फतेहपुर। मेडिकल काॅलेज के शुरुआती दौर में ही उपचार में लापरवाही बरती जा रही है। दिल जैसी जरूरी जांच मल्टीपरपज हेल्थ वर्कर यानी एमपीडब्ल्यू (वार्डआया) कर रहीं हैं। वहीं एक्स-रे के लिए तकनीशियन मौजूद है, लेकिन यहां पर एमपीडब्ल्यू (वार्ड ब्वाॅय) जांच करता है। यही हाल हड्डी रोगियों के प्लास्टर करने में है। ऐसे में मेडिकल कॉलेज में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा का भरोसा टूटता जा रहा है।
मेडिकल काॅलेज में फिलहाल ओपीडी ही संचालित है। उसमें भी ईसीजी जैसी अहम जांच अप्रशिक्षित महिला के हाथों सौंपी गई है। ईसीजी के यूनिपोलर लीड, बायपोलर लीड और बीएचएस लीड, चेस्ट लीड लगाने तक जानकारी नहीं है। वे किसी तरह लीड लगा देती हैं। हालांकि धड़कन के साउंड से रिपोर्ट आ जाती है, लेकिन इसकी विश्वसनीयता पर भरोसा नहीं किया जा सकता है। जबकि यहां पर ईसीजी टेक्नीशियन (पैरामेडिकल होल्डर) की तैनाती है, लेकिन उससे वार्ड ब्वाॅय का काम लिया जा रहा है। इसी तरह एक्सरे के लिए दो टेक्नीशियन हैं, लेकिन वे पर्चा बनाते हैं और एक एमपीडब्ल्यू ही जांच के लिए मशीन संचालित करता है। ऐसे ही कई विभागों में अप्रशिक्षित ही मरीजों के उपचार में लगे हैं। ये मरीजों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है और मेडिकल काॅलेज की विश्वसनीयता को भी कमजोर कर रहा है। हालांकि मेडिकल काॅलेज के आलाधिकारी इसे सिरे से नकार रहे हैं, लेकिन वीडियो से पूरा मामला स्पष्ट है।