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पहली बार जिले के दूसरे नंबर की ग्राम पंचायत में अनुसूचित जाति का बनेगा प्रधान
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फतेहपुर। जिले की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत गढ़ा के बाद दूसरे नंबर पर आने वाली सरकंडी की सत्ता इस बार अनुसूचित जाति के हाथ में होगी। यह ग्राम पंचायत क्षेत्रफल के मामले में विजयीपुर ब्लाक की गढ़ा से एक वर्ग किमी कम है। परिसीमन में इस बार यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित की गई है।
विजयीपुर ब्लाक की सीमा से जुड़ी असोथर ब्लाक की सरकंडी ग्राम पंचायत नौ किमी लंबाई और सात किमी चौड़ाई वाले क्षेत्र में बसी है। 359 मजरों वाली सरकंडी ग्राम पंचायत में 51 हजार 900 बीघे खेती योग्य जमीन है। कुल क्षेत्रपल 63 वर्ग किमी है। इस समय यहां पर करीब 13 हजार मतदाता है। वहीं गढ़ा की बात करें तो यह जिले की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत है। यह 64 वर्ग किमी क्षेत्रफल में फैली है। यहां 15 हजार मतदाता हैं।
निषाद बाहुल्य सरकंडी ग्राम पंचायत का गठन होने के बाद पहली बार नत्थू निषाद प्रधान बने थे। इसके बाद 16 साल शिवप्रसाद सिंह प्रधान रहे। फिर क्षत्रिय समाज के तिलस्म को ग्राम पंचायत के गोकरण निषाद ने तोड़ा और प्रधान बने। गोकरण के बाद फिर ग्राम पंचायत के पहले प्रधान नत्थू निषाद को मतदाताओं ने प्रधान बनाया। फिर रामऔतार मौर्य, सियावती पत्नी रामऔतार निषाद को प्रधान पद मिला।
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इसके बाद दो बार संतोष द्विवेदी प्रधान रहे। फिर पिछड़ी सीट हुई तो प्रेमशंकर निषाद को जनता ने प्रधान बनाया। अब फिर से प्रधानी की डुगडुगी बज चुकी है और अनुसूचित जाति के लिए सीट आरक्षित कर दी गई है। ऐसे में साफ है कि पहली बार सरकंडी ग्राम पंचायत की बागडोर अनुसूचित जाति के हाथ में रहेगी। इसके लिए राजनीति के खिलाड़ियों ने गोटें बिछानी शुरू कर दी है। गाम पंचायत में धोबी, रैदास, पासवान, कोरी, बाल्मीकि समाज के मतदाता हैं। इन्हीं जातियों में से किसी एक के सिर पर प्रधानी का ताज सजेगा।
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विजयीपुर ब्लाक की सीमा से जुड़ी असोथर ब्लाक की सरकंडी ग्राम पंचायत नौ किमी लंबाई और सात किमी चौड़ाई वाले क्षेत्र में बसी है। 359 मजरों वाली सरकंडी ग्राम पंचायत में 51 हजार 900 बीघे खेती योग्य जमीन है। कुल क्षेत्रपल 63 वर्ग किमी है। इस समय यहां पर करीब 13 हजार मतदाता है। वहीं गढ़ा की बात करें तो यह जिले की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत है। यह 64 वर्ग किमी क्षेत्रफल में फैली है। यहां 15 हजार मतदाता हैं।
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निषाद बाहुल्य सरकंडी ग्राम पंचायत का गठन होने के बाद पहली बार नत्थू निषाद प्रधान बने थे। इसके बाद 16 साल शिवप्रसाद सिंह प्रधान रहे। फिर क्षत्रिय समाज के तिलस्म को ग्राम पंचायत के गोकरण निषाद ने तोड़ा और प्रधान बने। गोकरण के बाद फिर ग्राम पंचायत के पहले प्रधान नत्थू निषाद को मतदाताओं ने प्रधान बनाया। फिर रामऔतार मौर्य, सियावती पत्नी रामऔतार निषाद को प्रधान पद मिला।
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इसके बाद दो बार संतोष द्विवेदी प्रधान रहे। फिर पिछड़ी सीट हुई तो प्रेमशंकर निषाद को जनता ने प्रधान बनाया। अब फिर से प्रधानी की डुगडुगी बज चुकी है और अनुसूचित जाति के लिए सीट आरक्षित कर दी गई है। ऐसे में साफ है कि पहली बार सरकंडी ग्राम पंचायत की बागडोर अनुसूचित जाति के हाथ में रहेगी। इसके लिए राजनीति के खिलाड़ियों ने गोटें बिछानी शुरू कर दी है। गाम पंचायत में धोबी, रैदास, पासवान, कोरी, बाल्मीकि समाज के मतदाता हैं। इन्हीं जातियों में से किसी एक के सिर पर प्रधानी का ताज सजेगा।