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थानों की पुलसिस ने सीएमओ की तहरीर कूड़े की ढेर में डाली
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फतेहपुर। स्वास्थ्य विभाग ने अपंजीकृत नर्सिंग होम के खिलाफ मुकदमे का पत्र दो थानों को भेजा था। जिसे पुलिस ने कूड़े में डाल रखा है। एफआईआर न होने से संचालक बेेखौफ हैं। वह स्वास्थ्य विभाग को ठेंगा दिखाकर नर्सिंग होम का संचालन कर रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से अभियान चलाकर 28 अगस्त को अवैध नर्सिंग होम के खिलाफ छापामारी की थी। छापामारी में शहर कोतवाली के लोधीगंज इलाके स्थिति दीप नर्सिंग होम और आलोक नर्सिंग होम को रजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्र और डाक्टर डिग्री न होने पर नोटिस दी गई थी।
नोटिस के बाद भी आलोक नर्सिंग होम के संचालक राजेंद्र प्रसाद और दीप नर्सिंग होम के प्रबंधक बाबू सिंह की ओर कोई कागजात संचालक नहीं दिखा सके थे।
इस पर नर्सिंग होम के खिलाफ नोडल अधिकारी/ झोलाछाप प्रभारी डा. एसपी जौहरी ने कोतवाली में चार अक्तूबर को तहरीर दी थी। वहीं 19 अगस्त थरियांव स्थिति अवनी नर्सिंग होम को अवैध संचालन में पकड़ा गया था।
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नर्सिंग होम के प्रबंधक अर्जुन सिंह ने भी नोटिस के बाद कोई जवाब नहीं दिया था। इनके खिलाफ डॉ. एसपी जौहरी की ओर से थरियांव थाने में छह अक्तूबर को तहरीर दी गई थी।
टीम ने छापेमारी के दौरान नर्सिंग होम से स्टेथोस्कोप, बीपी स्टूमेंट, पल्स आक्सीमीटर भी बरामद कर पुलिस को सौंपे थे। इसके बाद भी मुकदमा नहीं दर्ज किया गया।
उनकी ओर से तहरीर संबंधित थानों में दी जा चुकी है। मुकदमा दर्ज नहीं किए जाने की शिकायत डीएम से की गई है। पुलिस मुकदमा दर्ज करने में क्यों लेट लतीफी कर रही है इसकी जानकारी नहीं है। - डॉ.राजेंद्र सिंह, सीएमओ
मामले उनकी जानकारी में नहीं आया है। तहरीर के बारे में थानाध्यक्षों से जानकारी ली जाएगी और मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। - राजेश कुमार, एएसपी
नाम बदलकर चलाते नर्सिंग होम
जिले में अवैध नर्सिंग होम संचालकों को किसी का खौफ नहीं हैं। संचालक विभागीय मिलीभगत का खूब फायदा उठाते हैं। संचालक पकड़े जाने और नोटिस के बाद नर्सिंग होम का स्थान और नाम परिवर्तित कर देते हैं। जिसके बाद उनकी ओर कोई ध्यान नहीं देता है। इसके बाद वह नर्सिंग होमों को संचालन करते हैं।
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स्वास्थ्य विभाग की ओर से अभियान चलाकर 28 अगस्त को अवैध नर्सिंग होम के खिलाफ छापामारी की थी। छापामारी में शहर कोतवाली के लोधीगंज इलाके स्थिति दीप नर्सिंग होम और आलोक नर्सिंग होम को रजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्र और डाक्टर डिग्री न होने पर नोटिस दी गई थी।
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नोटिस के बाद भी आलोक नर्सिंग होम के संचालक राजेंद्र प्रसाद और दीप नर्सिंग होम के प्रबंधक बाबू सिंह की ओर कोई कागजात संचालक नहीं दिखा सके थे।
इस पर नर्सिंग होम के खिलाफ नोडल अधिकारी/ झोलाछाप प्रभारी डा. एसपी जौहरी ने कोतवाली में चार अक्तूबर को तहरीर दी थी। वहीं 19 अगस्त थरियांव स्थिति अवनी नर्सिंग होम को अवैध संचालन में पकड़ा गया था।
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नर्सिंग होम के प्रबंधक अर्जुन सिंह ने भी नोटिस के बाद कोई जवाब नहीं दिया था। इनके खिलाफ डॉ. एसपी जौहरी की ओर से थरियांव थाने में छह अक्तूबर को तहरीर दी गई थी।
टीम ने छापेमारी के दौरान नर्सिंग होम से स्टेथोस्कोप, बीपी स्टूमेंट, पल्स आक्सीमीटर भी बरामद कर पुलिस को सौंपे थे। इसके बाद भी मुकदमा नहीं दर्ज किया गया।
उनकी ओर से तहरीर संबंधित थानों में दी जा चुकी है। मुकदमा दर्ज नहीं किए जाने की शिकायत डीएम से की गई है। पुलिस मुकदमा दर्ज करने में क्यों लेट लतीफी कर रही है इसकी जानकारी नहीं है। - डॉ.राजेंद्र सिंह, सीएमओ
मामले उनकी जानकारी में नहीं आया है। तहरीर के बारे में थानाध्यक्षों से जानकारी ली जाएगी और मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। - राजेश कुमार, एएसपी
नाम बदलकर चलाते नर्सिंग होम
जिले में अवैध नर्सिंग होम संचालकों को किसी का खौफ नहीं हैं। संचालक विभागीय मिलीभगत का खूब फायदा उठाते हैं। संचालक पकड़े जाने और नोटिस के बाद नर्सिंग होम का स्थान और नाम परिवर्तित कर देते हैं। जिसके बाद उनकी ओर कोई ध्यान नहीं देता है। इसके बाद वह नर्सिंग होमों को संचालन करते हैं।