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Fatehpur News: दिन में गर्मी, रात में ठंडक बनी मुसीबत... ओपीडी 1610 पहुंची
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फोटो-15-जिला अस्पताल की ओपीडी में मरीजों का इलाज करते डॉक्टर तापस त्रिपाठी। संवाद
फतेहपुर। जिल में दिन में 30 डिग्री तापमान और रात में 20 डिग्री तक पारा रहने से मौसम का बदलता मिजाज लोगों की सेहत पर भारी पड़ने लगा है। दिन में गर्मी और रात में ठंडक के बीच तापमान में 10 डिग्री का अंतर लोगों को बीमार कर रहा है।
सर्दी-जुकाम, खांसी और वायरल बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। जिला अस्पताल में सोमवार को ओपीडी बढ़कर 1610 पहुंच गई, जबकि 10 दिन पहले तक रोजाना 1300 से 1400 मरीज उपचार के लिए आ रहे थे। चिकित्सकों ने बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।
जिला अस्पताल में इन दिनों वायरल बुखार, खांसी, जुकाम और संक्रमण संबंधी शिकायतों के मरीज अधिक पहुंच रहे हैं। फिजीशियन डॉ. तापस त्रिपाठी ने बताया कि मौसम में बदलाव के दौरान संक्रमण से बचाव के लिए खांसते और छींकते समय मुंह-नाक ढकें।
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साबुन से हाथ धोएं और भीड़भाड़ वाली जगहों पर सतर्कता बरतें। पौष्टिक भोजन, पर्याप्त पानी और पूरी नींद का ध्यान रखें। बिना चिकित्सकीय सलाह के दवाएं, खासकर एंटीबायोटिक लेने से बचें। उन्होंने बताया कि सड़क किनारे खुले में बिकने वाले चाट, बताशे, मोमोज, बर्गर और चाउमीन जैसे खाद्य पदार्थों के सेवन में भी सावधानी बरतनी चाहिए।
लंबे समय तक खुले में रखे रहने से इन पर धूल और मक्खियां बैठ सकती हैं, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी या तबीयत लगातार बिगड़ने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें। बच्चों और बुजुर्गों में बीमारी के लक्षण दिखने पर विशेष सतर्कता बरतना जरूरी है।
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सर्दी-जुकाम, खांसी और वायरल बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। जिला अस्पताल में सोमवार को ओपीडी बढ़कर 1610 पहुंच गई, जबकि 10 दिन पहले तक रोजाना 1300 से 1400 मरीज उपचार के लिए आ रहे थे। चिकित्सकों ने बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।
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जिला अस्पताल में इन दिनों वायरल बुखार, खांसी, जुकाम और संक्रमण संबंधी शिकायतों के मरीज अधिक पहुंच रहे हैं। फिजीशियन डॉ. तापस त्रिपाठी ने बताया कि मौसम में बदलाव के दौरान संक्रमण से बचाव के लिए खांसते और छींकते समय मुंह-नाक ढकें।
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साबुन से हाथ धोएं और भीड़भाड़ वाली जगहों पर सतर्कता बरतें। पौष्टिक भोजन, पर्याप्त पानी और पूरी नींद का ध्यान रखें। बिना चिकित्सकीय सलाह के दवाएं, खासकर एंटीबायोटिक लेने से बचें। उन्होंने बताया कि सड़क किनारे खुले में बिकने वाले चाट, बताशे, मोमोज, बर्गर और चाउमीन जैसे खाद्य पदार्थों के सेवन में भी सावधानी बरतनी चाहिए।
लंबे समय तक खुले में रखे रहने से इन पर धूल और मक्खियां बैठ सकती हैं, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी या तबीयत लगातार बिगड़ने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें। बच्चों और बुजुर्गों में बीमारी के लक्षण दिखने पर विशेष सतर्कता बरतना जरूरी है।

फोटो-15-जिला अस्पताल की ओपीडी में मरीजों का इलाज करते डॉक्टर तापस त्रिपाठी। संवाद