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रात में बैठी हाईकोर्ट की बेंच, डीएम-एसपी समेत 8 से मांगा जवाब
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पत्थर कटा में ढहाया गया विवादित मैरिज हाल
- फोटो : FATEHPUR
फतेहपुर। सिविल लाइन की विवादित बेशकीमती जमीन का मामला अब हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। भारी फोर्स के साथ पूर्व सांसद को विवादित जमीन पर कब्जा दिलाने के खिलाफ पूर्व राज्यमंत्री अयोध्या प्रसाद पाल के तीन बेटों और पत्नी की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। इस याचिका की सुनवाई के लिए हाईकोर्ट की बेंच रात 9.45 बजे बैठी और सुनवाई की। कोर्ट ने इस मामले में डीएम और एसपी समेत आठ लोगों को नोटिस जारी किया है और 20 जुलाई तक अपना पक्ष रखने के लिए कहा है। उधर, देर रात तक पूर्व सांसद को जमीन पर कब्जा दिलाने की प्रक्रिया चलती रही।
सिविल लाइन में पूर्व मंत्री अयोध्या पाल का मैरिज हाल और आवास है। मैरिज हाल के पीछे खाली पड़ी जमीन को लेकर इनका पूर्व सांसद डा. अशोक पटेल से काफी सालों से विवाद चल रहा है। इस जमीन को लेकर कुछ दिनों पूर्व दोनों पक्षों के बीच विवाद भी हुआ था। इसके बाद जिलाधिकारी संजीव सिंह दोनों पक्षों को जमीन से जुड़े दस्तावेज दिखाने के लिए बुलाया था। डीएम के मुताबिक, पूर्व राज्यमंत्री अयोध्या प्रसाद पाल को विवाद जमीन से संबंधित दस्तावेज दिखाने के लिए कई बार बुलाया गया था, लेकिन वह उपस्थित नहीं हुए।
एसडीएम को दोनों पक्षों को सुनने के लिए लगाया गया था। पूर्व राज्यमंत्री अयोध्या प्रसाद पाल कानूनी रूप से अपना पक्ष अथवा कोई आदेश नहीं दिखा सके। इसके बाद पूर्व सांसद को कब्जा दिलाने की कार्रवाई की गई। उधर, डीएम के आदेश पर बुधवार को प्रशासन ने कब्जा दिला दिया। पुराना मॉडल शॉप समेत कई दुकानों पर रात करीब 10 बजे जेसीबी चली। बड़ी संख्या में मजदूर लगाकर दीवार बनाई गई। पुलिस शांति व्यवस्था बनाए रखने के मकसद से पूरी रात मौजूद रही।
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प्रकरण में पूर्व मंत्री की पत्नी शिवकली और बेटे अजय कुमार, ओम दत्त, संजय पाल की ओर से बहू सोनल ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की, जिसकी सुनवाई के लिए दो जज की बेंच रात 9.45 बजे बैठी। कोर्ट ने सुनवाई चालू की। हाईकोर्ट ने निर्माण ढहाए जाने को लेकर डीएम, एसपी, सीओ सिटी, एसडीएम, कोतवाल, नगर पालिका, पूर्व सांसद डा. अशोक पटेल व उनकी पत्नी से मामले में जवाब मांगा है। 20 जुलाई की सुनवाई की तारीख कोर्ट ने तय की है। पुलिस ने अयोध्या प्रसाद के तीनों बेटों और दूसरे पक्ष के दो लोगों समेत कुल पांच लोगों के खिलाफ शांतिभंग की कार्रवाई की है।
‘प्रशासन ने हाईकोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया’ : फतेहपुर। सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता और हाईकोर्ट में पूर्व राज्यमंत्री अयोध्या पाल की ओर से याचिका दाखिल करने वाली सोनल शुक्ला ने बताया कि कोरोना संक्रमण को देखते हुए हाईकोर्ट ने 10 जुलाई तक किसी भी निर्माण को गिराने और कब्जा दिलाने पर रोक लगा रखी है। कोरोना काल के कारण कोर्ट के नियमित न चल पाने के कारण यह आदेश जारी किए गए थे, लेकिन फतेहपुर के जिला प्रशासन की ओर से इस आदेश का भी पालन नहीं किया गया।
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सिविल लाइन में पूर्व मंत्री अयोध्या पाल का मैरिज हाल और आवास है। मैरिज हाल के पीछे खाली पड़ी जमीन को लेकर इनका पूर्व सांसद डा. अशोक पटेल से काफी सालों से विवाद चल रहा है। इस जमीन को लेकर कुछ दिनों पूर्व दोनों पक्षों के बीच विवाद भी हुआ था। इसके बाद जिलाधिकारी संजीव सिंह दोनों पक्षों को जमीन से जुड़े दस्तावेज दिखाने के लिए बुलाया था। डीएम के मुताबिक, पूर्व राज्यमंत्री अयोध्या प्रसाद पाल को विवाद जमीन से संबंधित दस्तावेज दिखाने के लिए कई बार बुलाया गया था, लेकिन वह उपस्थित नहीं हुए।
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एसडीएम को दोनों पक्षों को सुनने के लिए लगाया गया था। पूर्व राज्यमंत्री अयोध्या प्रसाद पाल कानूनी रूप से अपना पक्ष अथवा कोई आदेश नहीं दिखा सके। इसके बाद पूर्व सांसद को कब्जा दिलाने की कार्रवाई की गई। उधर, डीएम के आदेश पर बुधवार को प्रशासन ने कब्जा दिला दिया। पुराना मॉडल शॉप समेत कई दुकानों पर रात करीब 10 बजे जेसीबी चली। बड़ी संख्या में मजदूर लगाकर दीवार बनाई गई। पुलिस शांति व्यवस्था बनाए रखने के मकसद से पूरी रात मौजूद रही।
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प्रकरण में पूर्व मंत्री की पत्नी शिवकली और बेटे अजय कुमार, ओम दत्त, संजय पाल की ओर से बहू सोनल ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की, जिसकी सुनवाई के लिए दो जज की बेंच रात 9.45 बजे बैठी। कोर्ट ने सुनवाई चालू की। हाईकोर्ट ने निर्माण ढहाए जाने को लेकर डीएम, एसपी, सीओ सिटी, एसडीएम, कोतवाल, नगर पालिका, पूर्व सांसद डा. अशोक पटेल व उनकी पत्नी से मामले में जवाब मांगा है। 20 जुलाई की सुनवाई की तारीख कोर्ट ने तय की है। पुलिस ने अयोध्या प्रसाद के तीनों बेटों और दूसरे पक्ष के दो लोगों समेत कुल पांच लोगों के खिलाफ शांतिभंग की कार्रवाई की है।
‘प्रशासन ने हाईकोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया’ : फतेहपुर। सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता और हाईकोर्ट में पूर्व राज्यमंत्री अयोध्या पाल की ओर से याचिका दाखिल करने वाली सोनल शुक्ला ने बताया कि कोरोना संक्रमण को देखते हुए हाईकोर्ट ने 10 जुलाई तक किसी भी निर्माण को गिराने और कब्जा दिलाने पर रोक लगा रखी है। कोरोना काल के कारण कोर्ट के नियमित न चल पाने के कारण यह आदेश जारी किए गए थे, लेकिन फतेहपुर के जिला प्रशासन की ओर से इस आदेश का भी पालन नहीं किया गया।