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कौन कहता है कि आसमां में सुराग नहीं हो सकता...

Sun, 16 Jan 2022 11:12 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 16 Jan 2022 11:12 PM IST
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fathepur news,Who says there is no hole in the sky..
सुनील श्रीवास्तव। संवाद - फोटो : FATEHPUR
फतेहपुर। कौन कहता है कि आसमां में छेद नहीं होता, एक पत्थर तो जरा जोर से उछालो यारो...। इस कहावत को चरितार्थ करके दिखाया है, सुनील श्रीवास्तव दादा ने। साधारण परिवार में जन्मे सुनील श्रीवास्तव ने फुटपाथ पर दुकान लगाने से अपना जीवन शुरू किया और आज तीन जिला स्तरीय स्कूलों के मालिक हैं।
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शहर के चौधराना मोहल्ले के रहने वाले सुनील श्रीवास्तव चार भाइयों में दूसरे नंबर के हैं। साधारण परिवार में जन्म होने और परिवार बढ़ा होने के कारण के कारण रहन-सहन और कामकाज बहुत अच्छा नहीं था।
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किसी तरह से उनके पिता ने परिवार का पालन पोषण किया। बढ़े होने पर उन्होंने अपने जीवन के सफर की शुरूआत 1985 में फुटपाथ पर दुकान लगाने से शुरू की। इससे होने वाली कमाई से उन्होंने 1988 में एलएलबी की पढ़ाई पूरी की।
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इसके बाद कचहरी में 1990 तक वकालत की, लेकिन उनका मन नहीं लगा। वकालत के दौरान विकास भवन के अधिकारियों के संपर्क में आए, वकालत के साथ कार्यालयों में स्टेशनरी की आपूर्ति शुरू कर दी।
इस दौरान गांवों में बनने वाले शौचालय निर्माण का भी काम किया। 1991 में जिले की लोकसभा सीट से सांसद वीपी सिंह प्रधानमंत्री बने। तो उनकी निधि से कुछ छोटे-मोटे काम कि
ए। उन्होंने 1996 में शहर के चित्रांश नगर में 50 फीट लंबा और इतना ही चौड़ा प्लाट खरीदा। प्लाट में टीनशेड डालकर प्राथमिक स्तर के स्कूल की शुरुआत की।
स्कूल में पढ़ाने का जिम्मा स्वयं के साथ पत्नी रेखा श्रीवास्तव, छोटे भाई अरविंद की पत्नी शशि श्रीवास्तव और सबसे छोटे भाई संजय श्रीवास्तव की पत्नी अनुराधा श्रीवास्तव ने संभाला। पहले सत्र में 80 बच्चों ने प्रवेश लिया।
इसके बाद पूरे परिवार की मेहनत रंग लाई और स्कूल चल निकला। 2002 में सीबीएसई से मान्यता लेकर योग्य शिक्षकों की नियुक्ति की और वर्तमान समय में यह स्कूल चिल्ड्रेन पब्लिक सीनियर सेकेंड्री स्कूल चित्रांशनगर के नाम से संचालित हैं।
इसमें करीब 2200 बच्चे हैं। सुनील श्रीवास्तव का सफर यहीं नहीं रुका। उन्होंने 2005 बिंदकी में इसी नाम से स्कूल खोला। इसमें 1300 बच्चे पढ़ रहे हैं। दो साल पहले इसी नाम से बकेवर में स्कूल खोला है।
खास बात यह है कि अभावग्रस्त सफर खत्म होने के बाद इन्होंने अपने स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों का निशुल्क प्रवेश देना शुरू किया, जो अभी तक चल रहा है। इसके साथ गरीब बेटियों के हाथ पीले करने में सहयोग प्रदान करना इनके लिए आम बात है। अब यह नाम जिले में सुनील दादा के नाम से जाने जाते हैं।

दिल्ली, गुडगांव में चला रहे प्रशिक्षण केंद्र
सुनील श्रीवास्तव जिले के शिक्षा की बगवानी अपने सबसे छोटे भाई संजय श्रीवास्तव को सौंप दिल्ली और गुडगांव में ट्रेनिंग सेंटर चला रहे हैं। यहां पर ट्वॉफी एंड टापिक, ओल्ड एंड होम इन ऋषिकेश नाम से प्रशिक्षण केंद्र चला रहे हैं।
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