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संक्रामक बीमारियों से रोकथाम का अभियान शुरू
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फतेहपुर। स्वास्थ्य विभाग ने संक्रामक बीमारियों की रोकथाम के लिए आईडीए और दस्तक अभियान शुरू किया है। सोमवार को जिला मलेरिया अधिकारी एके सिंह ने रामगंज पक्का तालाब पीएचसी से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसके बाद विभागीय कर्मचारियों और अधिकारियों ने फाइलेरिया की खुराक ली।
स्वास्थ्य विभाग ने मच्छरों से होने वाली बीमारियों से बचाव के साथ कोरोना की तीसरी लहर से बचाव और टीकाकरण को लेकर फैली भ्रांतियां दूर करने का अभियान छेड़ा है। अभियान 26 जुलाई तक चलेगा। इस दौरान आंगनबाड़ी और आशा बहुओं की टीमें घर-घर जाकर अल्बेंडाजोल, डीइसी, आइवेर्मेक्टिन की टेबलेट खिलाएंगी। 30 लाख की आबादी में घर-घर जाकर दवा खिलाने के लिए 2400 टीमें लगाई गई हैं। एक टीम 16 से 17 घरों में जाकर दवा खिलाने का काम करेगी।
जिला मलेरिया अधिकारी एके सिंह ने बताया कि टीमों की निगरानी के लिए 375 सुपरवाइजर लगाए गए हैं। इस अभियान के तहत पांच तरह रोगी चिह्नित किए जाएंगे। इनमें बुखार रोगी, कोरोना के संदिग्ध रोगी, क्षय रोग के लक्षण युक्त रोगी, फाइलेरिया से विकृत रोगी, कुपोषित बच्चे शामिल हैं।
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उन्होंने सभी लोगों से अनिवार्य रूप से दवा खाने की अपील की है। बताया कि साल में एक बार और दो साल तक मानक के अनुरूप दवा खाने से फाइलेरिया के बैक्टीरिया शरीर के अंदर ही नष्ट हो जाते हैं। यह बीमारी अगर एक बार हो गई, तो आजीवन ठीक नहीं होती है।
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स्वास्थ्य विभाग ने मच्छरों से होने वाली बीमारियों से बचाव के साथ कोरोना की तीसरी लहर से बचाव और टीकाकरण को लेकर फैली भ्रांतियां दूर करने का अभियान छेड़ा है। अभियान 26 जुलाई तक चलेगा। इस दौरान आंगनबाड़ी और आशा बहुओं की टीमें घर-घर जाकर अल्बेंडाजोल, डीइसी, आइवेर्मेक्टिन की टेबलेट खिलाएंगी। 30 लाख की आबादी में घर-घर जाकर दवा खिलाने के लिए 2400 टीमें लगाई गई हैं। एक टीम 16 से 17 घरों में जाकर दवा खिलाने का काम करेगी।
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जिला मलेरिया अधिकारी एके सिंह ने बताया कि टीमों की निगरानी के लिए 375 सुपरवाइजर लगाए गए हैं। इस अभियान के तहत पांच तरह रोगी चिह्नित किए जाएंगे। इनमें बुखार रोगी, कोरोना के संदिग्ध रोगी, क्षय रोग के लक्षण युक्त रोगी, फाइलेरिया से विकृत रोगी, कुपोषित बच्चे शामिल हैं।
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उन्होंने सभी लोगों से अनिवार्य रूप से दवा खाने की अपील की है। बताया कि साल में एक बार और दो साल तक मानक के अनुरूप दवा खाने से फाइलेरिया के बैक्टीरिया शरीर के अंदर ही नष्ट हो जाते हैं। यह बीमारी अगर एक बार हो गई, तो आजीवन ठीक नहीं होती है।