अमर उजाला फाउंडेशन के स्वैच्छिक रक्तदान शिविर ने दिखाई जिंदगी को रोशनी
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विश्व रक्तदाता दिवस पर अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से जिला अस्पताल में आयोजित स्वैच्छिक रक्तदान शिविर में रविवार को 14 लोगों ने रक्तदान किया। सदर अस्पताल की ब्लड बैंक यूनिट में लगे शिविर का उद्घाटन सीएमओ डॉ. विनय कुमार पांडेय ने किया। उन्होंने अमर उजाला फाउंडेशन की जारी मुहिम को सामाजिक सरोकार की बड़ी कड़ी से जोड़ते हुए धन्यवाद जताया। कहा कि अमर उजाला फाउंडेशन के ब्लड कैंप आयोजित होने के बाद जिले के इकलौते सरकारी ब्लड बैंक में कायम रहने वाली खून की कमी पर एक तरह से विराम लग गया है। उन्हें खुशी है कि जरूरत पड़ने पर खास दिवसों के अलावा भी अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से ऐसे कैंप आयोजित किए जाते हैं।
कार्यवाहक सीएमएस डॉ. वीएन पाठक ने अमर उजाला फाउंडेशन के महा अभियान को जीवनदाता करार दिया। उन्होंने कहा कि फाउंडेशन ने जो मुहिम छेड़ रखी है और लोग इससे लगातार जुड़ते जा रहे हैं। उससे समाज में पैदा हो रही जागरूकता का पता चलता है। वह चाहते हैं कि ऐसी ही मुहिम और बैनर चलाए ताकि किसी का खून के अभाव में दम न निकलने पाए। सदर सर्किल की डीएसपी वंदना सिंह ने कहा कि सरकारी रक्तकोष में खून की उपलब्धता कराने के कार्य में लगे अमर उजाला फाउंडेशन की जितनी तारीफ की जाए, वह कम है। सदर अस्पताल के अलावा फाउंडेशन के इस सामाजिक सरोकार से जिला महिला अस्पताल आने वाली एनीमिक महिलाओं की जान बच रही है। इस मौके पर ब्लड बैंक के प्रभारी डॉ. शिव कुमार, फिजीशियन डॉ. आरएन गुप्ता, डॉ. अनुपम कुमार, जिला उद्योग व्यापार मंडल जिलाध्यक्ष किशन मेहरोत्रा आदि मौजूद रहे।
अमर उजाला फाउंडेशन के महाअभियान से अब तक न जाने कितनी जिंदगी, मौत से जंग जीतने में कामयाब रही हैं। एक ऐसी ही जंग एक नर्सिंगहोम में लड़ रही महिला के लिए फाउंडेशन का रक्तदान शिविर संजीवनी साबित हुआ। खून की कमी से इलाज में आ रही अड़चनों की जानकारी पर अमर उजाला फाउंडेशन आगे आया तो महिला के परिवारीजनों के चेहरों से खुशी के आंसू बह निकले।
बांदा के बिसंडी गांव के सुनील सिंह की पत्नी रीता देवी का कई दिन से स्मिता नर्सिंगहोम में इलाज चल रहा है। खून की कमी होने पर तीमारदारों से शनिवार को ओ पाजीटिव ग्रुप की दो यूनिट का इंतजाम करने को कहा गया था। इसमें से एक यूनिट ब्लड शनिवार को एक परिजन के आगे आने पर उपलब्ध हो गया। जबकि एक यूनिट की व्यवस्था नहीं हो सकी। ऐसे में मायूस इस महिला के परिवारीजन 14 जून को अमर उजाला फाउंडेशन के लगने वाले रक्तदान शिविर पहुंचे। परिजनों ने बताया कि डॉक्टर ने जल्द से जल्द एक यूनिट खून की मांग की। उसके पास खून खरीदने का पैसा नहीं बचा। अमर उजाला फाउंडेशन ने जिंदगी और मौत के बीच झूल रही उक्त महिला के लिए तत्काल संबंधित ग्रुप का खून की उपलब्ध कराया। रक्त लेकर नर्सिंगहोम पहुंचे तीमारदारों को देख करके परिवार की निराश व हताश महिलाओं की आंखों से उम्मीद के आंसू छलक पड़े। महिलाओं ने कहा कि अमर उजाला ने रीता को जीवन देने का काम किया है। वह इस उपकार को ताजिंदगी याद रखेंगी।
अमर उजाला फाउंडेशन के रक्तदान शिविर में हिस्सा लेने आए कई लोग जांच में ब्लड प्रेशर समेत अन्य शारीरिक दिक्कतों के चलते रक्तदान नहीं कर पाए। ऐसे लोेगों की संख्या दर्जन भर का आंकड़ा पार थी दूसरों को जीवनदाता बनते देख करके यह मायूस नजर आए। जिन्हेें आगे के लिए तैयार रहने का दिलासा दिया गया।