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गंगा खतरे के निशान के करीब, फसलें डूबी
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गंगा नदी के बाढ़ के पानी से डूबी फसल। संवाद
- फोटो : FATEHPUR
औंग। गंगा नदी का जलस्तर एक बार फिर से उफान पर है। पानी चेतावनी बिंदु से 65 सेंटीमीटर ऊपर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है। पानी 24 घंटे में खतरे के निशान को पार कर जाएगा। बाढ़ का पानी तटवर्ती 10 गांवों के किनारे पहुंच गया है। करीब 200 बीघे खेत पानी में डूब गए हैं। जिन किसानों ने खेत में फसलों की बुवाई कर रखी थी, वह भी डूब गए हैं। किसानों को बाढ़ से हुए नुकसान की चिंता सताने लगी है।
पहाड़ों में हुई जोरदार बारिश से गंगा नदी एक बार फिर से उफान पर आ गई है। इससे गंगा की सहायक जिले की पांडु नदी का पानी भी ऊपर आ गया है। इससे नौ गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। खेतों में दो से तीन फुट पानी भर गया है। बिंदकी फार्म गांव किनारे से पानी का बहाव शुरू हो गया है। गंगा व पांडु नदी के तटवर्ती खेतों में
किसानों ने मिर्च, लहसुन व हरी सब्जी की फसलें बोई थीं, जो बाढ़ की चपेट में आने से डूब गई हैं। बाढ़ नियंत्रण रिपोर्ट के अनुसार गंगा नदी में 100.86 मीटर पर खतरे का निशान है। सोमवार सुबह आठ बजे की रिपोर्ट में गंगा का जलस्तर 100.51 मीटर पर पहुंच गया है। अभी गंगा का जलस्तर बढ़ रहा है। इसी रफ्तार से पानी बढ़ता रहा, तो मंगलवार सुबह की रिपोर्ट में गंगा खतरे के निशान तक पहुंच जाएंगी।
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गंगा व पांडु नदी किनारे के खेतों में किसान सब्जी व मसाले की फसल तैयार करते हैं। जिनके पास ज्यादा खेती है, वह किराये पर एक साल के लिए खेत दे देते हैं। किराये पर खेती करने वाले किसान मिर्च, लहसुन, प्याज, हरी मटर, शिमला मिर्च, बंधा गोभी की फसलें तैयार करते हैं। इन फसलों की किसानों ने बुवाई भी करा दी थी, लेकिन बाढ़ आने से फसलें डूब गई हैं।
जिले में 10 हजार हेक्टेयर से अधिक गंगा किनारे का कटरी क्षेत्र है, जिसमें आसपास के गांवों के किसान हरी सब्जी व मिर्च, लहसुन, प्याज मसाला की खेती करते हैं, जिनको किसान कानपुर रामादेवी मंडी, बिंदकी, औंग, शिवराजपुर, चौडागरा कस्बा के बाजारों में बेचते हैं। बाढ़ से ज्यादातर सब्जी व मसाले की फसल नष्ट हो जाएंगी, मिर्च, प्याज व हरी सब्जियों के दाम बढ़ जाएंगे।
जाड़े का पुरवा, बेनीखेड़ा ,बेरीनारी, बिंदकीफार्म, अवसेरी खेड़ा, सदनहा, काली कुंडी, बड़ाखेड़ा, नया खेड़ा, मल्लूखेड़ा, दरियापुरबांगर, दरियापुर कटरी आदि।
धनियां, अदरक, सौंफ, पुदीना, मिर्च मूली, पालक, बैंगन, कुंदरू, परवल, तोरई, लौकी, कद्दू, कुर्ती, लोबिया, गाजर, गोभी और फूल की फसलें खराब हुई।
औसेरीखेड़ा बाबूराम चार बीघा, रामखेलावन सात बीघा, राम बहादुर दो बीघा, लल्लू तीन बीघा, छोटे डेढ़ बीघा, पंचम डेढ़ बीघा, राजेश दो बीघा, संतराम दो बीघा, तेज प्रताप तीन बीघा, बंटी ढाई बीघा, संतोष डेढ़ बीघा, राजाराम ढाई बीघा, रामकृष्ण दो बीघा, बिंदकी फार्म में किसान योगेंद्र का पांच बीघा, राजकुमार का सात बीघा, भोला का
चार बीघा, धर्मेंद्र का तीन बीघा, आंचल बहादुर का चार बीघा, दिनेश का दो बीघा, दरियापुर गांव के रामचंद्र का साढ़े तीन बीघा, रामखेलावन का तीन बीघा, सौनी का तीन बीघा, जगदीश का दो बीघा, आशापुर गांव के सुखराम पांच बीघा, राम बहादुर चार बीघा, भयंकर पांडे तीन बीघा, जाड़े का पुरवा के ननका का तीन बीघा, गोपी का चार बीघा, जौहरी का दो बीघा, दूर्गा का चार बीघा, सोनी का चार बीघा, रामखेलावन का तीन बीघा, बेनीखेड़ा गांव के किसान रामप्रताप पांच बीघा, शिवप्रताप का तीन बीघा, रामऔतार का चार बीघा, लाल बहादुर का दो बीघा, रामकिशोर का तीन बीघा, बच्चा का दो बीघा फसल डूब गई है।
दिन--- रिपोर्ट मीटर में
बुधवार-- 98.47
गुरुवार-- 99.30
शुक्रवार-- 99.76
शनिवार-- 100.14
रविवार-- 100.51
