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फतेहपुरः बुढ़ापे में पड़ रहे हैं बीमार, इलाज के पैसे का इतंजार
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फतेहपुर। बुजुर्गों की चिकित्सा प्रतिपूर्ति पर लापरवाही का ब्रेक लगा है। सरकारी सेवाओं से सेवानिवृत्त हो चुके बुजुर्गों को बीमारी के उपचार में लगने वाली धनराशि की प्रतिपूर्ति सरकार की ओर से देय होती है। बिलों का भुगतान कराने में बुजुर्गों को चक्कर पर चक्कर लगवाए जाते हैं। स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी किसी न किसी बहाने से टरकाते रहते हैं।
जनपद में पेंशनरों की संख्या 16 हजार है। वृद्घावस्था में ज्यादातर किसी न किसी बीमारी से ग्रसित हैं। इलाज करा रहे बुजुर्गों को अपन बिल बाउचर सेवानिवृत्ति वाले विभाग में लगाने होते हैं। उस विभाग से बिल बाउचर की फाइल बनकर सीएमओ या सीएमएस के दफ्तर में जाती है। यहां से बिल बाउचर का सत्यापन होने के बाद बिल कलक्ट्रेट स्थित ट्रेजरी कार्यालय में पहुंचते हैं। ट्रेजरी से बाउचर में दिए गए बिलों का भुगतान हो जाता है। स्वास्थ्य विभाग में बिल पास कराने के लिए चक्कर पर चक्कर लगाने पड़ते हैं।
70 वर्षीय रामभजन यादव ने अपनी पत्नी विद्या के इलाज का 51 हजार रुपये का बिल स्वास्थ्य विभाग भेजा था। मगर बिल स्वीकृत नहीं हुआ और एक माह पूर्व विद्या का निधन हो गया। बिल बाउचर अभी तक स्वीकृत नहीं हो सके। निचली गंगा विभाग से सेवानिवृत्त इंजीनियर बीएम सिंह ने फेफड़ों में इंफेक्शन का उपचार कराया। ऑपरेशन भी कराना पड़ा। 29 जुलाई को 4.31 लाख रुपयों का बिल लगाया था। अभी तक भुगतान नहीं हुआ। 68 वर्षीय रामजनम यादव का 15 हजार रुपये, शिवलोचन और शिवशंकर के बिल बाउचर डेढ़ महीने से लंबित हैं।
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बुजुर्ग साथियों की समस्याओं का निदान समय से नहीं हुआ तो आंदोलन किया जाएगा। सीएमएस कार्यालय में बिल बाउचर कई-कई महीनों तक लंबित रहते हैं। इससे मरीजों को दिक्कत होती है।
-कालीशंकर श्रीवास्तव, प्रदेश अध्यक्ष वरिष्ठ नागरिक वेलफेयर एसोसिएशन
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जनपद में पेंशनरों की संख्या 16 हजार है। वृद्घावस्था में ज्यादातर किसी न किसी बीमारी से ग्रसित हैं। इलाज करा रहे बुजुर्गों को अपन बिल बाउचर सेवानिवृत्ति वाले विभाग में लगाने होते हैं। उस विभाग से बिल बाउचर की फाइल बनकर सीएमओ या सीएमएस के दफ्तर में जाती है। यहां से बिल बाउचर का सत्यापन होने के बाद बिल कलक्ट्रेट स्थित ट्रेजरी कार्यालय में पहुंचते हैं। ट्रेजरी से बाउचर में दिए गए बिलों का भुगतान हो जाता है। स्वास्थ्य विभाग में बिल पास कराने के लिए चक्कर पर चक्कर लगाने पड़ते हैं।
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70 वर्षीय रामभजन यादव ने अपनी पत्नी विद्या के इलाज का 51 हजार रुपये का बिल स्वास्थ्य विभाग भेजा था। मगर बिल स्वीकृत नहीं हुआ और एक माह पूर्व विद्या का निधन हो गया। बिल बाउचर अभी तक स्वीकृत नहीं हो सके। निचली गंगा विभाग से सेवानिवृत्त इंजीनियर बीएम सिंह ने फेफड़ों में इंफेक्शन का उपचार कराया। ऑपरेशन भी कराना पड़ा। 29 जुलाई को 4.31 लाख रुपयों का बिल लगाया था। अभी तक भुगतान नहीं हुआ। 68 वर्षीय रामजनम यादव का 15 हजार रुपये, शिवलोचन और शिवशंकर के बिल बाउचर डेढ़ महीने से लंबित हैं।
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बुजुर्ग साथियों की समस्याओं का निदान समय से नहीं हुआ तो आंदोलन किया जाएगा। सीएमएस कार्यालय में बिल बाउचर कई-कई महीनों तक लंबित रहते हैं। इससे मरीजों को दिक्कत होती है।
-कालीशंकर श्रीवास्तव, प्रदेश अध्यक्ष वरिष्ठ नागरिक वेलफेयर एसोसिएशन