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किसानों को व्यापारिक खेती से आय बढ़ाने के दिए टिप्स
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फतेहपुर। हसवा ब्लाक के मिचकी गांव में दो दिवसीय कृषि प्रशिक्षण गोष्ठी की शुरूआत मंगलवार को हुई। जिसमें किसानों को व्यापारिक खेती से आय बढ़ाने के तरीके बताए गए।
इसके साथ ही रसायनिक खादों के संतुलित प्रयोग करने और जैविक खाद घर में बनाने की तरकीब बनाई।
गोष्ठी में जिला उद्यान अधिकारी ने कहा कि सब्जी की खेती से किसानों की आय बढ़ेगी। खेत में पार्ट बनाकर अलग-अलग सब्जी की फसल बोएं।
ऐसे में बाजार में किसी एक सब्जी की दर कम होने पर दूसरी सब्जी से उस घाटे को पूरा कर लें। उन्होंने बताया कि फसलों की सिंचाई के लिए विभाग 90 फीसदी अनुदान पर ड्रिप, स्प्रिंकलर दिए जा रहे हैं।
इससे सिंचाई में पानी कम लगेगा और फसल भी अच्छी होगी। कृषि वैज्ञानिक डॉ.नौशाद आलम ने कहा कि रसायनिक खाद का फसलों में बहुत संतुलित मात्रा में प्रयोग करें।
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अधिक खाद के उपयोग से मिट्टी की उत्पादन शक्ति कम हो रही है। किसान अपनी फसलों के अवशेष को एक गड्ढे में डाल दें और उसके ऊपर से गोबर डाल दें।
जहां पर छाया रहे, वहीं पर गड्ढा बनाएं। दो महीने में जैविक खाद तैयार होगी। पशुपालन वैज्ञानिक डॉ. देवेंद्र स्वरूप ने कहा कि खेती के साथ पशुपालन बहुत जरूरी है।
जो किसान पशुपालन करते हैं। उनको फसल तैयार करने में रसायनिक खाद की जरूरत बहुत कम होती है। इसी प्रकार भूमि संरक्षण अधिकारी बबलू कुमार और सहायक उद्यान निरीक्षक धर्मेंद्र कुमार ने विभागीय योजनाओं के विषय में बताया। इस मौके पर प्रगतिशील किसान महेंद्र सिंह, धर्मेंद्र सिंह, सुरेंद्र, वीरेंद्र, जयसिंह मौजूद रहे।
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इसके साथ ही रसायनिक खादों के संतुलित प्रयोग करने और जैविक खाद घर में बनाने की तरकीब बनाई।
गोष्ठी में जिला उद्यान अधिकारी ने कहा कि सब्जी की खेती से किसानों की आय बढ़ेगी। खेत में पार्ट बनाकर अलग-अलग सब्जी की फसल बोएं।
ऐसे में बाजार में किसी एक सब्जी की दर कम होने पर दूसरी सब्जी से उस घाटे को पूरा कर लें। उन्होंने बताया कि फसलों की सिंचाई के लिए विभाग 90 फीसदी अनुदान पर ड्रिप, स्प्रिंकलर दिए जा रहे हैं।
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इससे सिंचाई में पानी कम लगेगा और फसल भी अच्छी होगी। कृषि वैज्ञानिक डॉ.नौशाद आलम ने कहा कि रसायनिक खाद का फसलों में बहुत संतुलित मात्रा में प्रयोग करें।
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अधिक खाद के उपयोग से मिट्टी की उत्पादन शक्ति कम हो रही है। किसान अपनी फसलों के अवशेष को एक गड्ढे में डाल दें और उसके ऊपर से गोबर डाल दें।
जहां पर छाया रहे, वहीं पर गड्ढा बनाएं। दो महीने में जैविक खाद तैयार होगी। पशुपालन वैज्ञानिक डॉ. देवेंद्र स्वरूप ने कहा कि खेती के साथ पशुपालन बहुत जरूरी है।
जो किसान पशुपालन करते हैं। उनको फसल तैयार करने में रसायनिक खाद की जरूरत बहुत कम होती है। इसी प्रकार भूमि संरक्षण अधिकारी बबलू कुमार और सहायक उद्यान निरीक्षक धर्मेंद्र कुमार ने विभागीय योजनाओं के विषय में बताया। इस मौके पर प्रगतिशील किसान महेंद्र सिंह, धर्मेंद्र सिंह, सुरेंद्र, वीरेंद्र, जयसिंह मौजूद रहे।