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किसान को समृद्ध कर रहा ताइवानी पपीता
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शिवराजपुर गांव में पपीता की फसल। संवाद
- फोटो : FATEHPUR
औंग। मलवां ब्लाक के शिवराजपुर गांव का प्रगतिशील किसान सूरजपाल यादव ताइवानी पपीते रेड लेडी 786 की खेती करके हर महीने एक लाख का मुनाफा का रहे हैं। एक हेक्टेयर फसल से किसान ने नौ महीने में करीब नौ लाख का मुनाफा कमाया है, जो अन्य किसानों के लिए मिसाल है। पपीते की खेत देखने के लिए आसपास के जिलों से लोग आते हैं।
सूरजपाल यादव ने बताया कि एक हेक्टेयर पपीता की नर्सरी तैयार करने के लिए 150 ग्राम बीज बोया। लखनऊ की माडर्न नर्सरी फर्म से ताइवानी पपीता रेड लेड़ी 786 का बीज खरीदा।
10 ग्राम बीज के एक पैकेट की कीमत चार हजार रुपये है। एक हेक्टेयर में 60 हजार का बीज लगा। जुलाई 2020 में पॉलिथीन में बीज रोपण कर खेत में छाया बनाकर रखा गया था। दो माह बाद सितंबर में नर्सरी तैयार होने के बाद खेत में पौधरोपण किया।
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उन्होंने एक पौध से दूसरी पौध की दूरी आठ फीट रखी। इसके बीच में ट्रैक्टर से जुताई भी होती रहे। सात माह में पांच फीट ऊंचाई के पेड़ में मार्च 2021 में पपीते की पहली फसल तैयार हुई।
एक हेक्टेयर में दो लाख 25 हजार निराई, गुड़ाई, जैविक खाद, कीट प्रबंधन आदि में खर्च हुआ। मार्च से लेकर अब तक प्रतिदिन 200 किलो पपीता निकल रहा है।
इसकी कानपुर के चकरपुर मंडी में कीमत चार हजार है। इस तरह मंडी के खर्चे काटकर हर महीने एक लाख रुपये का उन्हें मुनाफा हो रहा है। नौ महीने से प्रतिदिन फसल बाजार जा रही है। अब तक नौ लाख रुपये की आमदनी हो चुकी है।
औषधि गुण से युक्त है ताइवानी पपीता
रेड लेडी 786 ताइवानी पपीता औषधीय गुण से परिपूर्ण है। इसमें बीज नहीं होता। ऊपरी भाग पीले रंग का और अंदर का भाग सुर्ख लाल होता है। यह पपीता पौष्टिक गुणों से संपन्न है।
यह पपीता रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए उत्तम है। स्वाद में भी पपीता अच्छा है। इस पपीते में पपाया रिंग स्कॉट वायरस का प्रकोप नहीं होता। इससे ज्यादा दिनों तक पपीते के फल में औषधीय गुण बने रहते हैं। पेड़ से टूटने के बाद पपीता ज्यादा दिन तक सुरक्षित रहता है।
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सूरजपाल यादव ने बताया कि एक हेक्टेयर पपीता की नर्सरी तैयार करने के लिए 150 ग्राम बीज बोया। लखनऊ की माडर्न नर्सरी फर्म से ताइवानी पपीता रेड लेड़ी 786 का बीज खरीदा।
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10 ग्राम बीज के एक पैकेट की कीमत चार हजार रुपये है। एक हेक्टेयर में 60 हजार का बीज लगा। जुलाई 2020 में पॉलिथीन में बीज रोपण कर खेत में छाया बनाकर रखा गया था। दो माह बाद सितंबर में नर्सरी तैयार होने के बाद खेत में पौधरोपण किया।
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उन्होंने एक पौध से दूसरी पौध की दूरी आठ फीट रखी। इसके बीच में ट्रैक्टर से जुताई भी होती रहे। सात माह में पांच फीट ऊंचाई के पेड़ में मार्च 2021 में पपीते की पहली फसल तैयार हुई।
एक हेक्टेयर में दो लाख 25 हजार निराई, गुड़ाई, जैविक खाद, कीट प्रबंधन आदि में खर्च हुआ। मार्च से लेकर अब तक प्रतिदिन 200 किलो पपीता निकल रहा है।
इसकी कानपुर के चकरपुर मंडी में कीमत चार हजार है। इस तरह मंडी के खर्चे काटकर हर महीने एक लाख रुपये का उन्हें मुनाफा हो रहा है। नौ महीने से प्रतिदिन फसल बाजार जा रही है। अब तक नौ लाख रुपये की आमदनी हो चुकी है।
औषधि गुण से युक्त है ताइवानी पपीता
रेड लेडी 786 ताइवानी पपीता औषधीय गुण से परिपूर्ण है। इसमें बीज नहीं होता। ऊपरी भाग पीले रंग का और अंदर का भाग सुर्ख लाल होता है। यह पपीता पौष्टिक गुणों से संपन्न है।
यह पपीता रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए उत्तम है। स्वाद में भी पपीता अच्छा है। इस पपीते में पपाया रिंग स्कॉट वायरस का प्रकोप नहीं होता। इससे ज्यादा दिनों तक पपीते के फल में औषधीय गुण बने रहते हैं। पेड़ से टूटने के बाद पपीता ज्यादा दिन तक सुरक्षित रहता है।