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Fatehpur News: औंग में फिर मंडराया बाढ़ का खतरा, 12 गांवों के ग्रामीण सहमे
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फोटो-33-सदनहा मार्ग में भरा बाढ़ का पानी। संवाद
औंग (फतेहपुर)। गंगा नदी का जलस्तर एक बार फिर तेजी से बढ़ने लगा है। इससे मलवां ब्लॉक के औंग क्षेत्र के करीब 12 गांवों में बाढ़ का खतरा फिर से मंडराने लगा है।
खासकर आशापुर, अभयपुर, संदनहा, बड़ा खेड़ा और बसंत का डेरा जैसे निचले इलाकों में पानी घरों और रास्तों तक पहुंच गया है। इससे ग्रामीणों को पलायन की चिंता सताने लगी है।
गंगा का जलस्तर बुधवार को खतरे के निशान 100.86 मीटर के करीब 100.82 मीटर तक पहुंच गया। रात में इसके और बढ़ने की संभावना जताई गई है। संदनहा गांव के पास स्थित श्मशान घाट और बसंत के डेरा में पानी घुसने की पुष्टि ग्रामीणों ने की है।
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बिंदकी फार्म और संदनहा गांवों को जोड़ने वाले मुख्य रास्ते पानी में डूब चुके हैं। इससे आवाजाही पूरी तरह से ठप हो गई है। किसान जो हाल ही में राहत शिविरों से लौटकर खेती की तैयारी में जुटे थे। अब दोबारा फसल बर्बादी और पलायन की स्थिति का सामना कर रहे हैं।
बिंदकी फार्म निवासी अचल बहादुर, मदारपुर निवासी परशुराम निषाद और दरियापुर निवासी रामचंद्र निषाद ने बताया कि जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। इससे ग्रामीणों में भय का माहौल है।
सदनहा नई बस्ती निवासी राजाराम निषाद ने बताया कि पिछली बाढ़ में फसल पूरी तरह से डूब चुकी थी। अब धान की बची-खुची फसल भी खतरे में है। वर्षों से कच्चे मकान में रहने के बावजूद उन्हें अब तक सरकारी आवास योजना का लाभ नहीं मिला।
बसंत निषाद ने प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि हर साल बाढ़ झेलने के बावजूद राहत और पुनर्वास की व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ है। उधर, राजस्व निरीक्षक शुभम सिंह ने बताया कि गंगा का जलस्तर बढ़ जरूर रहा है, लेकिन अभी खतरे के निशान से नीचे है। स्थिति नियंत्रण में है।
यदि दोबारा बाढ़ आती है तो इसके लिए पहले से ही पूरी तरह से तैयारी की जा रही है। प्रशासन किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार है।
अचलेश सिंह, तहसीलदार बिंदकी।
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खासकर आशापुर, अभयपुर, संदनहा, बड़ा खेड़ा और बसंत का डेरा जैसे निचले इलाकों में पानी घरों और रास्तों तक पहुंच गया है। इससे ग्रामीणों को पलायन की चिंता सताने लगी है।
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गंगा का जलस्तर बुधवार को खतरे के निशान 100.86 मीटर के करीब 100.82 मीटर तक पहुंच गया। रात में इसके और बढ़ने की संभावना जताई गई है। संदनहा गांव के पास स्थित श्मशान घाट और बसंत के डेरा में पानी घुसने की पुष्टि ग्रामीणों ने की है।
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बिंदकी फार्म और संदनहा गांवों को जोड़ने वाले मुख्य रास्ते पानी में डूब चुके हैं। इससे आवाजाही पूरी तरह से ठप हो गई है। किसान जो हाल ही में राहत शिविरों से लौटकर खेती की तैयारी में जुटे थे। अब दोबारा फसल बर्बादी और पलायन की स्थिति का सामना कर रहे हैं।
बिंदकी फार्म निवासी अचल बहादुर, मदारपुर निवासी परशुराम निषाद और दरियापुर निवासी रामचंद्र निषाद ने बताया कि जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। इससे ग्रामीणों में भय का माहौल है।
सदनहा नई बस्ती निवासी राजाराम निषाद ने बताया कि पिछली बाढ़ में फसल पूरी तरह से डूब चुकी थी। अब धान की बची-खुची फसल भी खतरे में है। वर्षों से कच्चे मकान में रहने के बावजूद उन्हें अब तक सरकारी आवास योजना का लाभ नहीं मिला।
बसंत निषाद ने प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि हर साल बाढ़ झेलने के बावजूद राहत और पुनर्वास की व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ है। उधर, राजस्व निरीक्षक शुभम सिंह ने बताया कि गंगा का जलस्तर बढ़ जरूर रहा है, लेकिन अभी खतरे के निशान से नीचे है। स्थिति नियंत्रण में है।
यदि दोबारा बाढ़ आती है तो इसके लिए पहले से ही पूरी तरह से तैयारी की जा रही है। प्रशासन किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार है।
अचलेश सिंह, तहसीलदार बिंदकी।