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993 मुकदमें बिजली चोरी के और विवेचक सिऌऱ् एक
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हाईडिल कालोनी का बिजली थाना।
- फोटो : FATEHPUR
फतेहपुर। बिजली चोरी रोकने और राजस्व बढ़ाने के लिए हर जिले में खोले गए बिजली थाने उम्मीदों पर खरे नहीं उतर रहे हैं। इसके पीछे बड़ा कारण कम स्टाफ की कमी है।
आंकड़ों पर गौर करें तो हालात चौंकाने वाले हैं। जानकार आश्चर्य होगा कि 15 महीने पहले खुले बिजली थाने में अभी तक 993 बिजली चोरी के मुकदमे दर्ज हो चुके हैं लेकिन इनकी विवेचना करने के लिए अधिकारी सिर्फ एक है।
यानि एक विवेचक पर 993 मुकदमों का बोझ है। यही कारण भी है कि अभी तक करीब 70 फीसदी विवेचनाएं लंबित हैं। बिजली चोरी की रिपोर्ट पहले संबंधित क्षेत्र के थाने में ही दर्ज कराई जाती थी, जिनकी विवेचना भी सिविल पुलिस करती थी।
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अक्तूबर 2019 में हाइड्रिल कालोनी (बिजली विभाग के आवास) में बिजली थाना खुला। जिसके बाद बिजली चोरी के सारे मामले इस थाने में दर्ज होने लगे हैं।
बिजली चोरी पकड़ने के लिए अवर अभियंता, एसडीओ के साथ अब बिजली थाने की पुलिस भी जाती है। जिले में बिजली चोरी का मामला कहीं भी पकड़ा जाए। रिपोर्ट बिजली थाने में ही दर्ज होती है।
इसके साथ ही विजिलेंस टीम भी कहीं छापा मारती है तो रिपोर्ट बिजली थाने में ही दर्ज होती है। थाना खुलने के बाद 15 महीनों के भीतर अब तक बिजली के 993 केस दर्ज किए गए हैं। अभी भी बिजली थाने में करीब 696 मामले लंबित हैं। इसके अलावा थाने में एक हेड कांस्टेबिल व दो कांस्टेबिल, एक ऑपरेटर और एक एसओ हैं।
297 मामलों में लगी एफआर, जमा कराए 60 लाख
सिविल थानों में पुलिस का जोर जहां चोरी जैसे मामलों में चार्टशीट लगाने पर रहता है। वहीं बिजली थाने में पुलिस आमतौर पर फाइनल रिपोर्ट लगाकर मामले को निपटा देती है।
वजह ये है कि अगर पुलिस चार्जशीज लगाए तो बिजली विभाग को राजस्व मिलने की उम्मीद खत्म हो जाएगी। लिहाजा विवेचक का प्रयास रहता है कि बिजली विभाग ने जो जुर्माना लगाया है, आरोपी उसे जमा कर दें। जुर्माना के साथ बिजली का बकाया जमा होते ही पुलिस फाइनल रिपोर्ट लगाकर मुकदमे को खत्म कर देती है।
बिजली थाने में दर्ज 993 मामलों मेें से पुलिस ने 297 में फाइनल रिपोर्ट लगाई है। इन मामलों में आरोपियों ने 60 लाख 1479 रुपये जमा कर दिए। बताया जा रहा है कि अभी डेढ़-दो सौ मामलों में और फाइनल रिपोर्ट लगनी है। इससे बिजली विभाग को 30 लाख रुपये का और राजस्व प्राप्त होगा। स्टाफ की कमी के कारण इन मामलों को चढ़ाना अभी बाकी रह गया है।
कोट
जिले भर में बिजली चोरी के मुकदमे हाइड्रिल कालोनी के बिजली थाने में दर्ज होते हैं। पहले कोरोना काल की वजह से विवेचनाएं लंबित रहीं। अब मामलों की विवेचना तेजी से की जा रही हैं।
