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फतेहपुरः बदले मौसम में बीमारियों का हमला
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जिला अस्पताल की ओपीडी में लगी मरीजों की भीड़। संवाद
- फोटो : FATEHPUR
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फतेहपुर। एक दिन में मौसम में कई बार बदलाव हो रहा है। कभी तेज धूप, कभी छांव और कभी बरसात के कारण खांसी, जुकाम और बुखार ने हमला बोल दिया है। इस कारण जिला और प्राइवेट अस्पतालों में मरीजों की भीड़ बढ़ गई है। जिला अस्पताल की ओपीडी में हर रोज सैकड़ों मरीज आ रहे हैं।
सुबह 11 बजे जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. एनके सक्सेना के कक्ष में भारी भीड़ रही। कक्ष के बाहर लाइन में खड़े महेश और सुरेश ने बताया कि तीन दिन से बुखार पीछा नहीं छोड़ रहा है। डॉक्टर मरीजों से घिरे रहे। कक्ष में पैर रखने की जगह नहीं थी। डॉक्टर ने बताया कि रोज 60 मरीज देखने का प्राविधान है, लेकिन इस समय डेढ़ सौ मरीज हर दिन देखने पड़ रहे हैं।
अल्ट्रासाउंड के लिए 15 दिन इंतजार
जिला अस्पताल में मरीजों को अल्ट्रासाउंड के लिए 15 दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है। सुबह 11:30 बजे अल्ट्रासाउंड कक्ष के बाहर 120 मरीज थे, जबकि 19 अल्ट्रासाउंड हो चुके थे। रेडियोलाजिस्ट डॉ. पवन निरंजन ने कहा कि हर दिन 70 की जगह 100 अल्ट्रासाउंड हो रहे हैं। हर दिन 150 से 200 मरीज आ रहे हैं। इसलिए वेटिंग बढ़ रही है। जिला महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड बंद होने से यहां लोड बढ़ा है।
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जिला अस्पताल के दवा वितरण कक्ष में दवा लेने के लिए मारामारी मची रहती है। दोपहर 12 बजे यहां तैनात तीन कर्मचारी मरीजों से कहते रहे कि हर तरह की दवा उपलब्ध है। स्टाक में 289 तरह की दवाएं हैं। बस धैर्य बनाकर आएं और लाइन से दवा लें। अगर एक-दूसरे से यूं ही धक्कामुक्की करेंगे तो किसी का भला नहीं होगा। सीएमएस डॉ. राजेश श्रीवास्तव ने बताया कि चिकित्सकों को सख्त निर्देश हैं कि दवाएं अस्पताल से ही लिखी जाएं।
डॉक्टरों का कहना है कि मौसमी बीमारियों से बचने के लिए थोड़ी सतर्कता की जरूरत है। तेज धूप और वर्षा से बचें।
साफ पानी पीएं और ताजा भोजन खाएं। घर के आसपास जल जमाव न होने दें और सफाई रखें। रात में मच्छरदानी का प्रयोग करें। कटे-सड़े फल न खाएं। हरी सब्जियों को भोजन में शामिल करें।
जिला अस्पताल में सूचीबद्ध सभी दवाएं मौजूद हैं। मरीजों की संख्या बढ़ने के कारण डॉक्टरों को मानक से अधिक मरीज देखने के लिए कहा गया है। ताकि मरीजों को दिक्कत न हो।
- राजेश श्रीवास्तव, सीएमएस
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सुबह 11 बजे जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. एनके सक्सेना के कक्ष में भारी भीड़ रही। कक्ष के बाहर लाइन में खड़े महेश और सुरेश ने बताया कि तीन दिन से बुखार पीछा नहीं छोड़ रहा है। डॉक्टर मरीजों से घिरे रहे। कक्ष में पैर रखने की जगह नहीं थी। डॉक्टर ने बताया कि रोज 60 मरीज देखने का प्राविधान है, लेकिन इस समय डेढ़ सौ मरीज हर दिन देखने पड़ रहे हैं।
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अल्ट्रासाउंड के लिए 15 दिन इंतजार
जिला अस्पताल में मरीजों को अल्ट्रासाउंड के लिए 15 दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है। सुबह 11:30 बजे अल्ट्रासाउंड कक्ष के बाहर 120 मरीज थे, जबकि 19 अल्ट्रासाउंड हो चुके थे। रेडियोलाजिस्ट डॉ. पवन निरंजन ने कहा कि हर दिन 70 की जगह 100 अल्ट्रासाउंड हो रहे हैं। हर दिन 150 से 200 मरीज आ रहे हैं। इसलिए वेटिंग बढ़ रही है। जिला महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड बंद होने से यहां लोड बढ़ा है।
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जिला अस्पताल के दवा वितरण कक्ष में दवा लेने के लिए मारामारी मची रहती है। दोपहर 12 बजे यहां तैनात तीन कर्मचारी मरीजों से कहते रहे कि हर तरह की दवा उपलब्ध है। स्टाक में 289 तरह की दवाएं हैं। बस धैर्य बनाकर आएं और लाइन से दवा लें। अगर एक-दूसरे से यूं ही धक्कामुक्की करेंगे तो किसी का भला नहीं होगा। सीएमएस डॉ. राजेश श्रीवास्तव ने बताया कि चिकित्सकों को सख्त निर्देश हैं कि दवाएं अस्पताल से ही लिखी जाएं।
डॉक्टरों का कहना है कि मौसमी बीमारियों से बचने के लिए थोड़ी सतर्कता की जरूरत है। तेज धूप और वर्षा से बचें।
साफ पानी पीएं और ताजा भोजन खाएं। घर के आसपास जल जमाव न होने दें और सफाई रखें। रात में मच्छरदानी का प्रयोग करें। कटे-सड़े फल न खाएं। हरी सब्जियों को भोजन में शामिल करें।
जिला अस्पताल में सूचीबद्ध सभी दवाएं मौजूद हैं। मरीजों की संख्या बढ़ने के कारण डॉक्टरों को मानक से अधिक मरीज देखने के लिए कहा गया है। ताकि मरीजों को दिक्कत न हो।
- राजेश श्रीवास्तव, सीएमएस