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30 साल से एक ही फर्म रही सिंचाई विभाग के रोस्टर
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फतेहपुर। फसलों की सिंचाई के लिए किस नहर में कितना पानी मिलेगा, इसका सिंचाई विभाग रोस्टर बनवाता है। रोस्टर कौन संस्था छापेगी, इसकी निविदा निकाली जाती है, लेकिन जिले में ऐसा नहीं हो रहा है। 30 साल से एक ही संस्था निचली गंगा व जरौली पंप कैनाल के रोस्टर बना रही है। जल लेखा सहायक संघ के अध्यक्ष अनुपम अवस्थी ने इसकी शिकायत डीएम अपूर्वा दुबे से की है।
जल लेखा सहायक संघ के अध्यक्ष अनुपम अवस्थी ने बताया कि रबी और खरीफ फसलों की सिंचाई के लिए नहर के पानी का साल में दो बार रोस्टर बनाया जाता है। रोस्टर के लिए निविदा निकाली जाती है और टेंडर के आधार पर संस्था का चयन होता है, लेकिन निचली गंगा नहर व जरौली पंप कैनाल के रोस्टर में ऐसा नहीं हो रहा है। पिछले 30 साल से एक ही संस्था रोस्टर छाप रही है।
बिना निविदा के गुपचुप तरीके से रोस्टर छपवा कर अधिकारी व कर्मचारी खेल कर रहे हैं। हर बार जब रोस्टर छापे जाते हैं, तो दो रुपये बढ़ा दिए जाते हैं। अनुपम अवस्थी ने बताया कि जरौली और निचली गंगा नहर के 1200-1200 रोस्टर छपवाए जाते थे, लेकिन अब सिर्फ 300-300 रोस्टर ही छापे जाते हैं।
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जबकि बिल 1200-1200 रोस्टर के ही लगाकर भुगतान कराए जाते हैं। रोस्टर छपने के बाद विभागीय अधिकारियों के अलावा डीएम, सीडीओ, कृषि अधिकारी, उप कृषि निदेशक, सांसद, विधायक, सिंचाई विभाग अधीक्षण अभियंता व प्रगतिशील किसानों को दिया जाना चाहिए, लेकिन अब ऐसा नहीं होता है। सिर्फ अधिकारियों को रोस्टर देकर खानापूरी की जाती है। जिलाधिकारी अपूर्वा दुबे ने इस प्रकरण की जांच कराने की बात कही है।
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जल लेखा सहायक संघ के अध्यक्ष अनुपम अवस्थी ने बताया कि रबी और खरीफ फसलों की सिंचाई के लिए नहर के पानी का साल में दो बार रोस्टर बनाया जाता है। रोस्टर के लिए निविदा निकाली जाती है और टेंडर के आधार पर संस्था का चयन होता है, लेकिन निचली गंगा नहर व जरौली पंप कैनाल के रोस्टर में ऐसा नहीं हो रहा है। पिछले 30 साल से एक ही संस्था रोस्टर छाप रही है।
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बिना निविदा के गुपचुप तरीके से रोस्टर छपवा कर अधिकारी व कर्मचारी खेल कर रहे हैं। हर बार जब रोस्टर छापे जाते हैं, तो दो रुपये बढ़ा दिए जाते हैं। अनुपम अवस्थी ने बताया कि जरौली और निचली गंगा नहर के 1200-1200 रोस्टर छपवाए जाते थे, लेकिन अब सिर्फ 300-300 रोस्टर ही छापे जाते हैं।
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जबकि बिल 1200-1200 रोस्टर के ही लगाकर भुगतान कराए जाते हैं। रोस्टर छपने के बाद विभागीय अधिकारियों के अलावा डीएम, सीडीओ, कृषि अधिकारी, उप कृषि निदेशक, सांसद, विधायक, सिंचाई विभाग अधीक्षण अभियंता व प्रगतिशील किसानों को दिया जाना चाहिए, लेकिन अब ऐसा नहीं होता है। सिर्फ अधिकारियों को रोस्टर देकर खानापूरी की जाती है। जिलाधिकारी अपूर्वा दुबे ने इस प्रकरण की जांच कराने की बात कही है।