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Fatehpur News: पहले हत्यारों ने अब पुलिस छीन रही परिवार की खुशियां
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फतेहपुर। रायबरेली में एक अक्तूबर की रात भीड़ के हाथों पिटाई से जान गंवाने वाले हरिओम के परिवार की खुशियों पर अब पुलिस ने ग्रहण लगा रखा है। परिवार पर पुलिस का पहरा पांचवें दिन भी जारी है। न किसी तो भीतर जाने दिया जा रहा है और न बाहर निकलने दिया जा रहा है।
घर पर मौजूद हरिओम की बड़ी बहन के चार छोटे बच्चे दीपावली को लेकर पटाखों और मिठाई की मांग कर रहे हैं, लेकिन परिवार उन बच्चों को भी ये भी खुशी नहीं दे पा रहा है। परिजन ने बताया कि पुलिस वालों से कई बार कहा गया लेकिन निकलने नहीं दिया जा रहा है। घर से सिर्फ दामाद को वह भी दिन में एक बार निकलने की अनुमति है।
बता दें कि जिस दिन से राहुल गांधी के आने का कार्यक्रम तय हुआ था, तभी से पुलिस ने पूरे परिवार को पहरे में रखा हुआ है। इस बात का आरोप खुद राहुल गांधी ने लगाया था। शनिवार को कांग्रेस की ओर से भेजे अधिवक्ताओं को भी परिवार से नहीं मिलने दिया गया था।
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इस पर सीओ से अधिवक्ताओं की बहस भी हुई थी। परिवार के लोगों का कहना है कि उन्हें खाने-पीने का सामान तक लेने के लिए बड़ी मुश्किल से बाहर निकलने दिया जाता है।
पुलिस रात 10 बजे के बाद खाना भिजवाती है, तब तक बच्चे भी सो जाते हैं। हम लोगों के लिए तो त्योहार का फिलहाल कोई मतलब नहीं है, लेकिन बच्चे पटाखे और मिठाई की जिद कर रहे हैं। ऐसे में बच्चों का मन कैसे मार दें, ये बात पुलिसकर्मी समझने को तैयार ही नहीं हैं।
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घर पर मौजूद हरिओम की बड़ी बहन के चार छोटे बच्चे दीपावली को लेकर पटाखों और मिठाई की मांग कर रहे हैं, लेकिन परिवार उन बच्चों को भी ये भी खुशी नहीं दे पा रहा है। परिजन ने बताया कि पुलिस वालों से कई बार कहा गया लेकिन निकलने नहीं दिया जा रहा है। घर से सिर्फ दामाद को वह भी दिन में एक बार निकलने की अनुमति है।
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बता दें कि जिस दिन से राहुल गांधी के आने का कार्यक्रम तय हुआ था, तभी से पुलिस ने पूरे परिवार को पहरे में रखा हुआ है। इस बात का आरोप खुद राहुल गांधी ने लगाया था। शनिवार को कांग्रेस की ओर से भेजे अधिवक्ताओं को भी परिवार से नहीं मिलने दिया गया था।
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इस पर सीओ से अधिवक्ताओं की बहस भी हुई थी। परिवार के लोगों का कहना है कि उन्हें खाने-पीने का सामान तक लेने के लिए बड़ी मुश्किल से बाहर निकलने दिया जाता है।
पुलिस रात 10 बजे के बाद खाना भिजवाती है, तब तक बच्चे भी सो जाते हैं। हम लोगों के लिए तो त्योहार का फिलहाल कोई मतलब नहीं है, लेकिन बच्चे पटाखे और मिठाई की जिद कर रहे हैं। ऐसे में बच्चों का मन कैसे मार दें, ये बात पुलिसकर्मी समझने को तैयार ही नहीं हैं।