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नेपियर और चरी से गोवंशों की सेहत में होगा सुधार
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फतेहपुर। जिले की गोशालाओं में करीब 13 हजार गोवंश हैं। इनका पेट भरने के लिए भूसा के अलावा हरे चारे की व्यवस्था के निर्देश दिए गए हैं। नेपियर और चरी की हरियाली से गोवंशों की सेहत सुधारी जाएगी। इसके लिए जिले की 46 गोशालाओं में 200 बीघा क्षेत्रफल में बुवाई कराई जाएगी। इससे 15 से 20 दिन में हरा चारा तैयार हो जाएगा।
गोशाला में रखे जा रहे गोवंशों को चारा व दाना के लिए प्रतिदिन प्रति पशु 30 रुपये का खर्च सरकार देती है, लेकिन यह राशि भी कम पड़ रही है। अब प्रशासन ने गोशाला की जमीनों को उपयोग में लाने की योजना बनाई है। इसके लिए गोशाला में नेपियर घास और चरी की बुवाई कराई गई है। यह वह प्रबंध है कि एक बार के काटने में चारा खत्म नहीं होगा बल्कि एक तरफ से हरा चारा काटा जाएगा तो दूसरी तरफ से वही फसल फिर से हरी-भरी होकर खड़ी हो जाएगी। इससे कम राशि में ज्यादा मात्रा में चारा तैयार हो पाएगा और पशुओं की भूख का इंतजाम हो जाएगा।
- हर गोशाला का संचालन ग्राम पंचायत करा रही है। एक पशु के चारा-दाना के लिए प्रतिदिन 30 रुपये खर्च होते हैं। गोशालाओं में एक पशु चिकित्साधिकारी व चार से छह गोपालक नियमित रूप से सेवाएं देते हैं। डीएम की ओर से नामित एक-एक नोडल अधिकारी यहां साप्ताहिक भ्रमण करते हैं। किसी भी अव्यवस्था पर बीडीओ व एडीओ की सीधी जवाबदेही है।
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कुल गोशालाएं---46
टैग वाले गोवंश-13 हजार
हरे चारे के लिए बोई चरी का क्षेत्रफल- 163 बीघा
हरे चारे के लिए बोई नेपियर घास- 40 बीघा
दान से एकत्रित भूसा-----1769 क्विंटल
खरीदे गए भूसे का स्टाक---9226 क्विंटल
हरे चारे की गोशालाओं में उपलब्धता न होने कारण गोवंश ज्यादा बीमार होते हैं। गोवंशों के हरे चारे के लिए ग्राम पंचायतों में संरक्षित जमीन पर अब बुवाई कराई जा रही है। ताकि गोवंशों को भूसा के साथ हरा चारा मिल सके। इससे गोवंश बीमार भी कम होंगे।
- आरडी अहिरवार, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
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गोशाला में रखे जा रहे गोवंशों को चारा व दाना के लिए प्रतिदिन प्रति पशु 30 रुपये का खर्च सरकार देती है, लेकिन यह राशि भी कम पड़ रही है। अब प्रशासन ने गोशाला की जमीनों को उपयोग में लाने की योजना बनाई है। इसके लिए गोशाला में नेपियर घास और चरी की बुवाई कराई गई है। यह वह प्रबंध है कि एक बार के काटने में चारा खत्म नहीं होगा बल्कि एक तरफ से हरा चारा काटा जाएगा तो दूसरी तरफ से वही फसल फिर से हरी-भरी होकर खड़ी हो जाएगी। इससे कम राशि में ज्यादा मात्रा में चारा तैयार हो पाएगा और पशुओं की भूख का इंतजाम हो जाएगा।
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- हर गोशाला का संचालन ग्राम पंचायत करा रही है। एक पशु के चारा-दाना के लिए प्रतिदिन 30 रुपये खर्च होते हैं। गोशालाओं में एक पशु चिकित्साधिकारी व चार से छह गोपालक नियमित रूप से सेवाएं देते हैं। डीएम की ओर से नामित एक-एक नोडल अधिकारी यहां साप्ताहिक भ्रमण करते हैं। किसी भी अव्यवस्था पर बीडीओ व एडीओ की सीधी जवाबदेही है।
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कुल गोशालाएं---46
टैग वाले गोवंश-13 हजार
हरे चारे के लिए बोई चरी का क्षेत्रफल- 163 बीघा
हरे चारे के लिए बोई नेपियर घास- 40 बीघा
दान से एकत्रित भूसा-----1769 क्विंटल
खरीदे गए भूसे का स्टाक---9226 क्विंटल
हरे चारे की गोशालाओं में उपलब्धता न होने कारण गोवंश ज्यादा बीमार होते हैं। गोवंशों के हरे चारे के लिए ग्राम पंचायतों में संरक्षित जमीन पर अब बुवाई कराई जा रही है। ताकि गोवंशों को भूसा के साथ हरा चारा मिल सके। इससे गोवंश बीमार भी कम होंगे।
- आरडी अहिरवार, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
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