क्षेत्रीय लेखपालों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लगाया गया है। एक लेखपाल शुभम सिंह ने बाढ़ से प्रभावित क्षेत्र के हालात भी बताए हैं। खुद मौके पर जाकर निरीक्षण किया जाएगा। जिन किसानों की फसलों का नुकसान हुआ है, उसका सर्वे कराकर रिपोर्ट जिला प्रशासन के माध्यम से शासन को भेजी जाएगी। -- चंद्रशेखर, तहसीलदार बिंदकी
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पहाड़ों में हुई जोरदार बारिश से गंगा नदी एक बार फिर से उफान पर आ गई है। इससे गंगा की सहायक जिले की पांडु नदी का पानी भी ऊपर आ गया है। इससे नौ गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। खेतों में दो से तीन फुट पानी भर गया है। बिंदकी फार्म गांव किनारे से पानी का बहाव शुरू हो गया है। गंगा व पांडु नदी के तटवर्ती खेतों में
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किसानों ने मिर्च, लहसुन व हरी सब्जी की फसलें बोई थीं, जो बाढ़ की चपेट में आने से डूब गई हैं। बाढ़ नियंत्रण रिपोर्ट के अनुसार गंगा नदी में 100.86 मीटर पर खतरे का निशान है। सोमवार सुबह आठ बजे की रिपोर्ट में गंगा का जलस्तर 100.51 मीटर पर पहुंच गया है। अभी गंगा का जलस्तर बढ़ रहा है। इसी रफ्तार से पानी बढ़ता रहा, तो मंगलवार सुबह की रिपोर्ट में गंगा खतरे के निशान तक पहुंच जाएंगी।
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गंगा व पांडु नदी किनारे के खेतों में किसान सब्जी व मसाले की फसल तैयार करते हैं। जिनके पास ज्यादा खेती है, वह किराये पर एक साल के लिए खेत दे देते हैं। किराये पर खेती करने वाले किसान मिर्च, लहसुन, प्याज, हरी मटर, शिमला मिर्च, बंधा गोभी की फसलें तैयार करते हैं। इन फसलों की किसानों ने बुवाई भी करा दी थी, लेकिन बाढ़ आने से फसलें डूब गई हैं।
जिले में 10 हजार हेक्टेयर से अधिक गंगा किनारे का कटरी क्षेत्र है, जिसमें आसपास के गांवों के किसान हरी सब्जी व मिर्च, लहसुन, प्याज मसाला की खेती करते हैं, जिनको किसान कानपुर रामादेवी मंडी, बिंदकी, औंग, शिवराजपुर, चौडागरा कस्बा के बाजारों में बेचते हैं। बाढ़ से ज्यादातर सब्जी व मसाले की फसल नष्ट हो जाएंगी, मिर्च, प्याज व हरी सब्जियों के दाम बढ़ जाएंगे।
जाड़े का पुरवा, बेनीखेड़ा ,बेरीनारी, बिंदकीफार्म, अवसेरी खेड़ा, सदनहा, काली कुंडी, बड़ाखेड़ा, नया खेड़ा, मल्लूखेड़ा, दरियापुरबांगर, दरियापुर कटरी आदि।
धनियां, अदरक, सौंफ, पुदीना, मिर्च मूली, पालक, बैंगन, कुंदरू, परवल, तोरई, लौकी, कद्दू, कुर्ती, लोबिया, गाजर, गोभी और फूल की फसलें खराब हुई।
औसेरीखेड़ा बाबूराम चार बीघा, रामखेलावन सात बीघा, राम बहादुर दो बीघा, लल्लू तीन बीघा, छोटे डेढ़ बीघा, पंचम डेढ़ बीघा, राजेश दो बीघा, संतराम दो बीघा, तेज प्रताप तीन बीघा, बंटी ढाई बीघा, संतोष डेढ़ बीघा, राजाराम ढाई बीघा, रामकृष्ण दो बीघा, बिंदकी फार्म में किसान योगेंद्र का पांच बीघा, राजकुमार का सात बीघा, भोला का
चार बीघा, धर्मेंद्र का तीन बीघा, आंचल बहादुर का चार बीघा, दिनेश का दो बीघा, दरियापुर गांव के रामचंद्र का साढ़े तीन बीघा, रामखेलावन का तीन बीघा, सौनी का तीन बीघा, जगदीश का दो बीघा, आशापुर गांव के सुखराम पांच बीघा, राम बहादुर चार बीघा, भयंकर पांडे तीन बीघा, जाड़े का पुरवा के ननका का तीन बीघा, गोपी का चार बीघा, जौहरी का दो बीघा, दूर्गा का चार बीघा, सोनी का चार बीघा, रामखेलावन का तीन बीघा, बेनीखेड़ा गांव के किसान रामप्रताप पांच बीघा, शिवप्रताप का तीन बीघा, रामऔतार का चार बीघा, लाल बहादुर का दो बीघा, रामकिशोर का तीन बीघा, बच्चा का दो बीघा फसल डूब गई है।
दिन--- रिपोर्ट मीटर में
बुधवार-- 98.47
गुरुवार-- 99.30
शुक्रवार-- 99.76
शनिवार-- 100.14
रविवार-- 100.51
क्षेत्रीय लेखपालों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लगाया गया है। एक लेखपाल शुभम सिंह ने बाढ़ से प्रभावित क्षेत्र के हालात भी बताए हैं। खुद मौके पर जाकर निरीक्षण किया जाएगा। जिन किसानों की फसलों का नुकसान हुआ है, उसका सर्वे कराकर रिपोर्ट जिला प्रशासन के माध्यम से शासन को भेजी जाएगी। -- चंद्रशेखर, तहसीलदार बिंदकी

गंगा नदी में बाढ़ के बाद का दृष्य। संवाद- फोटो : FATEHPUR