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युवा पेज: आज से फिर खुलेग संशाधन विहीन राजकीय मॉडल इंटर कॉलेज
Sun, 02 Jul 2023 11:37 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहपुर
Updated Sun, 02 Jul 2023 11:37 PM IST
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फोटो-23-पं. दीनदयाल उपाध्याय राजकीय मॉडल इंटर कॉलेज बहुआ।
आज से फिर खुलेगा संसाधनविहीन राजकीय मॉडल इंटर कॉलेज
सात साल में विज्ञान लैब, बैठने का फर्नीचर तक की नहीं व्यवस्था
शिक्षकों की कमी, छात्र-छात्राओं के भविष्य के साथ खिलवाड़
संवाद न्यूज एजेंसी
फतेहपुर। सात साल में पंडित दीन दयाल उपाध्याय राजकीय मॉडल इंटर कॉलेज में संसाधनों की कमी पूरी नहीं हो पाई। शिक्षकों के 60 प्रतिशत पद खाली होने से बच्चों की पढ़ाई में औपचारिकता हो रही है। बाउंड्रीविहीन इन विद्यालयों में पर्याप्त फर्नीचर तक की व्यवस्था नहीं है। विज्ञान लैब न होने से यहां के छात्र-छात्राएं सिर्फ किताबी ज्ञान तक सीमित हैं।
सोमवार से फिर पुराने ढर्रे में राजकीय माॅडल इंटर कालेज खुलेंगे। 2008 में बसपा सरकार ने जिले में छह मॉडल स्कूलों का निर्माण कराया गया था। प्रत्येक विद्यालय की लागत तीन करोड़ दो लाख थी। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने दनियालपुर, बहुआ, ऐलई, लतीफपुर, अलादातपुर, अंबिलिहापाल में निर्माण कराया था। सपा सरकार में यह भवन बनकर तैयार तो हो गए, लेकिन संचालन नहीं हो पाया। प्रदेश में भाजपा सरकार ने इन स्कूलों का संचालन पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय मॉडल इंटर कॉलेज के नाम से शुरू कराया। खास बात तो यह है कि इनमें किसी भी विद्यालय का निर्माण पूर्ण नहीं है। अंबिलिहापाल स्कूल की दूसरी मंजिल की सिर्फ दीवारें खड़ी हैं। अन्य सभी बाउंड्री विहीन हैं। स्कूलों में विज्ञान लैब नहीं है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय मॉडल इंटर कॉलेज अंबिलिहापाल में तो सिर्फ दो शिक्षक पढ़ा रहे हैं। अन्य किसी में भी 40 प्रतिशत से अधिक सहायक अध्यापक या प्रवक्ता नहीं है।
बच्चों के बैठने के लिए पर्याप्त फर्नीचर नहीं है। रंगाई पुताई निर्माण के बाद से नहीं कराई गई। कक्षों मेें बिजली के पंखे तक नहीं हैं। पीने के पानी के लिए सिर्फ हैंडपंप का सहारा है। किसी में पुस्तकालय की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में साफ है कि कहने के लिए यह विद्यालय मॉडल हैं, लेकिन मौके पर एडेड स्कूलों से भी बदतर हैं। डीआईओएस अनुराग श्रीवास्तव ने बताया कि जिले में राजकीय शिक्षकों की अभी तक कमी है। पिछले सत्र में 29 राजकीय शिक्षक मिले थे। इनकी नियुक्ति कर दी गई है। एक राजकीय इंटर कालेज में सात प्रवक्ता और 11 सहायक अध्यापकों के पद सृजित होते हैं। अभी नए राजकीय इंटर काॅलेजों में शिक्षकों की कमी है। इसके लिए शासन को लिखा गया है।
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आज से फिर खुलेगा संसाधनविहीन राजकीय मॉडल इंटर कॉलेज
सात साल में विज्ञान लैब, बैठने का फर्नीचर तक की नहीं व्यवस्था
शिक्षकों की कमी, छात्र-छात्राओं के भविष्य के साथ खिलवाड़
संवाद न्यूज एजेंसी
फतेहपुर। सात साल में पंडित दीन दयाल उपाध्याय राजकीय मॉडल इंटर कॉलेज में संसाधनों की कमी पूरी नहीं हो पाई। शिक्षकों के 60 प्रतिशत पद खाली होने से बच्चों की पढ़ाई में औपचारिकता हो रही है। बाउंड्रीविहीन इन विद्यालयों में पर्याप्त फर्नीचर तक की व्यवस्था नहीं है। विज्ञान लैब न होने से यहां के छात्र-छात्राएं सिर्फ किताबी ज्ञान तक सीमित हैं।
सोमवार से फिर पुराने ढर्रे में राजकीय माॅडल इंटर कालेज खुलेंगे। 2008 में बसपा सरकार ने जिले में छह मॉडल स्कूलों का निर्माण कराया गया था। प्रत्येक विद्यालय की लागत तीन करोड़ दो लाख थी। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने दनियालपुर, बहुआ, ऐलई, लतीफपुर, अलादातपुर, अंबिलिहापाल में निर्माण कराया था। सपा सरकार में यह भवन बनकर तैयार तो हो गए, लेकिन संचालन नहीं हो पाया। प्रदेश में भाजपा सरकार ने इन स्कूलों का संचालन पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय मॉडल इंटर कॉलेज के नाम से शुरू कराया। खास बात तो यह है कि इनमें किसी भी विद्यालय का निर्माण पूर्ण नहीं है। अंबिलिहापाल स्कूल की दूसरी मंजिल की सिर्फ दीवारें खड़ी हैं। अन्य सभी बाउंड्री विहीन हैं। स्कूलों में विज्ञान लैब नहीं है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय मॉडल इंटर कॉलेज अंबिलिहापाल में तो सिर्फ दो शिक्षक पढ़ा रहे हैं। अन्य किसी में भी 40 प्रतिशत से अधिक सहायक अध्यापक या प्रवक्ता नहीं है।
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बच्चों के बैठने के लिए पर्याप्त फर्नीचर नहीं है। रंगाई पुताई निर्माण के बाद से नहीं कराई गई। कक्षों मेें बिजली के पंखे तक नहीं हैं। पीने के पानी के लिए सिर्फ हैंडपंप का सहारा है। किसी में पुस्तकालय की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में साफ है कि कहने के लिए यह विद्यालय मॉडल हैं, लेकिन मौके पर एडेड स्कूलों से भी बदतर हैं। डीआईओएस अनुराग श्रीवास्तव ने बताया कि जिले में राजकीय शिक्षकों की अभी तक कमी है। पिछले सत्र में 29 राजकीय शिक्षक मिले थे। इनकी नियुक्ति कर दी गई है। एक राजकीय इंटर कालेज में सात प्रवक्ता और 11 सहायक अध्यापकों के पद सृजित होते हैं। अभी नए राजकीय इंटर काॅलेजों में शिक्षकों की कमी है। इसके लिए शासन को लिखा गया है।
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