बिजली थाने में स्टाफ की कमी होने की वजह से विवेचनाएं निल नहीं हो पा रही हैं। बिजली विभाग में जो जुर्माना की राशि जमा करने के बाद रसीद लेकर आते हैं, उनमें एफआर लगा दी जाती है। - सुशील कुमार, एसओ बिजली थाना।
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आंकड़ों पर गौर करें तो हालात चौंकाने वाले हैं। जानकार आश्चर्य होगा कि 15 महीने पहले खुले बिजली थाने में अभी तक 993 बिजली चोरी के मुकदमे दर्ज हो चुके हैं लेकिन इनकी विवेचना करने के लिए अधिकारी सिर्फ एक है।
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यानि एक विवेचक पर 993 मुकदमों का बोझ है। यही कारण भी है कि अभी तक करीब 70 फीसदी विवेचनाएं लंबित हैं। बिजली चोरी की रिपोर्ट पहले संबंधित क्षेत्र के थाने में ही दर्ज कराई जाती थी, जिनकी विवेचना भी सिविल पुलिस करती थी।
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अक्तूबर 2019 में हाइड्रिल कालोनी (बिजली विभाग के आवास) में बिजली थाना खुला। जिसके बाद बिजली चोरी के सारे मामले इस थाने में दर्ज होने लगे हैं।
बिजली चोरी पकड़ने के लिए अवर अभियंता, एसडीओ के साथ अब बिजली थाने की पुलिस भी जाती है। जिले में बिजली चोरी का मामला कहीं भी पकड़ा जाए। रिपोर्ट बिजली थाने में ही दर्ज होती है।
इसके साथ ही विजिलेंस टीम भी कहीं छापा मारती है तो रिपोर्ट बिजली थाने में ही दर्ज होती है। थाना खुलने के बाद 15 महीनों के भीतर अब तक बिजली के 993 केस दर्ज किए गए हैं। अभी भी बिजली थाने में करीब 696 मामले लंबित हैं। इसके अलावा थाने में एक हेड कांस्टेबिल व दो कांस्टेबिल, एक ऑपरेटर और एक एसओ हैं।
297 मामलों में लगी एफआर, जमा कराए 60 लाख
सिविल थानों में पुलिस का जोर जहां चोरी जैसे मामलों में चार्टशीट लगाने पर रहता है। वहीं बिजली थाने में पुलिस आमतौर पर फाइनल रिपोर्ट लगाकर मामले को निपटा देती है।
वजह ये है कि अगर पुलिस चार्जशीज लगाए तो बिजली विभाग को राजस्व मिलने की उम्मीद खत्म हो जाएगी। लिहाजा विवेचक का प्रयास रहता है कि बिजली विभाग ने जो जुर्माना लगाया है, आरोपी उसे जमा कर दें। जुर्माना के साथ बिजली का बकाया जमा होते ही पुलिस फाइनल रिपोर्ट लगाकर मुकदमे को खत्म कर देती है।
बिजली थाने में दर्ज 993 मामलों मेें से पुलिस ने 297 में फाइनल रिपोर्ट लगाई है। इन मामलों में आरोपियों ने 60 लाख 1479 रुपये जमा कर दिए। बताया जा रहा है कि अभी डेढ़-दो सौ मामलों में और फाइनल रिपोर्ट लगनी है। इससे बिजली विभाग को 30 लाख रुपये का और राजस्व प्राप्त होगा। स्टाफ की कमी के कारण इन मामलों को चढ़ाना अभी बाकी रह गया है।
कोट
जिले भर में बिजली चोरी के मुकदमे हाइड्रिल कालोनी के बिजली थाने में दर्ज होते हैं। पहले कोरोना काल की वजह से विवेचनाएं लंबित रहीं। अब मामलों की विवेचना तेजी से की जा रही हैं।
बिजली थाने में स्टाफ की कमी होने की वजह से विवेचनाएं निल नहीं हो पा रही हैं। बिजली विभाग में जो जुर्माना की राशि जमा करने के बाद रसीद लेकर आते हैं, उनमें एफआर लगा दी जाती है। - सुशील कुमार, एसओ बिजली थाना।