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फतेहपुरः मंडराया सरकारी पैथोलॉजी पर खतरा
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जिला अस्पताल की पैथोलॉजी के बाहर रिपोर्ट लेने के लिए लगी भीड़
- फोटो : FATEHPUR
फतेहपुर। सदर अस्पताल की पैथोलॉजी गुरुवार को और भी बेपटरी हो गई। कई दिन से तकनीकी खामी की वजह से जो दिक्कत आ रही थी, उसमें कार्यदायी संस्था के कर्मचारियों के हड़ताल में चले जाने से और इजाफा हो गया। हाल यह रहे बायोकेमिस्ट्री की जांच पर विराम लग गया। जिससे लीवर, किडनी और हृदय संबंधी जांच कराने आए जरूरतमंदों को प्राइवेट लैब भागना पड़ा।
सदर अस्पताल की अत्याधुनिक पैथोलॉजी में वरिष्ठ लैब टेक्नीशियन के पद पर एके सिंह और राम प्रकाश की तैनाती है। लैब टेक्नीशियन आरएन सिंह के अलावा दो कर्मचारी एनएचम से सेवाएं दे रहे हैं जबकि पांच कर्मचारी पीओसीटी कंपनी के अधीन काम कर रहे थे। कार्यदायी संस्था के ये सभी कर्मचारी गुरुवार को अस्पताल छोड़कर चले गए।
दस में पांच कर्मचारी कम हो जाने से पहले से ही लड़खड़ा रही जिले के बड़े अस्पताल की पैथोलॉजी का हाल और भी खराब हो गया। एलएफटी(लीवर), केएफटी(किडनी) और लिक्विड प्रोफाइल(ह्दय) संबंधी दिक्कतों की जांच ठप हो गई। केवल सीबीएस, एमपी विड्राल और आरबीएस की ही जांच हो सकी। इसमें भी इतनी भीड़ थी कि तमाम मरीजों को लौटना पड़ गया।
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वरिष्ठ लैब टेक्नीशियन एके सिंह ने माना कि स्टाफ की कमी से काम में असर पड़ा। इसके बावजूद प्रयास रहा कि ज्यादा से ज्यादा जांचें की जा सके। वैसे भी रोज कम से कम 300 लोग आ रहे हैं। इनमें से सात से साढ़े सात सौ जांचें होती हैं।
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सदर अस्पताल की अत्याधुनिक पैथोलॉजी में वरिष्ठ लैब टेक्नीशियन के पद पर एके सिंह और राम प्रकाश की तैनाती है। लैब टेक्नीशियन आरएन सिंह के अलावा दो कर्मचारी एनएचम से सेवाएं दे रहे हैं जबकि पांच कर्मचारी पीओसीटी कंपनी के अधीन काम कर रहे थे। कार्यदायी संस्था के ये सभी कर्मचारी गुरुवार को अस्पताल छोड़कर चले गए।
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दस में पांच कर्मचारी कम हो जाने से पहले से ही लड़खड़ा रही जिले के बड़े अस्पताल की पैथोलॉजी का हाल और भी खराब हो गया। एलएफटी(लीवर), केएफटी(किडनी) और लिक्विड प्रोफाइल(ह्दय) संबंधी दिक्कतों की जांच ठप हो गई। केवल सीबीएस, एमपी विड्राल और आरबीएस की ही जांच हो सकी। इसमें भी इतनी भीड़ थी कि तमाम मरीजों को लौटना पड़ गया।
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वरिष्ठ लैब टेक्नीशियन एके सिंह ने माना कि स्टाफ की कमी से काम में असर पड़ा। इसके बावजूद प्रयास रहा कि ज्यादा से ज्यादा जांचें की जा सके। वैसे भी रोज कम से कम 300 लोग आ रहे हैं। इनमें से सात से साढ़े सात सौ जांचें होती हैं।