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लकड़ी का पुल दे रहा मौत को दावत
ब्यूरो/ अमर उजाला, फतेहपुर
Updated Sat, 06 Feb 2016 12:11 AM IST
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ससुर खदेरी नदी पर लकड़ी व बांस का बना पुल दुर्घटना को दावत दे रहा है। हर दिन सैकड़ों लोगों का आवागमन है। दिनोंदिन इसके कमजोर होने से दोपहिया वाहन चालक डरने लगे हैं।
रघुराजपुर निवासी राजेंद्र यादव, मुन्ना यादव और हनुमंत सिंह ने बताया कि चचीड़ा-रघुराजपुर के बीच बह रही ससुर खदेरी नदी में पुल बनाने के लिए कई बार शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से फरियाद लगाई लेकिन समस्या जस की तस है। चुनाव के वक्त जनप्रतिनिधियों ने वादा भी किया था लेकिन चुनाव जीतने के बाद भूल गए। पुल समस्या की सुधि नहीं ली। पास के कस्बा खखरेरू जाने के लिए मजबूर होकर ग्रामीणों ने बांस और बल्लियों का पुल बना लिया है। जिससे होकर गांव के बच्चे स्कूल जाते हैं। बताया कि इस मार्ग से सोथरापुर, सलवन रारी, चचीड़ा, एकडला, गढ़ा समेत सैकड़ों गांवों के लोगों का आवागमन है। बरसात के समय नदी में बाढ़ और तेज बहाव होने से पुल खत्म हो जाता है। तब बच्चों का स्कूल जाना भी बंद हो जाता है। चचीड़ा गांव के मातादीन ने बताया कि हर वर्ष इस नदी से निकलने में कोई न कोई घटनाएं होती रहती है।
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रघुराजपुर निवासी राजेंद्र यादव, मुन्ना यादव और हनुमंत सिंह ने बताया कि चचीड़ा-रघुराजपुर के बीच बह रही ससुर खदेरी नदी में पुल बनाने के लिए कई बार शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से फरियाद लगाई लेकिन समस्या जस की तस है। चुनाव के वक्त जनप्रतिनिधियों ने वादा भी किया था लेकिन चुनाव जीतने के बाद भूल गए। पुल समस्या की सुधि नहीं ली। पास के कस्बा खखरेरू जाने के लिए मजबूर होकर ग्रामीणों ने बांस और बल्लियों का पुल बना लिया है। जिससे होकर गांव के बच्चे स्कूल जाते हैं। बताया कि इस मार्ग से सोथरापुर, सलवन रारी, चचीड़ा, एकडला, गढ़ा समेत सैकड़ों गांवों के लोगों का आवागमन है। बरसात के समय नदी में बाढ़ और तेज बहाव होने से पुल खत्म हो जाता है। तब बच्चों का स्कूल जाना भी बंद हो जाता है। चचीड़ा गांव के मातादीन ने बताया कि हर वर्ष इस नदी से निकलने में कोई न कोई घटनाएं होती रहती है।
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