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Fatehpur News: 50 लाख मुआवजा व सरकारी नौकरी की मांग पर रोका अंतिम संस्कार
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फाइल फोटो-38-शिक्षामित्र रामसुमेर रैदास। स्रोत परिजन
गाजीपुर (फतेहपुर)। 50 लाख रुपये मुआवजे और परिवार के एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी की मांग को लेकर शुक्रवार सुबह परिजन ने बीएलओ सुपरवाइजर (शिक्षामित्र) के शव का अंतिम संस्कार रोक दिया। परिजन ने एसआईआर कार्य के दबाव में आत्महत्या किए जाने का आरोप लगाया। अधिकारियों और विधायक के आश्वासन पर करीब आठ घंटे बाद पैतृक गांव बंवारा में दाह संस्कार किया गया।
गाजीपुर थाना क्षेत्र बंवारा निवासी रामसुमेर रैदास (40) पांच साल से नई बस्ती राधानगर थाने में मकान बनवाकर परिवार के साथ रहते थे। वह गांव के प्राथमिक विद्यालय में कार्यरत थे और बीएलओ सुपरवाइजर की हसवा ब्लॉक में ड्यूटी करते थे।
25 मार्च की भोर को टहलने निकले रामसुमेर घर नहीं लौटे। पुलिस ने रेलवे ट्रैक से शव बरामद किया लेकिन पहचान नहीं हो सकी। परिजन 26 मार्च को थाने गुमशुदगी की प्राथमिकी दर्ज कराने पहुंचे जहां फोटो से शव की पहचान हुई।
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बेटी पूर्वीय ने बताया कि 25 मार्च को सुबह 11 बजे पापा के नंबर पर फोन आया था। फोन करने वाले ने कहा कि एसआईआर काम पूरा नहीं होगा तो 26 मार्च को डीएम के सामने खड़ा करूंगा। पहले भी ऐसे फोन आते थे जिससे पापा तनाव में थे। देर रात तक काम करने के दबाव में पापा की जान गई।
परिजनों ने 50 लाख मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग पर शव का अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया। गाजीपुर, राधानगर, जाफरगंज व सीओ जाफरगंज मौके पर भारी पुलिस बल के साथ एसडीएम अनामिका श्रीवास्तव, तहसीलदार, दो नायब तहसीलदार और राजस्व अधिकारी पहुंचे।
शिक्षामित्र संगठन के अध्यक्ष विजय सिंह ने विधायक विकास गुप्ता से फोन पर वार्ता की। विधायक ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर परिवार की मांग पूरी कराने का आश्वासन दिया। इसके बाद दोपहर तीन बजे शव का अंतिम संस्कार हुआ। सीओ बृजमोहन राय ने बताया कि शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया है और जिला प्रशासन परिवार की हर संभव मदद करेगा।
10 साल पहले रामसुमेर ने दूसरी शादी की थी
रामसुमेर की पहली पत्नी मंजू देवी की लगभग 17 साल पहले मौत हो गई थी। उनसे दो बेटियां सुगंधा और पूर्वीय हैं। 2016 में उन्होंने कानपुर पनकी की रेशमा देवी से दूसरी शादी की जिससे एक बेटी यशस्वी है।
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गाजीपुर थाना क्षेत्र बंवारा निवासी रामसुमेर रैदास (40) पांच साल से नई बस्ती राधानगर थाने में मकान बनवाकर परिवार के साथ रहते थे। वह गांव के प्राथमिक विद्यालय में कार्यरत थे और बीएलओ सुपरवाइजर की हसवा ब्लॉक में ड्यूटी करते थे।
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25 मार्च की भोर को टहलने निकले रामसुमेर घर नहीं लौटे। पुलिस ने रेलवे ट्रैक से शव बरामद किया लेकिन पहचान नहीं हो सकी। परिजन 26 मार्च को थाने गुमशुदगी की प्राथमिकी दर्ज कराने पहुंचे जहां फोटो से शव की पहचान हुई।
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बेटी पूर्वीय ने बताया कि 25 मार्च को सुबह 11 बजे पापा के नंबर पर फोन आया था। फोन करने वाले ने कहा कि एसआईआर काम पूरा नहीं होगा तो 26 मार्च को डीएम के सामने खड़ा करूंगा। पहले भी ऐसे फोन आते थे जिससे पापा तनाव में थे। देर रात तक काम करने के दबाव में पापा की जान गई।
परिजनों ने 50 लाख मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग पर शव का अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया। गाजीपुर, राधानगर, जाफरगंज व सीओ जाफरगंज मौके पर भारी पुलिस बल के साथ एसडीएम अनामिका श्रीवास्तव, तहसीलदार, दो नायब तहसीलदार और राजस्व अधिकारी पहुंचे।
शिक्षामित्र संगठन के अध्यक्ष विजय सिंह ने विधायक विकास गुप्ता से फोन पर वार्ता की। विधायक ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर परिवार की मांग पूरी कराने का आश्वासन दिया। इसके बाद दोपहर तीन बजे शव का अंतिम संस्कार हुआ। सीओ बृजमोहन राय ने बताया कि शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया है और जिला प्रशासन परिवार की हर संभव मदद करेगा।
10 साल पहले रामसुमेर ने दूसरी शादी की थी
रामसुमेर की पहली पत्नी मंजू देवी की लगभग 17 साल पहले मौत हो गई थी। उनसे दो बेटियां सुगंधा और पूर्वीय हैं। 2016 में उन्होंने कानपुर पनकी की रेशमा देवी से दूसरी शादी की जिससे एक बेटी यशस्वी है।

फाइल फोटो-38-शिक्षामित्र रामसुमेर रैदास। स्रोत परिजन

फाइल फोटो-38-शिक्षामित्र रामसुमेर रैदास। स्रोत परिजन

फाइल फोटो-38-शिक्षामित्र रामसुमेर रैदास। स्रोत परिजन