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Fatehpur News: प्रधान के भाई की हत्या के 19 साल पुराने मामले में गैंगस्टर को सात साल की सजा
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फोटो-38-राजू तिवारी उर्फ बालकृष्ण। स्रोत: सोशल मीडिया
फतेहपुर। अदालत ने 19 साल पुराने चर्चित हत्याकांड से जुड़े गैंगस्टर राजू तिवारी उर्फ बालकृष्ण को दोषी करार दिया है। गैंगस्टर कोर्ट संख्या-दो के न्यायाधीश सुभाष चंद्र मौर्य ने उसे सात वर्ष के कारावास और 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
असोथर थाने के मटिहा गांव के प्रधान रामकिशोर पासवान से गांव के ही कुख्यात गैंग के बदमाश राजू तिवारी उर्फ बालकृष्ण ने रंगदारी मांगी थी। रंगदारी न देने की रंजिश में 10 सितंबर 2007 को राजू अपने गैंग के चरैला उर्फ मेवालाल, बब्बू केवट व रामकृपाल उर्फ कल्लू के साथ प्रधान के दरवाजे पहुंचा था।
आरोप है कि वहां प्रधान के भाइयों पर करीब 50 राउंड फायरिंग की गई, जिसमें प्रधान के सगे भाई की मौत हो गई और दो लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। हत्या के मामले में चारों आरोपियों को पूर्व में सजा हो चुकी है। इस गैंग पर वर्ष 2008 में गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई हुई थी।
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गैंगस्टर के मुकदमे की सुनवाई के दौरान चरैला उर्फ मेवालाल की मौत हो गई, जबकि बब्बू केवट और रामकृपाल उर्फ कल्लू के खिलाफ मामला पूर्व में निस्तारित हो चुका है। गैंग के सदस्यों के खिलाफ जिले के अन्य थानों में भी हत्या की कोशिश, एससी-एसटी, गुंडा एक्ट समेत कई मुकदमे दर्ज थे। कोर्ट ने बृहस्पतिवार को अंतिम सुनवाई के बाद राजू तिवारी को सजा सुनाई।
कोरोना काल में छूटा था राजू तिवारी
तत्कालीन प्रधान रामकिशोर पासवान ने बताया कि घटना से एक दिन पहले ही रंगदारी मांगी गई थी। गैंग के सदस्यों के दस्यु उमर केवट गैंग से संबंध थे। रंगदारी के 50 हजार रुपये समय पर नहीं पहुंचने पर अगले दिन गोलीकांड किया गया था। कोरोना काल में राजू तिवारी जेल से छूटने के बाद कोर्ट नहीं गया था। अब हाजिर होने पर उसे सजा हुई है। गांव में राजू का कोई नहीं है। उसकी पत्नी की पहले ही मौत हो चुकी है और चार भाई बाहर रहते हैं।
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असोथर थाने के मटिहा गांव के प्रधान रामकिशोर पासवान से गांव के ही कुख्यात गैंग के बदमाश राजू तिवारी उर्फ बालकृष्ण ने रंगदारी मांगी थी। रंगदारी न देने की रंजिश में 10 सितंबर 2007 को राजू अपने गैंग के चरैला उर्फ मेवालाल, बब्बू केवट व रामकृपाल उर्फ कल्लू के साथ प्रधान के दरवाजे पहुंचा था।
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आरोप है कि वहां प्रधान के भाइयों पर करीब 50 राउंड फायरिंग की गई, जिसमें प्रधान के सगे भाई की मौत हो गई और दो लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। हत्या के मामले में चारों आरोपियों को पूर्व में सजा हो चुकी है। इस गैंग पर वर्ष 2008 में गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई हुई थी।
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गैंगस्टर के मुकदमे की सुनवाई के दौरान चरैला उर्फ मेवालाल की मौत हो गई, जबकि बब्बू केवट और रामकृपाल उर्फ कल्लू के खिलाफ मामला पूर्व में निस्तारित हो चुका है। गैंग के सदस्यों के खिलाफ जिले के अन्य थानों में भी हत्या की कोशिश, एससी-एसटी, गुंडा एक्ट समेत कई मुकदमे दर्ज थे। कोर्ट ने बृहस्पतिवार को अंतिम सुनवाई के बाद राजू तिवारी को सजा सुनाई।
कोरोना काल में छूटा था राजू तिवारी
तत्कालीन प्रधान रामकिशोर पासवान ने बताया कि घटना से एक दिन पहले ही रंगदारी मांगी गई थी। गैंग के सदस्यों के दस्यु उमर केवट गैंग से संबंध थे। रंगदारी के 50 हजार रुपये समय पर नहीं पहुंचने पर अगले दिन गोलीकांड किया गया था। कोरोना काल में राजू तिवारी जेल से छूटने के बाद कोर्ट नहीं गया था। अब हाजिर होने पर उसे सजा हुई है। गांव में राजू का कोई नहीं है। उसकी पत्नी की पहले ही मौत हो चुकी है और चार भाई बाहर रहते हैं।

फोटो-38-राजू तिवारी उर्फ बालकृष्ण। स्रोत: सोशल मीडिया