहीं कराया गया। दरअसल सड़क को बारिश में बहने से रोकने के लिए दोनों छोर पर पत्थर या सीमेंट और कंक्रीट से बनी पटिया बिछाई जाती हैं। इनके बिछे होने से हाईवे का पानी सर्विस लेन में नहीं भर पाता। यहां ऐसा नहीं किया गया। पत्थर या फिर पटिया बिछाने की जगह मिट्टी डाल कर छोड़ दी गई। इस वजह से सर्विस लेन पूरी तरह से ध्वस्त हो गई।
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ओवरब्रिज के ऊपर से निकली हाईटेंशन लाइन को शिफ्ट कराने की धनराशि पावर ग्रिड में जमा है। यह हमारे कार्यकाल से पहले का मामला है। इसका पता लगाया जाएगा। पावर ग्रिड के अधिकारियों से मिलकर हाईटेंशन लाइन को हटवाने का काम किया जाएगा।
- नितिन चौधरी, परियोजना निदेशक, एनएचएआई, रायबरेली
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बांदा-टांडा मार्ग का स्पेन की सेंट जोंस कंपनी ने निर्माण कराया है। बाईपास पर जखनी गांव के पास जोनिहा मार्ग पर एनएचएआई ने ओवरब्रिज का निर्माण कराया है। यहां पर पनकी पावर ग्रिड की हाईटेंशन लाइन निकली है। ओवरब्रिज और हाईटेंशन लाइन के बीच की दूरी बहुत कम बची है। इसे शिफ्ट कराने के लिए एनएचएआई ने पॉवर ग्रिड में एस्टीमेट के अनुसार धनराशि भी जमा करा दी। लाइन को शिफ्ट कराने की जरूरत नहीं समझी। वाहनों के संचालन में करंट का खतरा न हो, इसके लिए एनएचएआई के अधिकारियों ने वाहनों का संचालन सर्विस लेन से कराया।
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अधिकारियों ने इतने बड़े प्रोजेक्ट की निगरानी भी ईमानदारी से नहीं की। यही वजह रही है कि सर्विस लेन पांच महीने में ध्वस्त हो गई। स्पेन की सेंट जोंस कंपनी ने बाईपास के निर्माण में खूब गड़बड़ी की। दिल्ली-हावड़ा के रेलवे रूट पर बना ओवरब्रिज शुरू होने के पांच माह के भीतर क्षतिग्रस्त हो गया। सड़क के निर्माण में भी लापरवाही बरती गई। सर्विस लेन निर्माण के साथ पिचिंग का काम नहीं कराया गया। दरअसल सड़क को बारिश में बहने से रोकने के लिए दोनों छोर पर पत्थर या सीमेंट और कंक्रीट से बनी पटिया बिछाई जाती हैं। इनके बिछे होने से हाईवे का पानी सर्विस लेन में नहीं भर पाता। यहां ऐसा नहीं किया गया। पत्थर या फिर पटिया बिछाने की जगह मिट्टी डाल कर छोड़ दी गई। इस वजह से सर्विस लेन पूरी तरह से ध्वस्त हो गई।
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ओवरब्रिज के ऊपर से निकली हाईटेंशन लाइन को शिफ्ट कराने की धनराशि पावर ग्रिड में जमा है। यह हमारे कार्यकाल से पहले का मामला है। इसका पता लगाया जाएगा। पावर ग्रिड के अधिकारियों से मिलकर हाईटेंशन लाइन को हटवाने का काम किया जाएगा।
- नितिन चौधरी, परियोजना निदेशक, एनएचएआई, रायबरेली